- बिहार का चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर केस लगातार सुखिर्यों में बना है. मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है.
- कुछ लोग भरत तिवारी को बदमाश तो कुछ उसे गरीबों के लिए आवाज उठाने वाला सामाजिक कार्यकर्ता बता रहे हैं.
- बिहार के भोजपुर जिले के इस चर्चित एनकाउंटर की पूरी कहानी क्या है? आइए जानते हैं...
Bharat Tiwari Encounter Case: भरत तिवारी क्रीमिनल था या सामाजिक कार्यकर्ता... एनकाउंटर में भरत की मौत के बाद आज यह बहस तेज हो चली है. नेता, स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता भरत के एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं. दूसरी ओर पुलिस चुप्पी की चादर ताने बैठी हैं. सरकार ने न्यायिक जांच की सिफारिश कर दी है. लेकिन लोग अब भी संतुष्ट नहीं नजर आ रहे हैं. मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुकी है. बिहार के भोजपुर जिला से 25 किलोमीटर दूर स्थित शाहपुर प्रखंड के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर को लेकर जो बवाल मचा है, आइए समझते हैं उसकी पूरी कहानी.
हाथ में पिस्टल लिए भरत तिवारी ने प्रशासन को दी चुनौती
15-16 जून को एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें भरत भूषण तिवारी हाथ में पिस्टल लेकर फेसबुक लाइव से जिला प्रशासन एवं सरकार को चुनौती देता हुआ दिखाई दे रहा था. वायरल वीडियो में वो लगातार सरकार की नाकामियों और जिला प्रशासन के उदासीन रवैये को बता रहा था.
वीडियो वायरल होने के बाद 17 जून की सुबह शाहपुर थाना प्रभारी अपने दल-बल के साथ मामले की सत्यता को जांच करने बिलौटी गांव पहुंचे थे. जहां उन्होंने भरत भूषण तिवारी को हाथ में पिस्टल लहराते देखा. जिससे वायरल वीडियो की पुष्टि हो गई.
बिहार के भोजपुर ज़िले के बिलौटी गांव में 17 जून को पुलिस मुठभेड़ में जिस भरत भूषण तिवारी (28) की गोली लगने से मौत हुई थी
— Adv Deepak Babu (@dbabuadvocate) June 21, 2026
उसी भरत भूषण का 16 जून 2026 का वीडियो है जब पुलिस उसे पकड़ने आई थी तो पुलिस बंदूक तान रखी तभी उसके बाद भरत भूषण ने अपनी पिस्तौल तान थी।
भरत भूषण का कोई भी… pic.twitter.com/bMV6v71aJu
फिर थाना प्रभारी राजेश मलाकर ने भरत भूषण तिवारी से बात कर मामले को समझने की कोशिश की, मगर वो उसको समझाने में पूरी तरह से नाकाम रहे दिनभर चली कहासुनी में कोई हल नहीं निकल पाया. इस दौरान का एक वीडियो सामने आया, जिसमें भरत की मां भी उसे समझाती नजर आई थी.
18 जून को STF ने भरत तिवारी की घर को चारों ओर से घेरा
जब थाना प्रभारी से बात नहीं बन पाई तो पुनः 18 जून को STF की टीम ने भरत भूषण तिवारी के घर को चारों तरफ से घेर लिया और उसे हथियार फेंककर आत्मसमर्पण करने को बोलने लगे, तभी भरत तिवारी द्वारा तीन गोली चलाई गई, जिसमें दो गोलियां जमीन में दागी और एक हवा में चलाई गई. बहुत कहासुनी के बाद, अंततः भरत भूषण तिवारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और हथियार पुलिस के आगे फेंक दिया.
हथियार फेंकने के बाद पुलिस ने भरत को मारी गोलियां
मगर जैसे ही भरत भूषण तिवारी ने हथियार पुलिस के आगे फेंका, पुलिस ने उसे पकड़ा और कथित तौर पर दो से तीन गोलियां दाग दी. गांव वालों और घरवाले के अनुसार, पुलिस ने वहां उसे दो से तीन गोलियां मारी, मगर भरत के शरीर से चार गोलियां बरामद हुई, जिससे यह स्पष्ट रूप से साबित होता है कि पुलिस ने आगे जाकर उसके शरीर में और गोली मारी.
बिहार पुलिस न पहनावे से न भाषाशैली से भरत तिवारी पागल लग रहा है। बिना कोई साक्ष्य के किसी को पागल घोषित करके **काउंटर करने का अधिकार किसने दिया?
— jeet (@_be_logical__) June 19, 2026
अवैध हथियार रखने के मामले में गिफ्तार करके कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए थी ।
जब कोई व्यक्ति सिस्टम से हारता है तो आवाज उठाएगा ही। pic.twitter.com/n5z3PHO8Si
सूत्रों के अनुसार दो गोलियां लगने के बाद भरत पूरी तरह से हंस रहा था और ये कह रहा था कि अब गांव का उद्दार हो जाएगा. मेरे जाने के बाद गांव वालों की समस्या दूर हो जाएगी. गांव वालों के अनुसार पुलिस ने उसे मारने के मंशा से ही दो-तीन गोलियां और दागी, जिससे वो बुरी तरह से घायल हो गया.
