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मैसूर सिल्क साड़ियों का ऐसा क्रेज! कीमत 25 हजार से 3 लाख, फिर भी सुबह 4 बजे से लाइन में लगी महिलाएं

कई महिलाओं के लिए, शोरूम से रेशम की साड़ी खरीदना सिर्फ शॉपिंग नहीं बल्कि यह एक अनमोल परंपरा और विरासत का प्रतीक है. यह बेंगलुरु के शाश्वत शिल्प कौशल के प्रति उनके अटूट प्रेम को दिखाता है.

मैसूर सिल्क साड़ियों का ऐसा क्रेज! कीमत 25 हजार से 3 लाख, फिर भी सुबह 4 बजे से लाइन में लगी महिलाएं
बेंगलुरु में मैसूरु रेशम साड़ियों की भारी मांग
बेंगलुरु:

असली मैसूरु रेशम की मांग इतनी ज़्यादा है कि वर्किंग डेज में भी महिलाएं सुबह 4 बजे से ही केएसआईसी शोरूम के बाहर पहुंच जाती हैं, जबकि दुकान सुबह 10 बजे खुलती है. मंगलवार को भी शोरूम में बहुत भीड़ देखी गई. साड़ियां महंगी होने के बाद भी महिलाओं में इसका क्रेज बहुत ज्यादा है. इन साड़ियों की कीमत 25,000 रुपये से लेकर 3 लाख रुपये से भी ज्यादा है. लेकिन ये साड़ियां अपनी कीमत के लिए नहीं, बल्कि अपनी क्वालिटी और विरासत के लिए महिलाओं के दिल में अलग ही जगह बनाए हुए हैं. 

महिलाओं में GI टैग वाली सिल्क साड़ियों का क्रेज

अधिकारियों ने बताया कि केएसआईसी शोरूम के मैसूरु रेशम पर जीआई टैग लगा होता है, जो शुद्धता की गारंटी देता है. जबकि हर जरी साड़ी पर एक विशिष्ट कोड और होलोग्राम होता है, जो प्रामाणिकता की गारंटी देता है. कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (KSIC) देश का एकमात्र ऐसा ऑर्गनाइजेशन है, जो रेशम प्रोडक्ट की पूरी प्रक्रिया की देखरेख करता है.

बेंगलुरु के KSIC शोरूम के बारे में जानें

कोकून से रेशम निकालने से लेकर अलग-अलग रंगों और डिज़ाइनों में रेशमी कपड़े बुनने तक, सब कुछ एक ही छत के नीचे किया जाता है. कोर्पोरेशन अपनी वेबसाइट पर बताता है, "हम सिर्फ हाई क्वालिटी वाले प्राकृतिक रेशम और 100 प्रतिशत शुद्ध सोने की ज़री का इस्तेमाल करते हैं." कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन के मुताबिक, ज़री कभी काली नहीं पड़ती. सालों के इस्तेमाल के बाद भी इसकी चमक  बरकरार रखती है.

शोरूम में साड़ियों के लिए लंबी कतार

बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा रोड पर मौजूद शोरूम में लाइन में खड़े लोगों को टोकन दिए जाते हैं, एक टोकन से ग्राहक को केवल एक ही साड़ी खरीदने की अनुमति मिलती है. बता दें कि शनिवार को शोरूम में करीब 50 साड़ियां उपलब्ध होती हैं, जो आमतौर पर सोमवार सुबह तक बिक जाती हैं.

पिछले हफ्ते, शोरूम में 60 साड़ियां थीं. केएसआईसी के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया, "कुछ महंगी साड़ियों को छोड़कर, बाकी सभी बिक गईं." 

सिल्क साड़ी सिर्फ शॉपिंग नहीं, परंपरा है

साड़ी के शोरूम में लगी इस भीड़ को सोशल मीडिया पर लोगों ने खूब पसंद किया. हालांकि राकेश कृष्णन सिम्हा नाम के एक यूजर ने लंबी लाइन का वीडियो पोस्ट कर साड़ी की आपूर्ति की कमी को उजागर किया. उन्होंने कहा कि केएसआईसी के पास मैसूर रेशम के प्रोडक्ट का आधिकारिक अधिकार हैं.

कई महिलाओं के लिए, शोरूम से रेशम की साड़ी खरीदना सिर्फ शॉपिंग नहीं बल्कि यह एक अनमोल परंपरा और विरासत का प्रतीक है. यह बेंगलुरु के शाश्वत शिल्प कौशल के प्रति उनके अटूट प्रेम को दिखाता है.

इनपुट- PTI

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