- बारामती उपचुनाव में 55 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला कड़ा हो गया है
- कांग्रेस ने स्थानीय प्रत्याशी आकाश मोरे को मैदान में उतारकर NCP की निर्विरोध जीत की उम्मीदों को चुनौती दी है
- धनगर आरक्षण के लिए अनशन करने वाले चंद्रकांत वाघमोड़े ने भी नामांकन किया है और पवार परिवार पर आरोप लगाया है
Baramati up Chunav 2026; राजनीति में जो सोचा जाए, अक्सर वैसा होता नहीं ...ताजा उदाहरण महाराष्ट्र का बारामती उपचुनाव है. पूर्व डिप्टी CM अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद यह माना जा रहा था कि सहानुभूति की लहर के बीच बारामती का उपचुनाव निर्विरोध संपन्न होगा. लेकिन नामांकन के आखिरी दिन तक जो तस्वीर सामने आई,उसने चौंका दिया है. यहां उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के खिलाफ एक-दो नहीं, बल्कि 54 उम्मीदवारों ने ताल ठोक दी है. कुल 55 उम्मीदवारों के 68 पर्चों ने बारामती के इस दंगल को अब 'निर्विरोध' से 'महा-मुकाबले' में तब्दील कर दिया है.
निर्विरोध की उम्मीदों पर कांग्रेस का पानी
बारामती की राजनीतिक बिसात पर राष्ट्रवादी कांग्रेस (NCP) यह मानकर चल रही थी कि अन्य दल सम्मान स्वरूप उम्मीदवार नहीं उतारेंगे. लेकिन नामांकन के आखिरी दिन इंडियन नेशनल कांग्रेस ने स्थानीय चेहरा एडवोकेट आकाश मोरे को मैदान में उतारकर लड़ाई को फंसा दिया है. पूर्व विधान परिषद सदस्य विजयराव मोरे के पुत्र आकाश मोरे के आने से अब मुकाबला सीधा और कड़ा नजर आने लगा है. इसके साथ ही करुणा मुंडे और अभिजीत बिचुकले जैसे चर्चित नामों ने भी पर्चा भरकर इस चुनाव में महायुति के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
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धनगर आरक्षण: जब अपनों की बेरुखी बनी चुनौती
सुनेत्रा पवार के लिए केवल विपक्षी पार्टियां ही नहीं, बल्कि सामाजिक नाराजगी भी चुनौती बनकर सामने आई है.
"जब वे हमारे आरक्षण का विरोध करते हैं, तो हम उनका विरोध क्यों न करें?"—वाघमोड़े का यह सवाल बारामती के धनगर वोट बैंक में सेंध लगा सकता है.
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9 अप्रैल तक की मोहलत और भुजबल का भरोसा
सूत्रों का दावा है कि भले ही उम्मीदवारों की लंबी कतार दिख रही हो, लेकिन एनसीपी ने अभी हार नहीं मानी है. नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख 9 अप्रैल है और पार्टी के रणनीतिकार अब पर्दे के पीछे से सक्रिय हो गए हैं. कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल को अभी भी भरोसा है कि कांग्रेस आलाकमान और अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों को मना लिया जाएगा. एनसीपी की पूरी कोशिश है कि इस चुनाव को निर्विरोध कराकर अजित दादा को एक सच्ची श्रद्धांजलि दी जाए.
सहानुभूति की लहर और अजित पवार की विरासत
गौरतलब है कि साल 2024 के चुनाव में अजित पवार के सामने 24 उम्मीदवार थे, जिनमें उनके भतीजे योगेंद्र पवार भी शामिल थे. उस समय बारामती की जनता ने अजित पवार को 1 लाख 81 हजार से अधिक मतों की भारी बढ़त दिलाई थी. अब अजित दादा के निधन के बाद हो रहे इस उपचुनाव में संवेदनाओं की लहर है. हालांकि राजनीतिक समीकरणों ने फिलहाल निर्विरोध चुनाव की संभावनाओं को कठिन बना दिया है, लेकिन 9 अप्रैल तक सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कितने उम्मीदवार मैदान से पीछे हटते हैं.
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