नीम करोली बाबा और कैंची धाम किसी परिचय के मोहताज नहीं है. न सिर्फ भारत बल्कि विदेशों तक नीम करोली बाबा और कैंची धाम का जिक्र हो रहा है. इतिहास के पन्नों में नीम करोली बाबा का नाम ऐसे महात्माओं में शामिल है, जिन्होंने अपना साधारण जीवन जिया और किसी लोभ, लालच या फिर प्रचार-प्रसार के मोहताज नहीं रहे. जब दुनिया औद्योगिक क्रांति की तरक्की कर रही थी, हर तरफ हरित क्रांति और दुग्ध क्रांति हो रही थी. दुनिया के कोई देश विकसित हो रहे थे. साइंस का युग चल रहा है, ऐसे में नीम करोली बाबा 20वीं सादी में एक ऐसे आध्यात्मिक गुरु के रूप में सामने आए, जिन्होंने भारत ही नहीं दुनिया के लोगों को आध्यात्मिकता की तरफ रुख करने के लिए प्रेरित किया.

कैंची धाम में कई नामी हस्तियां पहुंच चुकी हैं. स्टीव जॉब, मार्क जुकरबर्ग, विराट कोहली और अनुष्का शर्मा जैसे लोगों के पहुंचने के बाद नीम करोली बाबा के दर्शन करने कैंची धाम में लाखों लोग देश-विदेश से पहुंच रहे हैं. साल 2022 में विराट कोहली और अनुष्का शर्मा जब कैंची धाम पहुंचे उसके बाद यह जगह और ज्यादा सुर्खियों में आ गई. लोगों का हुजूम कैंची धाम पहुंचने लगा. लेकिन साल 2026 में 'हनुमान अंश' फिल्म आई, जो बेहद ही कम बजट की फिल्म है. यह पूरी फिल्म नीम करोली बाबा की जीवनी पर है. इस फिल्म को लोगों का इतना भरपूर साथ मिला कि अब तक 300 करोड़ रुपए से ज्यादा का बिजनेस कर चुकी है. फिल्म रिलीज होने के बाद कैंची धाम और ज्यादा मशहूर हो गया है.

कौन थे नीम करोली बाबा?
सन 1964 में आगरा के पास फिरोजाबाद के गांव अकबरपुर में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा (असली नाम) यहां तपस्या करने आए थे. उन्हीं की कोशिशों से इस मंदिर का उद्धार हुआ था. बताया जाता है कि फर्रूखाबाद के गांव नीम करौली में उन्होंने कठिन तपस्या की थी. इसके बाद वे बाबा नीम करौली कहलाने लगे. नीम करौली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरौजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में एक ब्राह्मण जमींदार घराने में हुआ था. उनके पिता दुर्गा प्रसाद शर्मा ने उनका नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा रखा था.
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फीरोजाबाद से नैनीताल आने के बाद सन 1962 के जून महीने में उन्होंने कैंची धाम मंदिर की स्थापना की थी. शुरू में आर्थिक रूप से बहुत कमजोर इस मंदिर में बाबा ने भक्ति और आध्यात्म के बलबूते कई आश्चर्यजनक चमत्कार किए थे. महाराज के तत्कालीन साथियों के मुताबिक, बाबा ने मंदिर में दीया जलाने की ख्वाहिश जताई लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर भक्त दीये के लिए घी का इंतजाम नहीं कर सके. इसकी जानकारी बाबा को हुई तो शाम को उन्होंने नदी के पानी से पूरे पहाड़ में दीये जलवा दिए. तभी से कैंची धाम में हर साल 15 जून को मेला आयोजित किया जाता है. यहां लाखों की तादाद में भक्त बाबा का प्रशाद और आशीर्वाद लेने धाम में पहुंचते हैं.
लोगों के जीवन में हो रहा चमत्कार!
कैंची धाम के निवासी और व्यापारी नरेश तिवारी बताते है कि जिस कैंची में बड़े हुए, वह बहुत शांत जगह थी, लेकिन विराट कोहली और अनुष्का के मंदिर आने के बाद, वहां भीड़ का आना कभी नहीं रुका. नरेश बताते हैं कि कुछ साल पहले, जब उन्होंने कंबल की दुकान खोलने का फैसला किया, तो उन्हें रेमंड कंबलों के लिए एक डिस्ट्रीब्यूटर की जरूरत थी. लेकिन उन्हें कोई डिस्ट्रीब्यूटर नही मिला, लेकिन उसी दिन कुछ ऐसा हुआ कि कैंची में रेमंड का एक डिस्ट्रीब्यूटर आ पहुंचा. उसके बाद से वह कंबल का व्यापार कर रहे है.

कैंची धाम में दर्शन करने पहुंचे एक युवा श्रद्धालु शुभंकर नौटियाल ने बताया कि उनकी बहुत समय से तमन्ना थी कि वह कैंची धाम जाएं और दर्शन करें. इसी बीच नीम करोली बाबा की जीवनी पर बनी फिल्म आई और उन्होंने फिल्म देखी. उसके बाद उनकी आंखों में आंसू आ गए और अंदर से एक खिंचाव सा महसूस हुआ. इसलिए वे कैंची धाम में नीम करोली बाबा के दर्शन करने आए हैं. शुभंकर नौटियाल कहते हैं कि वह दर्शन करके जो महसूस कर रहे हैं, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है. लखनऊ से आए आशु चौधरी कहते हैं कि वे 2021 से कैंची धाम में नीम करोली बाबा के दर्शन करने आते हैं.
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