- पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी अपने सबसे मु्श्किल दौर से गुजर रही है.
- जिस चुनाव चिन्ह को खुद ममता ने तय किया था तृणमूल कांग्रेस की वह पहचान फ्रीज हो चुकी है.
- ऐसे में सवाल यह है कि क्या 75 साल की उम्र में पहुंच चुकी ममता बनर्जी फिर पार्टी को खड़ा कर पाएंगी.
ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थापना करके पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई बड़े परिवर्तन किए थे. लेकिन जिस तृणमूल कांग्रेस को ममता बनर्जी ने अपने दम पर खड़ा किया था, आज वही पार्टी अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है. चुनाव आयोग ने टीएमसी का नाम और उसका पुराना 'जोड़ा फूल' चुनाव चिन्ह दोनों फ्रीज कर दिए हैं, पार्टी दो गुटों में बंट चुकी है और दोनों ही खुद को असली टीएमसी बता रहे हैं. नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले अब चुनाव आयोग ने ममता गुट को नया नाम 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल' और 'फुटबॉल खिलाड़ी' का चुनाव चिन्ह दिया है, जिसका सीधा कनेक्शन 'खेला होबे' नारे से जोड़ा जा रहा है. वहीं तृणमूल कांग्रेस के दूसरे गुट ऋतब्रत बनर्जी को 'लिफाफा' चिन्ह दिया गया है. लेकिन ऐसी क्या वजहें रही जिससे ममता बनर्जी की पार्टी टूटती चली गई.
नंदीग्राम उपचुनाव से हटी ममता की प्रत्याशी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने के काफी समय बाद ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है. जहां उन्होंने घोषणा की कि वे नंदीग्राम से अपनी उम्मीदवारी वापस ले रही हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि नंदीग्राम उपचुनाव में यह ममता बनर्जी के लिए एक राजनीतिक विफलता है, ममता ने इस सीट के लिए संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था. लेकिन आखिरी समय में उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली. संचिता ने पहले सीएण शुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी और फिर अपना नामांकन वापस ले लिया. शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि यह उनकी जिम्मेदारी नहीं है. अगर उनकी अपनी पार्टी तीन या चार गुटों में टूट रही है, तो यह इस बात का संकेत है कि पार्टी पूरी तरह से बिखर चुकी है. इसके अलावा मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस घटना ने ममता के उस अस्पष्ट अहंकार को पूरी तरह तोड़ दिया है.
ममता बनर्जी की पार्टी का इस तरह से टूटना एक तरह का बड़ा झटका है. ममता ने बीजेपी पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा कि जनता लोकतंत्र को नष्ट कर रही है और टीएमसी पार्टी को हमेशा के लिए समाप्त करके अपना रास्ता साफ करना चाहती है.
कैसे मिला था तृणमूल का चुनाव चिन्ह
जब तृणमूल कांग्रेस का गठन हुआ था. तब पार्टी के सीनियर नेता मुकुल रॉय 'जोड़ा फूल' (दो फूल) के प्रतीक चिन्ह की तस्वीर लेकर चुनाव आयोग गए थे. वह तस्वीर खुद ममता बनर्जी ने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के ठीक सामने स्थित बहुमंजिला आवासीय परिसर में बनाई थी, जहां ममता रहा करती थीं. उन्होंने खुद वह प्रतीक चिन्ह बनाया था और मुकुल रॉय ने उस तस्वीर को एक लिफाफे के अंदर रखा, उसे सील किया, एक पत्र संलग्न किया और पार्टी के प्रतीक चिन्ह के लिए चुनाव आयोग में जमा कर दिया था. इसके बाद, जनवरी में मंजूरी मिलने के बाद घोषणा की गई.'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और 'जोड़ा फूल' प्रतीक चिन्ह दोनों ही उस राजनीतिक पहचान का हिस्सा थे जिसे ममता बनर्जी ने खुद बनाया था. आज वह पहचान खंडित हो चुकी है.
क्या यह टीएमसी का अंत है?
ममता बनर्जी ने जिस टीएमसी की स्थापना की थी, उसे वे धीरे-धीरे भारतीय राजनीति में एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान पर ले गईं थी. पार्टी एनडीए में भी शामिल हुई. ममता बनर्जी खुद दो बार रेल मंत्री बनीं. वे वाजपेयी सरकार के दौरान और बाद में मनमोहन सिंह की यूपीए-द्वितीय (UPA-II) सरकार के दौरान रेल मंत्री रहीं. लेकिन वह पूरी परंपरा अब खत्म होती दिख रही है. टीएमसी ने पश्चिम बंगाल में अपनी जड़े वाममोर्चा के खिलाफ जमाई थी. ममता बनर्जी बंगाल में सीपीएम विरोधी भावना का राजनीतिक चेहरा बनीं और आखिरकार वे सीपीएम को सत्ता से बेदखल करने में सफल रहीं. उस अर्थ में वे बंगाल के असंतोष की एक सफल राजनीतिक सूत्रधार थीं. उन्होंने राज्य में मौजूद राजनीतिक असंतोष को समझा, उस असंतोष का प्रभावी ढंग से उपयोग किया और आखिर में राज्य की मुख्यमंत्री बनीं थी.
