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This Article is From Feb 21, 2026

अमित शाह ने फिर दिला दी डेडलाइन की याद, बोले - 31 मार्च तक खत्म कर देंगे नक्सलवाद 

अमित शाह ने आगे कहा कि 10-11 साल पहले देश में जख्मों को कुरेदने वाले तीन बड़े ‘हॉटस्पॉट’ थे-जम्मू कश्मीर में आतंकवाद, पूर्वोत्तर में नक्सलवाद और उग्रवाद-जो अब शांति और प्रगति के केंद्र बन गए हैं.ये तीनों क्षेत्र, जो कभी बमबारी, गोलीबारी, नाकाबंदी और विनाश के लिए जाने जाते थे,आज देश के विकास का हिस्सा हैं

अमित शाह ने फिर दिला दी डेडलाइन की याद, बोले - 31 मार्च तक खत्म कर देंगे नक्सलवाद 
अमित शाह ने कहा 31 मार्च तक नक्सलवाद खत्म कर देंगे
NDTV
  • देशभर में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई जारी है, कई नक्सली आत्मसमर्पण या मुठभेड़ में मारे गए हैं
  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सल समस्या के समाधान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता 31 मार्च तक दोहराई है
  • ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट में सीआरपीएफ जवानों ने कठिन परिस्थितियों में नक्सलियों के गढ़ को ध्वस्त कर दिया था
नई दिल्ली:

देशभर में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों की कार्रवाई लगातार जारी है. झारखंड से लेकर छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ से लेकर महाराष्ट्र तक बड़े पैमाने पर या तो नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है या फिर वो सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए है. यही हाल देश के दूसरे राज्यों का भी है. जिस गति से सुरक्षाबलों की ये कार्रवाई चल रही है उसे देखते हुए लग रहा है कि नक्सलवाद का खात्मा केंद्र सरकार द्वारा तय डेडलाइन के आते-आते हो जाएगा. केंद्रीय गृहमंत्राी अमित शाह ने एक बार नक्सलवाद के खात्मे को लेकर केंद्र की प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोरहाया है.

अमित शाह ने पूर्वोत्तर में पहली बार आयोजित 87वीं सीआरपीएफ दिवस परेड को संबोधित करते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहां पत्थरबाजी की घटनाओं की संख्या घटकर शून्य हो गई है. इसके अलावा मणिपुर में जातीय हिंसा से निपटने और केवल तीन वर्षों में माओवादियों की कमर तोड़ने के लिए भी सीआरपीएफ को तैनात किया गया. 

उन्होंने कहा आगे कहा कि मैं सीआरपीएफ पर भरोसा कर सकता हूं और विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हम इसी साल 31 मार्च तक देश से नक्सल समस्या का सफाया कर देंगे. छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर कर्रेगुटा पहाड़ियों में 21 दिनों के ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' के लिए सीआरपीएफ की प्रशंसा की, जिसमें अप्रैल-मई 2025 में 31 नक्सली मारे गए थे. 46 डिग्री सेल्सियस के तापमान में काम करते हुए, जब पसीने में प्रतिदिन 15 लीटर पानी बह जाता था, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों ने झुलसा देने वाली गर्मियों का सामना करते हुए पहाड़ को नक्सलियों के चंगुल से मुक्त कराया और उनके गढ़ को ध्वस्त कर दिया.

अमित शाह ने आगे कहा कि 10-11 साल पहले देश में जख्मों को कुरेदने वाले तीन बड़े ‘हॉटस्पॉट' थे-जम्मू कश्मीर में आतंकवाद, पूर्वोत्तर में नक्सलवाद और उग्रवाद-जो अब शांति और प्रगति के केंद्र बन गए हैं.ये तीनों क्षेत्र, जो कभी बमबारी, गोलीबारी, नाकाबंदी और विनाश के लिए जाने जाते थे,आज देश के विकास का हिस्सा हैं. विकास का इंजन बनकर, वे पूरे देश के विकास को गति देने में योगदान दे रहे हैं.गृहमंत्री ने कहा कि सीआरपीएफ के योगदान के बिना ऐसी शांति संभव नहीं होती.

उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर में सीआरपीएफ के 700 जवान मारे गए, 780 नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में और 540 जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए. इन बलिदानों के बिना, आज इन तीनों संवेदनशील क्षेत्रों को विकास के पथ पर ले जाना असंभव होता. अगर मैं असम की बात करूं, तो 79 जवानों ने असम में शांति स्थापित करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया. सीआरपीएफ के 86 साल के इतिहास में पहली बार इसकी स्थापना दिवस परेड पूर्वोत्तर में हमारे असम में आयोजित की जा रही है. उन्होंने कहा कि यह हम सभी के लिए, पूरे पूर्वोत्तर के लिए गर्व की बात है. 

अमित शाह ने आगे कहा कि 86 वर्षों में सीआरपीएफ ने न केवल उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, बल्कि देश की सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ बनकर ठोस परिणाम भी दिए हैं. इस दौरान 2,270 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया. मैं उन सभी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में एक भी गोली चलाने की जरूरत नहीं पड़ी, और इसमें सीआरपीएफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

गृहमंत्री ने इस अवसर पर सीआरपीएफ के 15 जवानों को वीरता पदक प्रदान किए, जबकि छह जवानों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली बटालियन को ट्राफी प्रदान की गईं.इससे पहले, सीआरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) जी पी सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट' ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी.देश भर की विभिन्न इकाइयों से चुनी गई सीआरपीएफ की आठ टुकड़ियों ने शनिवार को यहां सरुसजाई स्टेडियम में औपचारिक परेड का आयोजन किया.

परेड का नेतृत्व 225वीं बटालियन के कमांडेंट दीपक ढोंडियाल ने किया. परेड में भाग लेने वाले दस्ते में उत्तरी सेक्टर की महिला कर्मी, साथ ही उत्तर पश्चिमी सेक्टर, झारखंड, ओडिशा, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), कोबरा यूनिट और पश्चिमी और उत्तर पूर्वी सेक्टरों की टुकड़ियां शामिल थीं.सीआरपीएफ की पहली बटालियन का गठन 1939 में ब्रिटिश शासन के तहत क्राउन रिप्रेजेंटेटिव्स पुलिस (सीआरपी) के रूप में किया गया था. स्वतंत्रता के बाद, 1949 में, प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा इसका नाम बदलकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल कर दिया गया. 

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