Mohammad Saleem Safi's weapon: अक्सर मजाक में भारतीय फैंस तंज कसते हैं कि अगर किसी का डेब्यू अच्छा करना हो, तो उसे भारत के खिलाफ मैच खिला दो. पता नहीं भाई कि यह बात कितनी सच है, लेकिन अफगानिस्तान के लिए पहला टेस्ट खेल रहे मोहम्मद सलीम सैफी (Mohammad Saleem Saifi) ने मुल्लनपुर में खेले जा रहे भारत-अफगानिस्तान (Ind vs Afg 1st Test) के बीच इकलौते टेस्ट के दूसरे दिन इस बात को बहुत ही अच्छी तरह साबित किया. अगर बैटिंग पिच पर भारत के खिलाफ उसकी की धरती पर पहले ही टेस्ट की पहली पारी में पांच विकेट मिल जाएं, तो भाई साहब यह तो सपना सच होने वाली बात. कम से किसी अफगानिस्तानी बॉलर के लिए तो यह बहुत ही बड़ी बात है. पहले ही टेस्ट में 5 विकेट. और वह भी भारत के खिलाफ. क्या बात.. क्या बात..! सलीम सैफ ने टेस्ट करियर के पहले ही मैच की पहली पारी में फेंके 27 ओवरो में 3 मेडन रखते हुए 140 रन देकर 6 विकेट लिए
भारत के लिए हिडन प्रॉपर्टी थे सलीम!
टीम इंडिया के ज्यादातर खिलाड़ी हाल ही में व्हाइट-बॉल क्रिकेट खेल कर आ रहे हैं, तो वही सलीम सैफी भारतीयों के लिए हिडन प्रॉपर्टी थे! जब पहले किसी बॉलर को नहीं देखा होता और आप एकदम से व्हाइट-बॉल क्रिकेट खेलकर आते हैं, तो ऐसा होता है, जो भारतीय बल्लेबाजों के साथ हुआ, लेकिन इसके बावजूद जिन गेंदों पर सलीम ने कप्तान शुभमन गिल और ध्रुव जुरेल को आउट किया, वो अच्छी गेंद थीं. इन दोनों ही गेंदों ने दोनों खासे अनुभवी और इससे ऊपर तकनीकी रूप से समृद्ध बल्लेबाजों को गच्चा दिया. सोच कुछ और रहे थे दोनों और हुआ कुछ, तो समझो गेंद कुछ समझ में नहीं आई. और जब समझ में नहीं आई, तो आप समझें कि कुछ और ही हो रहा था. जी हां, सलीम ने यहां ज्यादा तो नहीं, बल्कि काफी हद तक इन दोनों को रिवर्स स्विंग के हथियार से आउट किया.
यह काफी रिवर्स स्विंग का असर था.
रिवर्स स्विंग एक हवा में कांटा बदलती है, तो टप्पा खाकर भी राह बदलती है. सलीम ने दूसरे पहलू को चुना. गिल वाली गेंद की सीम पोजीशन (सिलाई) लेग गली की ओर थी. और लगा नहीं था कि यह टप्पा खाने के बाद तेजी से बाहर निकल जाएगी, लेकिन यही हुआ और गिल को कुछ समझ में नहीं आया कि कब गेंद बॉल बल्ले के बाहरी किनारे को चूम गई.
और कुछ ऐसा ही ध्रुव जुरेल के मामले में भी हुआ. गेंद को जज करने में जुरेल से गलती हो रही थी. वजह यही थी कि गेंद टप्पा पढ़ने के बाद कांटा बदल रही थी. ऑफ स्टंप के काफी बाहर टप्पा खाया था गेंद ने और ध्रुव जुरेल ने एक्रॉस पैर निकालते हुए गेंद को विकेटकीपर के दस्तानों में जाने लिए बल्ला ऊपर उठा दिया. पर ये क्या!! कांटा बदला भाई साहब..स्टंप में घुस गई गेंद! पारी समाप्त.

कैप्शन: सलीम सैफ की गेंद पर जुरेल बोल्ड हो गए. सोर्स: सोशल मीडिया
चलिए थोड़ा-थोड़ा जानिए कि टप्पा खाने के बाद रिवर्स स्विंग कैसे काम करती है
सबसे बड़ा भ्रम यह है कि रिवर्स स्विंग सिर्फ हवा में होती है. हाथ से गेंद छूटने के बाद यह हवा में भी होती है और टप्पा खाने के बाद भी कांटा बदलती है. यह दोनों तरह से बल्लेबाज पर असर डालती है. पहली वाली सूरत यानी हवा में रिवर्स कराने के लिए हवा और मौसम से मदद मिलना जरूरी है, लेकिन दूसरे में यह पहलू ज्यादा कारगर नहीं है. इसी दूसरे पहलू ने मुल्लनपुर में गिल और जुरेल सहित भारतीय बल्लेबाजों पर असर डाला.
हवा में गेंद का व्यहवार
गेंद हवा में तैरते हुए अचानक अपना रास्ता बदलती है. चूंकि यह बहुत देर से रास्ता बदलती है, तो बल्लेबाज को संभलने का मौका नहीं मिलता और वह ठगा रह जाता है. ज्यादातर केसों में बल्लेबाज बोल्ड या एलबीडब्ल्यू का शिकार होता है.
टप्पा खाने के बाद गेंद का बर्ताव
रिवर्स स्विंग में गेंद जिस तरफ हवा में लहराती हुई आती है, टप्पा खाने के बाद भी उसी दिशा में और तेजी से अंदर या बाहर निकलती है. सबसे खतरनाक बात पुरानी गेंद होने के कारण इसका वजन हवा के घर्षण से प्रभावित होता है. टप्पा खाने से ठीक पहले या बाद में गेंद अचानक नीचे की तरफ 'डिप' (Dip) करती है और तेजी से विकेटों में घुसती है. इसी वजह से रिवर्स स्विंग पर सबसे ज्यादा बल्लेबाज LBW या बोल्ड होते हैं.
इसकी सीम किस तरफ होती है?
पारंपरिक स्विंग में सीम को थोड़ा तिरछा रखा जाता है, लेकिन रिवर्स स्विंग में कहानी बदल जाती है. रिवर्स स्विंग कराते समय गेंदबाज गेंद की सीम को बिल्कुल सीधा या जिस दिशा में स्विंग कराना है, उस तरफ बेहद मामूली सा रखता है. सीम को सीधा रखने का मकसद यह है कि हवा दोनों तरफ से बराबर निकले, लेकिन गेंद के दोनों हिस्सों (चमकदार और खुरदरे) का वजन और बनावट अलग होने के कारण हवा अपना काम कर सके.
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