दिल्ली में 1 नवंबर 2026 से BS-IV और उससे पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी लग गई है इसमें ढाई लाख ऐसे वाहन हैं, जो दिल्ली में दूध, फल-सब्जी जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए शहर में आते हैं ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इससे राजधानी में सामानों की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है सप्लाई कम होती तो फल-सब्जी जैसी चीजें त्योहारों के दौरान महंगी हो सकती हैं इन प्रतिबंधों से राजधानी में आवश्यक सामानों की आपूर्ति, थोक व्यापार, खुदरा सामानों की आवाजाही पर असर पड़ेगा एनसीआर के शहरों से 10 लाख के करीब छोटे-बड़े वाहन रोजाना दिल्ली में आते हैं.
दिल्ली के थोक बाजार में सप्लाई पर संकट
अखिल भारतीय ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. हरीश सबरवाल का कहना है कि इसमें 2.5 लाख BS-6 माल ढुलाई वाले वाहन हैं हल्के और मध्यम मालवाहक वाहनों और बसों की संख्या भी कम नहीं है दिल्ली अपनी खाने-पीने की जरूरतों के लिए उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल जैसे राज्यों से आने वाली खाद्य सामग्री पर निर्भर है गाजीपुर, साहिबाबाद, आजादपुर जैसी मंडी के अलावा सदर बाजार, सरोजिनी नगर जैसे तमाम इलाकों तक ऐसे पुराने वाहनों की आवाजाही होती है करोल बाग, गफ्फार मार्केट, नेहरू प्लेस से लेकर खारी बावली तक बड़े बाजार हैं दिल्ली की प्रमुख फल एवं सब्जी मंडियों में आजादपुर मंडी, गाजीपुर मंडी, ओखला APMC, केशोपुर मंडी और शाहदरा मंडी शामिल हैं, यहां रोजाना हजारों की तादाद में ट्रक, मिनी ट्रक और लोडर वगैरा आते हैं दूध की आपूर्ति टैंकरों जैसे वाहनों से होती है इन वाहनों आवाजाही रुकने पर दूध आपूर्ति पर संकट आ सकता है
फल और सब्जियां पड़ोसी राज्यों से
- सेब मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से आते हैं।
- आलू की आपूर्ति उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा से होती है।
- प्याज महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से आता है।
- टमाटर और हरी सब्जियां हरियाणा, यूपी, पंजाब से
- कर्नाटक और महाराष्ट्र से भी आता है मौसमी सामान
- केला महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और गुजरात से आता है
- मौसमी फल हिमाचल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों से दिल्ली आता है
दूध और डेयरी उत्पादों की आपूर्ति पर संकट
हरियाणा से सोनीपत, पानीपत, रोहतक और झज्जर से दूध आपूर्ति
यूपी में गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर और मुजफ्फरनगर से सप्लाई
राजस्थान के अलवर और भरतपुर और पंजाब से भी आपूर्ति
मांस, चिकन-मछली और अंडे
दिल्ली में चिकन और पोल्ट्री उत्पाद हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश से आते हैं
अंडों की आपूर्ति हरियाणा के बरवाला क्षेत्र और पंजाब के पोल्ट्री उत्पादक क्षेत्रों से
बकरे और भेड़ का मांस राजस्थान और हरियाणा से आता है
ताजी मछली उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से पहुंचती हैं
समुद्री एवं फ्रोजन मछली की आपूर्ति आंध्र और गुजरात जैसे राज्यों से होती है।
गाजीपुर का मछली एवं पोल्ट्री बाजार इसका सबसे बड़ा थोक केंद्र
दिल्ली में क्या असर पड़ेगा
फल, सब्जियां, दूध, ब्रेड, अंडे, मांस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में देरी.
थोक मंडियों और खुदरा बाजारों में वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित होना.
परिवहन लागत, माल ढुलाई और वितरण खर्च में वृद्धि.
आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर दबाव और उपभोक्ताओं के खर्च में बढ़ोतरी.
किसानों और उत्पादकों को उनकी उपज समय पर मंडियों तक पहुंचाने में कठिनाई.
छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, ट्रांसपोर्टरों और वाहन चालकों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव.
औद्योगिक इकाइयों और निर्माण गतिविधियों के लिए कच्चे माल तथा अन्य सामान की आपूर्ति में बाधा.
वैकल्पिक वाहनों और ट्रांसशिपमेंट की व्यवस्था न होने पर लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर दबाव
राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के प्रमुख डॉ. हरीश सबरवाल ने कहा इन पुराने वाहनों पर प्रतिबंध का असर केवल ट्रांसपोर्टरों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि किसानों, उत्पादकों, व्यापारियों, मंडी कारोबारियों, दुकानदारों, औद्योगिक इकाइयों और आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा.किसी भी प्रतिबंध को लागू करने से पहले उसके आर्थिक और सामाजिक प्रभावों का समुचित आकलन किया जाए.
ब्रेड, आटा और खाद्यान्न आपूर्ति भी बाहर से
दिल्ली में ब्रेड और बेकरी उत्पादों की आपूर्ति दिल्ली-NCR की बेकरी फैक्ट्रियों के साथ-साथ बाहर से आने वाले गेहूं, आटे और अन्य कच्चे माल पर निर्भर करती है गेहूं और अन्य अनाजों की सप्लाई पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों से होती है नरेला, नजफगढ़, खारी बावली और नया बाजार इसके केंद्र हैं
दवाइयों की आपूर्ति भी गड़बड़ा न जाए
दिल्ली में दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति दिल्ली-NCR के अलावा हिमाचल प्रदेश के बद्दी, उत्तराखंड के हरिद्वार, गुजरात के अहमदाबाद और देश की अन्य फार्मा फैक्ट्रियों से होती है इनमें से कई वस्तुओं के लिए समयबद्ध और तापमान नियंत्रित परिवहन आवश्यक होता है। मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर अचानक प्रतिबंध से अस्पतालों, दवा वितरकों और फार्मेसी नेटवर्क की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है
दिल्ली के प्रमुख थोक बाजार भी प्रभावित होंगे
ट्रांसपोर्टर यूनियनों का कहना है कि दिल्ली में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और वितरण से जुड़े प्रमुख केंद्रों में आजादपुर, गाजीपुर, ओखला, केशोपुर, शाहदरा, नरेला, नजफगढ़, खारी बावली, नया बाजार, मोरी गेट जैसे थोक बाजार शामिल हैं रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति भी होती है खाद्यान्न भंडारण और वितरण के लिए FCI गोदाम तथा औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स केंद्रों तक भी सड़कों से आवाजाही होती हैसंजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर, मायापुरी, ओखला, घेवरा, नरेला और तुगलकाबाद जैसे क्षेत्र माल की आवाजाही और वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
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दिल्ली के ये बॉर्डर सबसे सबसे ज्यादा प्रभावित
- कुंडली-सिंघु (NH-44): पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर से आने वाला माल
- राजोकरी (NH-48): गुरुग्राम, मानेसर, राजस्थान और गुजरात की ओर से आने वाला माल
- बदरपुर: फरीदाबाद, पलवल, हरियाणा और दक्षिण भारत से आने वाला सामान
- टिकरी बॉर्डर: बहादुरगढ़, रोहतक, झज्जर और पश्चिमी हरियाणा से आने वाला सामान
- गाजीपुर और चिल्ला बॉर्डर: उत्तर प्रदेश और पूर्वी क्षेत्रों से आने वाली सामानों की आपूर्ति
- कापसहेड़ा: गुरुग्राम और आसपास के औद्योगिक एवं व्यापारिक क्षेत्रों से आने वाला सामान
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