- सुप्रीम कोर्ट पांच मई से संशोधित नागरिकता अधिनियम 2019 की संवैधानिक वैधता पर अंतिम सुनवाई शुरू करेगा.
- सीएए का उद्देश्य छह धार्मिक समुदायों के प्रवासियों को भारत में नागरिकता प्रदान करना है जो 2014 से पहले आए थे.
- CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 2019-2020 से लंबित याचिकाओं पर सुनवाई के लिए निर्देश जारी किए.
सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह संशोधित नागरिकता अधिनियम, 2019 (सीएए) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली आईयूएमएल की प्रमुख याचिका सहित 200 से अधिक याचिकाओं पर पांच मई से अंतिम सुनवाई शुरू करेगा. सीएए का उद्देश्य हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, जैन और पारसी समुदायों से संबंधित उन प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करना है जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत में आए थे.
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने 2019-2020 से लंबित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई के संबंध में प्रक्रियात्मक निर्देश जारी किए. पीठ ने कहा कि वह याचिकाकर्ताओं, जिनमें इंडियन यूनियन ऑफ मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के प्रमुख भी शामिल हैं, की दलीलों पर डेढ़ दिन तक सुनवाई करेगी और केंद्र को अपनी दलीलें पेश करने के लिए एक दिन का समय दिया जाएगा.
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि पीठ 12 मई को याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर लेगी. पीठ ने पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अतिरिक्त दस्तावेज और दलीलें दाखिल करने को कहा. इसने कहा कि वह पहले पूरे भारत में सीएए के लागू होने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करेगी और उसके बाद असम तथा त्रिपुरा से संबंधित याचिकाओं पर विचार करेगी.
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