- तिरुपति मंदिर में लड्डू प्रसाद की गुणवत्ता जांच के लिए 25 करोड़ रुपये की लागत से हाईटेक फूड लैब बनाई गई है
- यह लैब 12,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैली है और केमिकल तथा माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्ट कर सकती है
- लैब में इलेक्ट्रॉनिक जीभ और इलेक्ट्रॉनिक नाक जैसी उन्नत मशीनें लगी हैं जो घी की शुद्धता तुरंत जांचती हैं
देश के फेमस तिरुपति बालाजी मंदिर में लड्डू प्रसाद में मिलावट का मामला सामने आने के बाद सरकार अलर्ट हो गी है. तिरुमला में करोड़ों रुपये की लागत से एक हाईटेक फूड लैब बनाई गई है. सीएम चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को इस लैब का उद्घाटन किया. बता दें कि इस लैब को प्रसाद के लड्डुओं की क्वालिटी चेक करने के लिए बनाया गया है. सीएम नायडू ने कहा कि ये प्रसाद की शुद्धता को बनाए रखने की दिशा में उठाया गया अहम कदम है.
प्रसाद के लड्डू की जांच के लिए बनी हाईटेक लैब
बता दें कि तिरुपति बालाजी मंदिर में इस हाईटेक लैब को 25 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है. भारत के किसी भी मंदिर में स्थापित होने वाली इस तरह की ये पहली लैब है. इसके उद्घाटन से पहले सीएम नायडू ने खुद 12,000 वर्ग फुट में फैले इस विशाल परिसर का दौरा किया. उन्होंने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSI) और केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (CFTRI) के एक्सपर्ट्स संग 50 से ज्यादा मशीनों का निरीक्षण किया.
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नई फूड लैब 12,000 वर्ग फुट के क्षेत्र में फैली हुई है. यह समान रूप से केमिकल और माक्रेबायोलॉजिकल टेस्ट कर सकेगी. इस लैब के लिए पैसा तीन जगहों से मिला है. FSSI ने 23 करोड़ रुपये दिए हैं साथ ही आंध्र प्रदेश सरकार और टीटीडी ने बाकी का पैसा लैब के लिए दिया है.
मिलावट को तुरंत पकड़लेगी 'जीभ' और 'नाक'
मंदिर में बनी इस फूड लैब में प्रसाद की जांच के लिए अलग-अलग तरह की मशीनें लगाई गई हैं. लेकिन इसके मुख्य उपकरण 'इलेक्ट्रॉनिक जीभ' और 'इलेक्ट्रॉनिक नाक' हैं. इनको 35 लाख रुपये की लागत से फ्रांस से मंगवाया गया है. यह मशीनें घी की शुद्धता, टेस्ट, स्मैल और इसमें होने वाले बदलावों का आसानी से पता लगा सकेंगे. यह कदम प्रसाद के लड्डुओं में इस्तेमाल होने वाले देसी घी की क्वालिटी को बनाए रखने के लिए उठाया गया है. घी की क्वालिटी में रत्ती भर कमी को ये मशीनें एक झटके में पकड़ लेंगी.
हर तरह के बैक्टीरिया पकड़लेगी मशीन
लैब के 50 उपकरण 200 किस्मों तक के बैक्टीरियल पेस्टीसाइड, हेवी मेटलस, एनिमल फेट, माइकोटॉक्सिन, एंटीबायोटिक्स और खाना, पानी में मौजूद सूक्ष्मजीव संदूषण की जांच कर सकते हैं. यह मशीनें प्रसाद के लड्डुओं की जांच करेंगी. इन लैब में हर महीने 1,000 से 1,500 सैंपल्स की टेस्टिंग की उम्मीद जताई जा रही है. स्वास्थ्य विभाग और टीटीडी के करीब 40 कर्मचारी इस लैब का कामकाज देखेंगे.
सीएम चंद्रबाबू नायडू ने बताया कि प्रसादम के लिए अब सिर्फ FSSI सर्टिफिकेशन वाली सामग्री ही मंगवाई जाती है. उन्होंने दावा किया कि मंदिर के अंदर परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता से 98 प्रतिशत श्रद्धालु संतुष्ट हैं.
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