असम के नगांव लोकसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने चुनावी मैदान छोड़ने का ऐलान करते हुए अपने उम्मीदवार का नाम वापस ले लिया है. पार्टी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने उसके नाम और चुनाव चिह्न पर अस्थायी रोक लगाकर लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित किया है. इसी विरोध में टीएमसी ने नगांव उपचुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है.
असम प्रदेश तृणमूल कांग्रेस ने नगांव लोकसभा उपचुनाव के लिए शिक्षाविद अब्दुल सलाम को उम्मीदवार बनाया था. हालांकि, नामांकन वापसी की अंतिम तारीख 19 सितंबर को पार्टी ने अपना उम्मीदवार वापस ले लिया.
पार्टी के राज्य संयोजक और मांडिया विधायक शेरमन अली अहमद ने चुनाव आयोग के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि पार्टी इस कदम से 'गहरे सदमे' में है.
चुनाव आयोग के फैसले पर उठाए सवाल
शेरमन अली अहमद ने बयान जारी कर कहा कि चुनाव आयोग का यह फैसला 'अन्यायपूर्ण और अलोकतांत्रिक' है. उनका आरोप है कि आयोग ने पार्टी के मूल नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अस्थायी रोक लगाकर लोकतंत्र का गला घोंटने का काम किया है. उन्होंने कहा कि इसी के विरोध में असम प्रदेश तृणमूल कांग्रेस समिति ने सर्वसम्मति से नगांव उपचुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है.
अब 15 उम्मीदवार चुनावी मैदान में बचे
उधर, असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के अनुसार नगांव लोकसभा उपचुनाव के लिए नामांकन वापसी की प्रक्रिया 19 सितंबर को पूरी हो गई. कुल 18 उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए थे, जिनमें से तीन उम्मीदवारों ने अंतिम दिन अपना नाम वापस ले लिया. इसके बाद अब 15 उम्मीदवार चुनावी मैदान में बचे हैं.
नगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान 6 अक्टूबर को होगा, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को की जाएगी. टीएमसी के चुनाव से हटने के बाद मुकाबले की तस्वीर बदल गई है और अब सभी की नजरें शेष उम्मीदवारों के बीच होने वाली चुनावी जंग पर टिकी हैं.
यह भी पढ़ें: कांग्रेस में TMC के विलय के लिए बात हो रही है... NDTV से बोले ममता बनर्जी के करीबी कुणाल घोष
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं