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संसद की गरिमा और प्रतिष्ठा को नुकसान होगा.. BJP सांसद जायसवाल की राहुल के 'असंसदीय' शब्दों को हटाने की मांग

बीजेपी के सांसद संजय जायसवाल ने राहुल गांधी के लोकसभा में दिए गए भाषण के कुछ असंसदीय शब्दों को हटाने की मांग की है. जायसवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को इस बाबत चिट्ठी लिखी है.

संसद की गरिमा और प्रतिष्ठा को नुकसान होगा.. BJP सांसद जायसवाल की राहुल के 'असंसदीय' शब्दों को हटाने की मांग
संजय जायसवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखी है चिट्ठी
नई दिल्ली:

भारतीय जनता पार्टी के सांसद और लोकसभा में मुख्य सचेतक संजय जायसवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए कथित 'असंसदीय शब्दों' और 'बेबुनियाद आरोपों' को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग की है.

राहुल के शब्द मर्यादा के खिलाफ 

जायसवाल ने अपने पत्र में कहा कि 11 फरवरी को केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ कई ऐसे शब्दों और अभिव्यक्तियों का प्रयोग किया, जो लोकसभा की मर्यादा के खिलाफ हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने बिना किसी पूर्व सत्यापन के गंभीर आरोप लगाए, जो संसदीय परंपराओं का उल्लंघन है.

कई शब्दों को हटाने की मांग 

बीजेपी सांसद ने पत्र में लोकसभा सचिवालय द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'अनपार्लियामेंट्री एक्सप्रेशंस (2021)' का हवाला देते हुए कुछ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों का उल्लेख किया. इनमें 'भारत को बेच दिया गया', 'भारत माता को बेच दिया गया' जैसे वाक्यांश शामिल हैं. इसके अलावा, राहुल गांधी द्वारा भारत‑अमेरिका व्यापार समझौते को 'शर्मनाक' और 'अपमानजनक' करार देने तथा यह कहने कि इस समझौते के जरिए देश की जनता को 'मूर्ख बनाया गया', को भी असंसदीय बताया गया है.

कार्यवाही से हटाना जरूरी 

जायसवाल ने कहा कि यदि इस तरह की भाषा और आरोपों को समय रहते कार्यवाही से नहीं हटाया गया, तो वे लोकसभा के स्थायी अभिलेख का हिस्सा बन जाएंगे, जिससे संसद की गरिमा और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचेगा. उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की मर्यादा के लिए गंभीर विषय बताया.

अपने पत्र में बीजेपी सांसद ने लोकसभा के कार्य संचालन एवं प्रक्रिया नियमावली के नियम 380 का हवाला देते हुए लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग की है. इस नियम के तहत अध्यक्ष को यह अधिकार है कि वे सदन की कार्यवाही से असंसदीय, अपमानजनक या तथ्यहीन टिप्पणियों को हटाने का आदेश दे सकते हैं. यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है जब बजट सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच आर्थिक नीतियों और विदेश व्यापार समझौतों को लेकर तीखी बहस चल रही है.

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