सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सुपरटेक द्वारा 2010 से 2012 के बीच निर्मित की जाने वाली 16 अटकी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने की मंजूरी दे दी है और निर्देश दिया है कि ये परियोजनाएं एनबीसीसी को सौंप दी जाएं. कोर्ट ने एनबीसीसी को अधिकतम तीन साल की निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया है. इस आदेश से लगभग 50,000-51,000 घर खरीदारों को बड़ी राहत मिली है जो एक दशक से अधिक समय से कब्जे का इंतजार कर रहे थे. कोर्ट ने पाया कि सुपरटेक परियोजनाओं को पूरा करने में विफल रही है और कंपनी पर धन के गबन के आरोप हैं.
फेज-1
इको विलेज 2 सेक्टर 168 ग्रेटर नोएडा
रोमानो सेक्टर 118 नोएडा
केपटाउन सेक्टर 74 नोएडा
जार सुइट्स ग्रेटर नोएडा
इको विलेज 3 सेक्टर 16बी, ग्रेटर नोएडा
स्पोर्ट्स विलेज सेक्टर 10 ग्रेटर नोएडा
इको सिटी सेक्टर 137 नोएडा
फेज-2
नॉर्थ आई सेक्टर 74 नोएडा
अपकंट्री सेक्टर 17ए, यमुना एक्सप्रेसवे
इको विलेज 1 सेक्टर 1 ग्रेटर नोएडा
मेरठ स्पोर्ट्स सिटी मेरठ
ग्रीन विलेज मेरठ
फेज 3
हिल टाउन-गुरुग्राम
अरावली -गुरुग्राम
रिवरक्रेस्ट-रुद्रपुर
दून स्क्वायर -देहरादून
मिकासा-बेंगलुरु

इसको देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें समय पर परियोजनाओं को पूरा करने और घर खरीदारों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए एनबीसीसी को परियोजनाओं के हस्तांतरण को मंजूरी दी गई थी.सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका आदेश अंतिम और बाध्यकारी है और कोई भी कोर्ट या फोरम परियोजनाओं को पूरा करने के लिए जारी निर्देशों के कार्यान्वयन में हस्तक्षेप नहीं करेगा
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