- गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 31 मार्च 2026 से पहले देश में नक्सलवाद का अंत हो गया
- नक्सल आंदोलन की शुरुआत 1967 में नक्सलबाड़ी से हुई थी और यह विचारधारा रूस और चीन के प्रभाव से विकसित हुई थी
- सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और सड़क जैसी सुविधाओं का व्यापक विकास किया है
गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को दावा किया कि तय मियाद के मुताबिक 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद का अंत हो चुका है. देश के 20 राज्यों में पसरे इस लाल गलियारे की वजह से बीते कई दशकों से क़रीब 20 करोड़ लोग प्रभावित थे. नक्सल आंदोलन की शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी से हुई थी. यह धीरे-धीरे एशिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाले उग्र आंदोलनों में से एक बन गया. लेकिन इसे बस विकास की कमी का संकट कहना ठीक नहीं है, अमित शाह ने साफ़ कहा कि ये एक विचारधारा की उपज था. उन्होंने कहा कि रूस और चीन से प्रभावित राजनीतिक दलों ने ऐसे संगठनों और विचारों को बढ़ावा दिया जो संसद पर भरोसा नहीं रखते थे. उनका ध्येय वाक्य था- सत्ता बंदूक की नली में होती है.
राहुल गांधी नक्सल समर्थकों से मिलते थे
अमित शाह ने कहा कि 2014 से पहले सरकारों को नक्सलवाद से सहानुभूति थी. सोनिया गांधी के नेतृत्व में जो राष्ट्रीय सलाहकार परिषद बनी थी, उसमें कई नक्सल समर्थक लोग थे. उन्होंने यहां तक कहा कि राहुल गांधी ऐसे लोगों से मिलते रहे. गृह मंत्री ने विस्तार से नक्सल इतिहास की चर्चा की और कहा कि सरकार ने इनके ख़िलाफ़ सख़्ती और नरमी दोनों की नीति अपनाई. जो बात करना चाहते थे उनसे बात की गई जो गोली चलाना चाहते थे उन्हें बलपूर्वक ख़त्म किया गया.
-
पीएम मोदी के ग्लोबल विजन से लेकर RBI गवर्नर के बड़े बयान तक, अखबारों के फ्रंट पेज पर छाया NDTV समिट -
'भारतीय दयालु, ईमानदार और बुद्धिमान होते हैं', खामेनेई ने अपने प्रतिनिधि को भारत भेजते समय क्या कहा था? -
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
ये भी पढ़ें- लाल आतंक के सबसे दुर्दांत चेहरे, जो एक के बाद एक होते गए ढेर
उन्होंने कहा कि इन इलाकों में नक्सल विरोधी अभियान के बाद विकास पर भी ज़ोर रहा. अब इन इलाक़ों में अस्पताल, स्कूल, सड़कें सब हैं. पहले सुकमा और बीजापुर में इलाज की सुविधा नहीं थी. अब जगदलपुर में 240 बेड का बड़ा अस्पताल बना है. बीजापुर और सुकमा में नए फील्ड अस्पताल बनाए गए. 6 पुराने अस्पतालों को भी बेहतर किया गया. 2017 से अब तक 67,500 से ज्यादा मरीजों का इलाज हुआ है. मितानिन योजना के तहत 70,000 से ज्यादा स्वास्थ्य कार्यकर्ता काम कर रहे हैं, इनमें ज्यादातर आदिवासी महिलाएं हैं. महिला समूहों ने भोजन, सफाई और महिलाओं की सुरक्षा पर काम किया. 12,927 स्वास्थ्य शिविर लगाए गए, इनसे 7,66,585 लोगों को फायदा मिला.
बैंकों और स्कूलों का मिल रहा फायदा
यही नहीं यहां रहने वाले आदिवासी लोग पहले बैंक से दूर थे. वे साहूकारों पर निर्भर थे. अब 6,025 नए डाकघर बैंकिंग सेवा के साथ खुले हैं. 1,804 बैंक शाखाएं और 1,321 एटीएम लगाए गए. 75,000 बैंकिंग प्रतिनिधि गांव-गांव सेवा दे रहे हैं. अब लोग घर पर ही बैंकिंग कर सकते हैं. इन इलाकों में पहले शिक्षा की कमी थी. इससे नक्सल संगठन लोगों को जोड़ते थे. अब 2014 के बाद 9,303 स्कूल बनाए गए. 258 एकलव्य स्कूलों में से 179 चालू हैं, यहां बच्चों को रहने और पढ़ने की सुविधा मिलती है. 11 केंद्रीय विद्यालय और 6 नवोदय विद्यालय भी खोले गए.अब सरकारी योजनाएं लोगों तक सीधे पहुंच रही हैं. यहां पर प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी बढ़े हैं. 2024 में 92,847 लोग थे. 2025 में यह संख्या 2,54,045 हो गई. मनरेगा में भी लोगों की संख्या बढ़ी है. यह 8,19,983 से बढ़कर 9,87,204 हो गई.
अगर सड़क और नेटवर्क की बात करें तो पहले ये इलाके कटे हुए थे. अब 17,500 किलोमीटर सड़क बनाई गई है. 9,000 मोबाइल टावर लगाए गए हैं. 2,343 टावर 4G में अपग्रेड हुए हैं. रेल लाइन भी तेजी से बन रही है. दल्लीराजहरा से रावघाट तक लाइन बन चुकी है, रावघाट से जगदलपुर तक काम जारी है.
3 साल में 4,839 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
गृह मंत्री ने जानकारी दी कि बीते 3 साल में 4,839 नक्सलवादियों ने आत्मसमर्पण किया, 706 नक्सलवादी मारे गए और 2218 गिरफ़्तार हुए. जो मुख्यधारा में लौटने को तैयार हैं, उनके लिए काफी अच्छी मुआवज़ा नीति बनाई गई है. जिन बच्चियों को बचपन में ही बंदूक थमा दी गई वे अब लिपस्टिक का इस्तेमाल करते हुए रो पड़ती हैं.नक्सल इलाके में सही मायने में लोकतंत्र की वापसी हुई है. अब लोग वोट डाल रहे हैं. बस्तर में वोटिंग 66.04% से बढ़कर 68.29% हो गई. कांकेर, राजनांदगांव और महासमुंद में भी बढ़ोतरी हुई. साथ ही बालोद जिला बाल विवाह मुक्त घोषित हुआ. सूरजपुर के 75 गांव भी बाल विवाह मुक्त हुए. वन अधिकार कानून के तहत आदिवासियों को जमीन के अधिकार मिले हैं.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं