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अचानक हंसने और रोने लगीं छात्राएं, अमरावती के स्कूल में 'भूत' का खौफ, दहशत में 600 से अधिक स्‍टूडेंट्स ने छोड़ा हॉस्‍टल

स्कूल में 'भूत-प्रेत' की अफवाह इस कदर फैली कि लगभग 608 छात्र-छात्राओं ने डर के मारे स्कूल और हॉस्टल छोड़ दिया और अपने-अपने घरों को लौट गए.

अचानक हंसने और रोने लगीं छात्राएं, अमरावती के स्कूल में 'भूत' का खौफ, दहशत में 600 से अधिक स्‍टूडेंट्स ने छोड़ा हॉस्‍टल
छात्र-छात्राओं की कराई जा रही काउंसल‍िंग.

अमरावती जिले के मेलघाट क्षेत्र से अंधविश्वास और खौफ का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. धारनी तालुका के डोमा स्थित आदिवासी आश्रम स्कूल में 'भूत-प्रेत' की अफवाह इस कदर फैली कि लगभग 608 छात्र-छात्राओं ने डर के मारे स्कूल और हॉस्टल छोड़ दिया और अपने-अपने घरों को लौट गए. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई 'भूत-बाधा' नहीं है, बल्कि 'मास हिस्टीरिया' का एक मनोवैज्ञानिक मामला है. इस घटना को गंभीरता से लेते हुए, महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ANIS और स्वास्थ्य विभाग की टीमें पिछले तीन दिनों से मेलघाट में डेरा डाले हुए हैं. छात्रों के मन से डर निकालने और उन्हें वापस स्कूल लाने के लिए युद्ध स्तर पर काउंसलिंग की जा रही है.

मेलघाट के आश्रम स्कूलों में समस्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. हाल ही में एक स्कूल में फूड पॉइजनिंग का मामला सामने आया था और अब डोमा के आदिवासी आश्रम स्कूल में अंधविश्वास ने पैर पसार लिए हैं. करीब सात-आठ दिन पहले, हॉस्टल में रहने वाली 15-16 छात्राएं अचानक जोर-जोर से हंसने और रोने लगीं. कुछ छात्राओं ने दावा किया कि उन्हें घुंघरू बजने की आवाजें आ रही हैं. 

लड़कियों पर भूत-प्रेत का साये की अफवाह

यह बात जब हॉस्टल अधीक्षिका उज्ज्वला इंगले के संज्ञान में आई, तो उन्होंने तुरंत मुख्याध्यापक को इसकी सूचना दी. लेकिन अगले ही दिन गांव में आग की तरह अफवाह फैल गई कि लड़कियों पर भूत-प्रेत का साया है. इस अफवाह ने ऐसा खौफ पैदा किया कि 300 से अधिक छात्राएं हॉस्टल छोड़कर अपने गांव भाग गईं, जिनमें सबसे ज्यादा लड़कियां 'एकताई' गांव की थीं.

डॉक्‍टरों ने बताया 'मास हिस्टीरिया'

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम तुरंत स्कूल पहुंची. मेडिकल जांच के बाद डॉक्टरों ने साफ किया कि यह कोई भूत-बाधा नहीं, बल्कि 'मास साइकोजेनिक इलनेस' यानी 'मास हिस्टीरिया' है, जो एक प्रकार की मनोवैज्ञानिक स्थिति है और इसका इलाज पूरी तरह संभव है. डॉक्टरों का कहना है कि दुनिया में भूत-प्रेत जैसी कोई चीज नहीं होती, यह पूरी तरह से एक अफवाह और अंधविश्वास है.

बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसके लिए महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ANIS के कार्यकर्ता मैदान में उतर गए हैं. ANIS की वरिष्ठ सदस्या नंदिनी जाधव (पुणे), रामभाऊ डोंगरे (नागपुर), प्रवीण देशमुख (मुंबई) और जिलाध्यक्ष हरीश केदार के नेतृत्व में कार्यकर्ता पिछले तीन दिनों से मेलघाट के दुर्गम इलाकों में पहुंच रहे हैं.

काउंसलिंग के बाद स्‍कूल जाने के ल‍िए तैयार हुईं छात्रांए

तेज बारिश और खराब रास्तों के बावजूद, समिति के सदस्य पांचडोंगरी, खडीमल, चूनखड़ी और एकताई जैसे गांवों में जाकर छात्राओं की काउंसलिंग कर रहे हैं. सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहा है. एकताई गांव की जिन छह लड़कियों की काउंसलिंग की गई, वे अब वापस स्कूल जाने के लिए तैयार हो गई हैं. वहीं, खडीमल में भी छात्राओं से बातचीत कर उनका डर दूर किया जा रहा है. समिति और स्कूल प्रशासन मिलकर बच्चों से अपील कर रहे हैं कि वे बिना डरे अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए स्कूल लौटें.

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