पश्चिम बंगाल के सालबोनी भूमि घोटाला मामले में गुरुवार को उस वक्त बड़ा घटनाक्रम देखने मिला, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय को CID ने गिरफ्तार कर लिया. यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद हुई. जांच एजेंसी का आरोप है कि पश्चिम मेदिनीपुर के सालबोनी क्षेत्र में सरकारी जमीन को कथित रूप से निजी संपत्ति बताकर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से बेचा गया और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन में भारी रकम का इस्तेमाल हुआ. मामले की जांच के दौरान रॉय के बैंक खातों में करोड़ों रुपये जमा होने की जानकारी भी सामने आई है, जिसे लेकर जांच एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं.
सुप्रीम कोर्ट से राहत खत्म होते ही गिरफ्तारी
सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट से संरक्षण समाप्त होने के बाद CID की एक टीम अभिषेक बनर्जी के कलिघाट स्थित आवास पहुंची. वहां से सुमित रॉय को हिरासत में लिया गया और आगे की पूछताछ के लिए CID मुख्यालय भवानी भवन ले जाया गया. इससे पहले 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सुमित रॉय की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था. अब अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद जांच एजेंसी ने कार्रवाई तेज कर दी है.
क्या है सालबोनी भूमि घोटाला मामला?
जांच एजेंसियों के अनुसार मामला पश्चिम मेदिनीपुर जिले के सालबोनी क्षेत्र में सरकारी जमीन के कथित अवैध हस्तांतरण और बिक्री से जुड़ा है. आरोप है कि सरकारी जमीन को निजी जमीन के रूप में दर्शाया गया और फर्जी दस्तावेजों तथा कथित काल्पनिक विक्रेताओं की मदद से उसका लेनदेन किया गया. बाद में इस जमीन को बेचकर आर्थिक लाभ हासिल किया गया. जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है.
बैंक खातों में करोड़ों रुपये जमा होने का दावा
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कहा गया था कि जांच में सुमित रॉय के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकदी जमा होने की जानकारी मिली है. सरकार के अनुसार एक लेनदेन में करीब 71 लाख रुपये जमा किए गए थे, जबकि विभिन्न खातों में कुल जमा राशि लगभग 15 करोड़ रुपये बताई गई. जांच एजेंसी का कहना है कि इन लेनदेन की प्रकृति और स्रोत का पता लगाने के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है.
बचाव पक्ष ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में सुमित रॉय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा था कि उनके मुवक्किल जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई है. बचाव पक्ष ने बैंक खातों में जमा रकम को पार्टी सदस्यता शुल्क और राजनीतिक चंदे से जुड़ा धन बताया था.
राज्य सरकार और जांच एजेंसी का पक्ष
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब-जब पुलिस गिरफ्तारी के लिए पहुंची, तब कार्रवाई में बाधा डाली गई. जांच एजेंसी का कहना है कि पूरे प्रकरण में कई अहम तथ्यों की पुष्टि अभी बाकी है.
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