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This Article is From Mar 12, 2026

बिटकॉइन घोटाला: CBI ने की पहली गिरफ्तारी, राज कुंद्रा से जुड़े केस में 'डार्विन लैब्स' का को-फाउंडर दबोचा गया

CBI ने इस मामले की जांच के दौरान देशभर में 60 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की थी. दिल्ली-एनसीआर, पुणे, चंडीगढ़, नांदेड़, कोल्हापुर, बेंगलुरु समेत कई शहरों में जांच की गई.

बिटकॉइन घोटाला: CBI ने की पहली गिरफ्तारी, राज कुंद्रा से जुड़े केस में 'डार्विन लैब्स' का को-फाउंडर दबोचा गया
  • CBI ने लगभग 20,000 करोड़ रुपये के बिटकॉइन स्कैम में Darwin Labs के सह-संस्थापक आयुष वर्श्नेय को गिरफ्तार किया.
  • GainBitcoin स्कीम 2015 में शुरू हुई थी, जिसमें निवेशकों को हर महीने दस प्रतिशत रिटर्न का लालच दिया जाता था.
  • यह स्कीम मल्टी-लेवल मार्केटिंग मॉडल पर आधारित थी और नए निवेशकों को जोड़ने पर अतिरिक्त लाभ का वादा करती थी.

देश के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी घोटालों में से एक माने जा रहे लगभग 20,000 करोड़ रुपये के कथित बिटकॉइन स्कैम में CBI ने पहली गिरफ्तारी की है. इस मामले में Darwin Labs के सह-संस्थापक आयुष वर्श्नेय को गिरफ्तार किया गया है. जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी श्रीलंका के कोलंबो भागने की कोशिश कर रहा था. लेकिन उसके खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर के आधार पर उसे एयरपोर्ट से ही हिरासत में ले लिया गया.

जांच एजेंसियों के मुताबिक यह घोटाला 2015 में शुरू हुई GainBitcoin स्कीम से जुड़ा है. इस स्कीम को अमित भारद्वाज (अब मृत), उनके भाई अजय भारद्वाज और उनके नेटवर्क ने शुरू किया था. इस योजना में निवेशकों को हर महीने 10 प्रतिशत रिटर्न का लालच दिया जाता था और कहा जाता था कि यह कमाई बिटकॉइन माइनिंग से होगी.

निवेशकों को क्रिप्टो एक्सचेंज से बिटकॉइन खरीदकर उसे कंपनी के प्लेटफॉर्म पर क्लाउड माइनिंग कॉन्ट्रैक्ट के जरिए निवेश करने के लिए कहा जाता था. जांच में सामने आया है कि यह स्कीम मल्टी-लेवल मार्केटिंग मॉडल पर आधारित थी. इसमें पुराने निवेशकों को नए निवेशक जोड़ने पर अतिरिक्त लाभ का वादा किया जाता था. इसी मॉडल के कारण यह स्कीम तेजी से देशभर में फैल गई और हजारों लोगों ने इसमें निवेश कर दिया.

शुरुआती दौर में निवेशकों को कुछ समय तक बिटकॉइन में भुगतान किया गया, लेकिन 2017 के बाद भुगतान कम होने लगा. इसके बाद कंपनी ने अचानक भुगतान MCAP नाम की अपनी कथित क्रिप्टोकरेंसी में करना शुरू कर दिया, जिसकी कीमत बिटकॉइन से काफी कम थी. जांच एजेंसियों का कहना है कि इससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ और असल में यह पूरी स्कीम पोंजी स्कीम की तरह चल रही थी.

CBI ने इस मामले की जांच के दौरान देशभर में 60 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की थी. दिल्ली-एनसीआर, पुणे, चंडीगढ़, नांदेड़, कोल्हापुर, बेंगलुरु समेत कई शहरों में जांच की गई. इस मामले में अलग-अलग राज्यों में दर्ज कई एफआईआर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2023 में सभी मामलों की जांच CBI को सौंप दी थी.

इस घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय  भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रहा है. ED अब तक भारत और विदेशों में कई संपत्तियां अटैच कर चुका है, जिनमें दुबई के छह ऑफिस भी शामिल हैं. इसके अलावा जांच में सामने आया है कि आरोपी क्रिप्टोकरेंसी के जरिए हवाला ट्रांजैक्शन भी करते थे. इनमें Bitcoin, Ethereum, USDT और Tron जैसी डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल किया गया.

मुख्य आरोपी अब भी फरार

इस मामले में अजय भारद्वाज और महेंद्र भारद्वाज अभी भी फरार बताए जा रहे हैं. ED पहले ही करीब 69 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच कर चुका है और विदेशों से भी मदद मांगी गई है ताकि अपराध से जुड़े पैसों का पता लगाया जा सके.

इस केस में अप्रैल 2024 में ED ने कारोबारी राज कुंद्रा की करीब 97.79 करोड़ रुपये की संपत्ति भी अटैच की थी. इसमें मुंबई के जुहू में स्थित फ्लैट, पुणे का एक बंगला और कुछ इक्विटी शेयर शामिल थे. बताया गया कि यह फ्लैट उनकी पत्नी अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के नाम पर है. जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मामला भारत के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी घोटालों में से एक हो सकता है. अनुमान है कि इस स्कीम में करीब 29,000 बिटकॉइन शामिल थे और पूरे देश में हजारों निवेशकों से ठगी की गई. फिलहाल CBI इस मामले में और गिरफ्तारियों की संभावना तलाश रही है और देश-विदेश में फैले नेटवर्क की जांच जारी है.

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