प्राथमिक उपचार के लिए उसे शाहपुर के रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसके बाद फिर उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया, मगर वहां भी उसे बेहतर उपचार के लिए पटना पीएमसीएच रेफर कर दिया गया, जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
19 जून को भरत के शव के साथ लोगों का विरोध-प्रदर्शन
भरत की मौत के बाद गांव वालों ने 19 जून को उसके शव को बक्सर, पटना फोरलेन पर रख घंटों, बवाल काटा. लगभग 8-10 घंटे शव को रखकर बक्सर, पटना फोरलेन जाम कर दिया, जिससे आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया. घंटों गाड़ियां खड़ी रह जाने वाले लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
पुलिस के लाख समझाने के बाद भी जाम खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था, गांव वाले लगातार पुलिस वालों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर और उन्हें सजा देने की मांग कर रहे थे. जाम के दौरान पब्लिक और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली. पुलिस ने तो लोगों पर ही अपने बंदूकें तान दी थी. काफी समझाने के बाद जाम समाप्त हो पाया था.
गोली मत चलाइए….गोली मत चलाइए…..
— Shubham Shukla (@Shubhamshuklamp) June 19, 2026
भरत तिवारी के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों में दहशत।
लोकतंत्र के लिए कितनी सुंदर तस्वीर है। धत्त तेरी ऐसे निर्दयी निर्मम सिस्टम की। pic.twitter.com/OU0kw1cCmi
भरत के पिता-भाई पर भी प्राथमिकी
भरत तिवारी के अंतिम संस्कार के बाद उसके पिता और भाई पर ही मुकदमा दर्ज होने की जानकारी सामने आई. भरत के पिता और भाई पर आरोप लगा कि अवैध हथियार छुपाने की जानकारी उन्होंने पुलिस की नहीं दी. यह FIR शाहपुर के पूर्व SHO राजेश मालाकार द्वारा दर्ज कराई गई. जिन्हें बवाल बढ़ने पर सस्पेंड किया जा चुका है.
उधर दूसरी तरफ बक्सर, पटना फोर लेन जाम कर उत्पाद मचाने वालों के खिलाफ भी पुलिस ने चौदह को नामजद अभियुक्त बनाया तथा पचास से अधिक लोगों के खिलाफ अज्ञात प्राथमिकी दर्ज की. घटना के बाद से ही मामले ने राजनीतिक रुख पकड़ लिया और लगातार नेताओं का आना जाना लगा रहा.
नेता, सामाजिक कार्यकर्ता भी उठा रहे सवाल
विपक्ष के साथ-साथ भाजपा सरकार के भी कई नेता गण बिलौटी, गांव पहुंच परिजनों से भेंट कर उन्हें सांत्वना दी. भोजपुर सांसद सुदामा प्रसाद ने परिवार वालों से भेंट कर उन्हें सद्भावना दिया और न्याय दिलवाने का विश्वास दिलाया और साथ ही साथ पचास लाख रुपए की मुआवजा की मांग, परिवार वालों के लिए की और एक सरकारी नौकरी देने की बात सरकार से की.
शहीद भाई भरत तिवारी को एहसास हो गया था कि सिस्टम उनके खिलाफ एनकाउंटर की साजिशें रच रहा है इसलिए उन्होंने पूर्व में ही वीडियो बनाकर अपलोड कर दिया था कि अगर उनकी हत्या होती है तो उनके शरीर के अंग आर्मी के जवानों को डोनेट कर दिए जाएं,,
— Samrat Verma🛡️ (@samrat_verma72) June 20, 2026
हीरा जैसे जनसेवक को मार दिया भोजपुर बिहार… https://t.co/6a4hA6Dyy8 pic.twitter.com/bXNg2tkfnp
पुराने वीडियो में गंगा कटाव पीड़ितों के लिए आवाज उठाता दिख रहा भरत
भरत तिवारी की मौत के बाद अब उसके कई पुराने वीडियो वायरल हो रहे हैं. जिसमें वो गंगा कटाव पीड़ित लोगों के लिए कई मांगें करता नजर आ रहा है. कई वीडियो में भरत तिवारी सरकार और प्रशासन की नाकामियों पर बुरी तरह भड़का हुआ भी नजर आ रहा है. जिसमें वो प्रशासन और सरकार पर गाली-गलौज भी करता नजर आ रहा है.
इधर जवानिया और बिलौटी के गंगा कटाव पीड़ित लोग उसे अपना मसीहा बताते नजर आ रहे हैं. उनका कहना है कि वो गांव समाज की भलाई की बात किया करता था. गांव वालों के अनुसार, 2020-21 में ही भरत तिवारी ने अपना पिंडदान भी कर दिया था और अपना पूरा जीवन गांव समाज के लिए समर्पित कर दिया था.
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