- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है.
- अमित शाह ने वामपंथी नक्सलवाद को विदेशी विचारों का परिणाम बताया और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही.
- कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा- 75 वर्षों में आदिवासियों का विकास न हो पाने की जिम्मेदारी उनकी सरकारों पर.
Amit Shah on Naxalism: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के प्रयासों पर चल रही चर्चा के दौरान सदन को संबोधित किया. अमित शाह ने कहा कि सबसे पहले मैं रेड कॉरिडोर के नाम से पहचाने जाने वाले पूरे क्षेत्र, जिसमें 12 राज्य और 70 प्रतिशत का भूभाग शामिल थे, उसमें रह रही जनसंख्या की तरफ से सदन को धन्यवाद देना चाहता हूं. गृह मंत्री ने कहा कि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग-लगभग समाप्त हो चुका है. बस्तर के अंदर हर गांव में स्कूल बनाने की मुहिम चली. बस्तर के अंदर हर गांव में राशन की दुकान खोलने की मुहिम चली. मैं इतना ही पूछना चाहता हूं कि जो लोग कह रहे हैं कि अब तक आदिवासियों का विकास क्यों नहीं हुआ? तो, वो खुद बताएं कि 70 सालों से उन्होंने क्या किया?
जो भी हथियार उठाएगा, उसका हिसाब चुकता होगाः अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि मैं इसलिए कह रहा हूं कि सत्य को झुठलाया जा रहा है. ये बस्तर वाले इसलिए छूट गए थे, क्योंकि वहां लाल आतंक की परछाई थी, इसलिए वहां विकास नहीं पहुंचा. मोदी सरकार में आज वो परछाई हट गई है, और इसलिए आज बस्तर विकास कर रहा है. ये नरेंद्र मोदी की सरकार है, जो हथियार उठाएगा, उसका हिसाब चुकता होगा.
कांग्रेस पर कहा- अपनी गिरेबां में झांककर देखो कि दोषी कौन है
गृह मंत्री ने कहा, "मैं पूछना चाहता हूं कि 75 साल में 60 साल तो शासन आपने किया, आदिवासी अभी तक विकास से क्यों वंचित रहे? आदिवासियों का विकास तो अब नरेंद्र मोदी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि 60 साल आपने (कांग्रेस) उन्हें घर नहीं दिया, पानी नहीं दिया, स्कूल नहीं बना, बैंक की फैसिलिटी नहीं पहुंचने दिया, इसलिए पहले थोड़ा अपनी गिरेबां में झांककर देखो कि दोषी कौन है.
तिलका मांझी, बिरसा मुंडा, भगत सिंह नहीं माओ को आदर्श मानते हैं नक्सली
अमित शाह ने कहा, "नक्सलवादी तिलका मांझी को अपना आदर्श नहीं मानते थे. न ही वे भगवान बिरसा मुंडा, भगत सिंह या सुभाष बाबू को अपना आदर्श मानते थे. तो, फिर वे किसे अपना आदर्श मानते हैं? माओ को. यहां तक कि अपने आदर्शों के चयन में भी वे विदेशों से आयातित विचारों का सहारा लेते हैं."
अमित शाह ने भारत में माओवाद का इतिहास भी बताया
गृह मंत्री ने आगे कहा कि 1969 में भारत में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी), या सीपीआई (मार्क्सवादी), की स्थापना हुई. इसका प्राथमिक उद्देश्य न तो राष्ट्र का विकास था और न ही नागरिकों के अधिकारों की रक्षा. इसके बजाय, पार्टी का संवैधानिक लक्ष्य चीन और रूस के उदाहरणों का अनुसरण करते हुए सशस्त्र विद्रोह के माध्यम से संसदीय प्रणाली को उखाड़ फेंकना था. हालांकि, उन देशों के विपरीत, भारत में राजतंत्र नहीं था, बल्कि यहां लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार थी.
वामपंथियों ने भोले-भाले आदिवासियों को बरगलायाः अमित शाह
उन्होंने कहा कि ये परिवर्तन विकास की कमी या अन्याय के कारण नहीं हुआ. कठिन भूगोल और स्टेट की अनुपस्थिति के कारण अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए वामपंथियों ने इसी क्षेत्र को चुना, भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाया. नक्सलवाद गरीबी के कारण नहीं फैला, बल्कि नक्सलवाद के कारण इन पूरे क्षेत्र में सालों तक गरीबी रही. नक्सलवाद की जड़ें गरीबी और विकास से जुड़ी नहीं है, वो वैचारिक है.
ये डरने वाली सरकार नहीं है, सभी के साथ न्याय करने वाली सरकार हैः अमित शाह
उन्होंने कहा कि हम लोकतंत्र में हैं, हमने इस देश के संविधान को स्वीकार किया है. अन्याय किसी के साथ भी हो सकता है, विकास कहीं पर भी कम ज्यादा हो सकता है. मैं पूछना चाहता हूं कि आप अपनी लड़ाई संवैधानिक तरीकों से लड़ेंगे या हाथ में हथियार लेकर निर्दोषों को मार डालेंगे. किस थ्योरी का यहां से समर्थन हो रहा था. अगर आप धमकाना चाहते हैं कि ये होगा तो ये भी हथियार उठाएंगे, वो होगा तो वो भी हथियार उठाएंगे. लेकिन कान खोलकर सुन लीजिए... ये डरने वाली सरकार नहीं है, सभी के साथ न्याय करने वाली सरकार है.
कांग्रेस पर भी अमित शाह ने साधा निशाना
उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में नक्सलवाद की शुरुआत नक्सलबाड़ी, बंगाल से हुई. 1971 के एक ही वर्ष में 3620 हिंसा की घटनाएं वहां पर हुईं. 1980 का दशक आते-आते पीपल्स वार ग्रुप बन गया. और फिर ये महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा... ये तीन राज्यों में फैले. 1970 से 2004... इस पूरे कालखंड में 4 साल छोड़कर पूरा समय कांग्रेस पार्टी का शासनकाल रहा है... ये उनको याद रखना चाहिए.
अर्बन नक्सल पर अमित शाह का तीखा वार, कहा- निर्दोष किसान-जवान पर क्यों नहीं लिखा
अर्बन नक्सल पर अमित शाह ने कहा, "मैं उन अर्बन नक्सलों से सवाल करना चाहता हूँ - इनके सभी आर्टिकल हथियार उठाकर घूमने वालों से बातचीत करने की बात करते हैं, लेकिन उनके द्वारा मारे गए निर्दोष लोगों के बारे में क्यों नहीं लिखते? एक भी आर्टिकल उस माँ के लिए नहीं है, जिसके बच्चे को जबरन उठाकर नक्सली बना दिया गया, या उस किसान के लिए नहीं है जिसके पैर उड़ा दिए गए. 5 हज़ार से अधिक शहीद सुरक्षा बलों के जवानों की विधवाओं के लिए भी कुछ नहीं लिखा गया. इनकी मानवता का यह दोहरा चरित्र मैं स्वीकार नहीं करता - ये मानवतावादी नहीं, बल्कि नक्सल समर्थक हैं."
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