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This Article is From Nov 16, 2020

बिहार : सुशील मोदी को मंत्रिमंडल में नहीं रखने पर क्या है चर्चा?

शपथ ग्रहण के बाद नीतीश से जब पत्रकारों ने जब नीतीश कुमार से सवाल किया तो उन्होंने इसका गोलमोल जवाब देते हुए गेंद बीजेपी के पाले में डाल दी.

बिहार : सुशील मोदी को मंत्रिमंडल में नहीं रखने पर क्या है चर्चा?
पटना:

नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने सातवीं बार और लगातार चौथी बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. और बीजेपी की तरफ से दो डिप्टी सीएम बनाए गए हैं, तारकिशोर प्रसाद और रेनू देवी. इन्होंने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. इस बार सुशील मोदी (Sushil Modi) को डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया है चर्चा ये है कि उन्हें केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. शपथ ग्रहण के बाद नीतीश से जब पत्रकारों ने जब नीतीश कुमार से सवाल किया तो उन्होंने इसका गोलमोल जवाब देते हुए गेंद बीजेपी के पाले में डाल दी. नीतीश ने पहले कहा कि ये बीजेपी निर्णय है कि किसे मंत्री बनाना है फिर सुशील मोदी के अनुभव के बारे में पूछे जाने पर भी उन्होंने घुमाकर पत्रकार से कहा कि वो इस सवाल का जवाब बीजेपी से मांगे.

नीतीश कुमार ने कहा, "ये बीजेपी का निर्णय है, कि कौन कौन मंत्री बनेंगे कौन डिप्टी सीएम बनेंगे." क्या सुशील मोदी के अनुभव का इस्तेमाल करना चाहिए? इस सवाल के जवाब में नीतीश ने कहा, "आप उनसे सवाल करे तो बेहतर होगा."  इस बार नई टीम के बारे में सवाल पूछने पर नीतीश ने कहा है कि हर बार कुछ ना कुछ नयापन आता है. 

सुशील मोदी नीतीश कुमार के साथ हमेशा डिप्टी सीएम रहें लेकिन इस बार उन्हें नहीं रखने की बिहार में क्या चर्चा है? दरअसल बीजेपी में इसे लेकर कुछ इस तरह की चर्चा है. बीजेपी ने इस बार अपने कई मंत्रियों को इस कैबिनेट में जगह नहीं दी है शायद अगले कैबिनेट विस्तार में उनका नाम आ जाए. सुशील मोदी समेत  प्रेम कुमार, नंदकिशोर यादव, विनोद नारायण झा जैसे नेताओं को इस बार ब्रेक दिया है. इन सभी की तुलना में तारकिशोर प्रसाद और रेनू देवी बिलकुल नए हैं. रेनू देवी तो फिर भी एक बार मंत्री रहीं हैं लेकिन वो भी किसी बड़े विभाग की जिम्मेदारी नहीं संभाल रही थी. वहीं तारकिशोर तो पहले बार मंत्री बने हैं. इससे संकेत साफ है कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व बिहार में पिछले 15 सालों से जो लोग मंत्री बनते आए हैं उन्हें ब्रेक देना चाहती है और नए चेहरों के साथ बिहार की राजनीति करना चाहती है. 

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बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व ये मानकर चल रहा है कि इस बार बिहार की सरकार में उसका शेयर बढ़े. क्योंकि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व ये जानता है कि इस बार उनके मंत्रियों की संख्या उनके पास महत्वपूर्ण विभागों की संख्या 15 वर्षों की तुलना में सर्वाधिक होगी.  और इसका वो भरपूर लाभ उठाना चाहते हैं इसलिए आप कह सकते हैं कि इसलिए बीजेपी नए चेहरों को ज्यादा प्रमोट कर रही है अपने अनुभवी मंत्रियों को तुलना में जिनको इस बार एक तरह से दरकिनार कर दिया गया है. 

नीतीश के अलावा जनता दल-यूनाइटेड के कोटे से अशोक चौधरी, विजय चौधरी, मेवालाल चौधरी, विजेंद्र प्रसाद यादव और शीला मंडल ने मंत्री पद की शपथ ग्रहण की जबकि बीजेपी के मंगल पांडेय, जीवेश मिश्रा, रामप्रीत पासवान, अमरेन्द्र प्रताप सिंह और रामसूरत राय ने शपथ ली है. इसके अलावा 'हम' से संतोष मांझी और वीआईपी से मुकेश मल्लाह ने शपथ ली. संतोष मांझी, बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री जीतनराम मांझी के बेटे हैं.

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव आज नीतीश के शपथ ग्रहण में नहीं गए उन्होंने कहा कि ये जनादेश का आदर नहीं है. 

देस की बात : सुशील मोदी को मंत्रिमंडल में नहीं रखने पर क्या है चर्चा?

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