- नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी फिल्म 'हनुमान अंश' ने दो करोड़ के बजट में 140 करोड़ से अधिक की कमाई की है
- बाबा नीम करौली का असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था, जो उत्तर प्रदेश के फरोजाबाद के ब्राह्मण परिवार से थे
- 12 साल की उम्र में मां के निधन के बाद लक्ष्मी नारायण ने घर छोड़कर भक्ति और तपस्या में लीन हो गए थे
नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी फिल्म हनुमान अंश इन दिनों दर्शकों का खूब प्यार बटोर रही है. लगभग 2 करोड़ के बजट में बनी फिल्म अब तक 140 करोड़ रुपये से ज्यादा कमा चुकी है. फिल्म बनाने वाले इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे. फिल्म के बीच बाबा नीम करौली धाम जाने वाले भक्तों की संख्या भी इन दिनों बढ़ गई है. फिल्म देखने के बाद बाबा में आस्था रखने वाले लोग उनके दर्शन के लिए उत्तराखंड के कैंची धाम से लेकर यूपी के नीम करोरी आश्रम तक दौड़े जा रहे हैं. कंबल ओढ़े बाबा की तस्वीर को आपने कई जगह पर देखा होगा. लेकिन क्या आपको पता है कि बाबा नीम करौली का असली नाम क्या है?
बाबा नीम करौली का असली नाम क्या है?
दरअसल ज्यादातर भक्त उनको बाबा नीम करौली या नीम करौली वाले बाबा के नाम से ही जानते हैं. बहुत ही कम लोगों को उनका असली नाम पता होगा. क्या आपको बाबा का असली नाम पता है? अगर नहीं तो जान लीजिए कि बाबा नीम करौली का असली नाम था लक्ष्मी नारायण शर्मा. ये नाम उनको उनके परिवार से मिला था. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के फरोजाबाद के अकबरपुर में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था.

neem karoli baba Kainchi Dham
12 साल की उम्र में त्यागा घर
बालक लक्ष्मी नारायण जब छोटे थे तब उनकी मां का देहांत हो गया था. जिसके बाद से उनका मन सांसारिक मोह माया से ऊबने लगा. वह भगवान को पाना चाहते थे. राम को पाने की चाहत में वह उनके भक्त हनुमान के काफी करीब आ गए. वह हनुमान भक्ति में इतना लीन रहने लगे की महज 12 साल की उम्र में वह घर और गांव छोड़कर चले गए. जंगल से होते हुए अलग-अलग राज्यों में पहुंचे. बालक लक्ष्मी नारायण को अचानक ऐसे ज्ञान की प्राप्ति हुई कि उन्होंने अपना नाम छोड़ दिया.

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नीम करोरी कैसे पड़े बाबा का नाम?
लक्ष्मी नारायण गृहस्थ त्यागकर जगह-जगह साधुओं के साथ मिलकर रहते थे. वह ज्यादातर समय भक्ति और तपस्या में ही लीन रहते थे. इस बीच लोग उनको महाराज जी कहकर पुकारते. साउथ होते हुए एक दिन वह उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद के नीम करोरी पहुंचे.बाबा यहां लंबे समय तक रहे. तभी से उनका नाम नीम करोरी बाबा पड़ गया. बाद में जाकर उनको बाबा नीम करौली कहा जाने लगा. इस बीच किसी को ये पता ही नहीं था कि बाबा का असली नाम है क्या. भक्तों के लिए वे सिर्फ बाबा नीम करोरी थे. बाबा में आस्था रखे वालों का मामना हैं कि बाबा बहुत चमत्कारी थे. वह लोगों की परेशानियां पल भर में समाप्त कर देते थे. बाबा को हनुमान जी का अवतार माना जाता है. आज भी उनके चमत्कार उनको मानने वाले महसूस करते हैं और उनके दर्शन के लिए उनके आश्रमों में खिंचे चले जाते हैं.
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