- SC ने संवेदनशील क्षेत्र में तैनात अधिकारी के खिलाफ निचली अदालत में लंबित मामलों में कार्रवाई पर रोक लगा दी.
- अधिकारी की पत्नी ने छत्तीसगढ़ में उनके खिलाफ चार अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज कराए हैं और विवाद गहराया है.
- SC ने विवाद को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए कमेटी के समक्ष भेजने का निर्देश दिया.
संवेदनशील क्षेत्र में तैनात एक सेना अधिकारी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है.SC ने निचली अदालत में लंबित आपराधिक मामलों में उनके खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है. जानकारी के अनुसार, अधिकारी की पत्नी ने छत्तीसगढ़ में उनके खिलाफ चार अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज कराए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस वैवाहिक विवाद को सुलझाने के लिए मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया है. साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक मध्यस्थता प्रक्रिया जारी रहेगी, तब तक सेना अधिकारी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी.
सेना अधिकारी के खिलाफ 4 आपराधिक मामले दर्ज
सुप्रीम कोर्ट ने सेना के एक अधिकारी की याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ छत्तीसगढ़ की निचली अदालत में लंबित मामलों को ट्रांसफर करने की मांग की है. सुनवाई के दौरान सेना अधिकारी की ओर से पेश वकील ने जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच को बताया कि याचिकाकर्ता सक्रिय सेवा में हैं और वर्तमान में एक संवेदनशील क्षेत्र में तैनात हैं. उनकी पत्नी द्वारा छत्तीसगढ़ में कई मामले दायर किए गए हैं और आशंका है कि उन मामलों में अदालत कोई आदेश पारित कर सकती है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि पत्नी ने उनके खिलाफ चार आपराधिक मामले दर्ज कराए हैं.
दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कराने के आदेश
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी करते हुए पक्षकारों को समझौते की संभावना तलाशने के लिए मध्यस्थता के लिए भेजने का फैसला किया. अदालत ने निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी की देखरेख में 21 से 23 अगस्त के बीच आयोजित होने वाले “समाधान समारोह” के दौरान दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कराई जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता के नतीजे के आधार पर मामले को 1 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए. साथ ही अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक छत्तीसगढ़ की अदालत में लंबित मामलों में कोई आदेश पारित नहीं किया जाएगा. इस आदेश के साथ सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए पक्षों को आपसी सहमति से विवाद सुलझाने का मौका दिया है.
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