क्यों ममता बनर्जी का उभार अहम था
ममता बनर्जी से पहले बंगाल में कई नेताओं ने प्रयास किए थे. लेकिन सफलता नहीं मिली. प्रणब मुखर्जी, बरकत गनी खान चौधरी, अशोक सेन, प्रियरंजन दासमुंशी और अन्य नेताओं ने वामपंथ के दबदबे को चुनौती देने का प्रयास किया था. लेकिन ममता ने जो किया वह कोई नहीं कर सका. वे सीपीएम को उखाड़ फेंकने में सफल रहीं. उस समय पश्चिम बंगाल में भाजपा कमजोर थी. लेकिन ममता बाद में भाजपा के साथ एनडीए में गईं और तब भी उनकी मुख्य राजनीतिक पहचान सीपीएम विरोधी राजनीति में ही निहित रही. 2011 में जब ममता सत्ता में आईं तो शायद वह उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि थी.
क्या टीएमसी के पतन को नहीं समझ पाई ममता
15 सालों की सत्ता में तृणमूल कांग्रेस ने बहुत कुछ देखा, लेकिन संगठन के रूप में टीएमसी का पतन अंदर से ही शुरू हो गया था. जब सीपीएम सत्ता में थी तो कई असामाजिक तत्व, निचले स्तर के उपद्रवी, माफिया और गुंडे धीरे-धीरे सीपीएम के तंत्र में शामिल हो गए थे. जब टीएमसी सत्ता में आई तो वही तत्व तृणमूल कांग्रेस में चले गए. सत्ता का यही ढांचा फिर टीएमसी के भीतर भी उभरने लगा. सत्ता ने पार्टी को बहुत कुछ दिया, लेकिन सतह के नीचे गिरावट हो रहा था. ममता बनर्जी खुद शायद इस क्षरण की सीमा को पूरी तरह से नहीं समझ सकीं. ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी एक युवा नेता के रूप में पार्टी में उभरे. शुरुआत में संगठन का निर्माण 'युवा' संरचना के इर्द-गिर्द किया गया था. धीरे-धीरे वे एक युवा नेता से ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव बन गए. जिसके बाद पार्टी का एक नाटकीय कॉरपोरेटकरण भी दिखा. हर जिले में टीएमसी नेतृत्व के ढांचे में भ्रष्टाचार का असर भी दिखा. जिससे पार्टी का राजनीतिक स्तर तेजी से बदला.
इस दौरान बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में अपना तेजी से विस्तार किया. पार्टी ने लगातार तृणमूल कांग्रेस के सीनियर नेताओं को भी पार्टी में शामिल करवाया, जिसमें सीएम शुवेंदु अधिकारी सबसे बड़ा चेहरा रहे. 2021 के चुनाव में बीजेपी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि 2026 के चुनाव में पार्टी ने सत्ता हासिल कर ली.
क्या होगा ममता बनर्जी का भविष्य?
राजनीतिक जानकारों के बीच भी फिलहाल अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ममता बनर्जी का भविष्य क्या होगा. क्योंकि ममता फिलहाल 75 साल की हैं. वे अभी भी शारीरिक रूप से सक्रिय हैं और एक बार फिर पार्टी को पुनर्गठित करने की योजना बना रही हैं. वे जिलावार अभियानों और संगठन को पुनर्जीवित करने के प्रयासों पर विचार कर रही हैं. एक तरफ बंगाल में 1947 के बाद पहली बार भाजपा सत्ता में आई है और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नया दौर शुरू हुआ है. तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी हार मानने को तैयार नहीं हैं. वह एक बार फिर मैदान में उतरकर जिलों का दौरा करने और संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी कर रही हैं.
ऐसे में क्या टीएमसी के पास सत्ता से बाहर रहकर खुद को बचाने की ताकत बची है? राजनीति के जानकारों का मानना है कि सत्ता हटते ही पार्टी का यूं गुटों में टूटना यह साबित करता है कि अंदरूनी कमजोरी बहुत गहरी है. फिलहाल टीएमसी का भविष्य गहरे बादलों से घिरा नजर आ रहा है.
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