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अमरनाथ यात्रा 2026: सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्यों? जान लीजिए इस बार क्या खास होंगे इंतजाम

अमरनाथ यात्रा के दौरान इस बार ड्रोन के जरिए घुसपैठ, भीड़भाड़ वाली जगहों पर हमला, बंधक बनाने की कोशिश और बड़े पैमाने पर लोगों को नुकसान पहुंचाने जैसी स्थितियों से निपटने की तैयारी की जा रही है.

अमरनाथ यात्रा 2026: सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्यों? जान लीजिए इस बार क्या खास होंगे इंतजाम
अमरनाथ यात्रा के दौरान इस बार और भी ज्यादा पुख्ता होंगे इंतजाम
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नई दिल्ली:

इस साल की अमरनाथ यात्रा सुरक्षा एजेंसियों के लिए अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जा रही है. जम्मू कश्मीर में बाबा बर्फानी की यह यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी. अधिकारियों का कहना है कि इस बार ऐसे खतरों से निपटने की तैयारी की जा रही है, जिनका सामना यात्रा के दौरान पहले कभी नहीं करना पड़ा. सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद भारत के ऑपरेशन सिंदूर से नाराज पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन यात्रा को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं. इसी वजह से सुरक्षा व्यवस्था को पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत बनाया जा रहा है.

हर तरह के खतरे पर नजर

अधिकारियों के मुताबिक इस बार सुरक्षा योजना में कई नए पहलुओं को शामिल किया गया है. ड्रोन के जरिए घुसपैठ, भीड़भाड़ वाली जगहों पर हमला, बंधक बनाने की कोशिश और बड़े पैमाने पर लोगों को नुकसान पहुंचाने जैसी स्थितियों से निपटने की तैयारी की जा रही है. इसके अलावा नए तरह के विस्फोटकों और आधुनिक आतंकी तरीकों का मुकाबला करने के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं. एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक इसका मकसद यह है कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत और प्रभावी तरीके से  प्रतिक्रिया देना है. साथ ही सभी सुरक्षा और प्रशासनिक एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है.

कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था

हाल ही में नई दिल्ली में हुई समीक्षा बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह  ने यात्रा के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार करने का निर्देश दिया. मीटिंग में निगरानी और सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक के व्यापक इस्तेमाल पर भी जोर दिया. पिछले सप्ताह कश्मीर का दौरा करने वाले सीआरपीएफ महानिदेशक जी पी सिंह ने भी सुरक्षा एजेंसियों के बीच करीबी समन्वय और पहले से तैयारी करने की जरूरत बताई.

प्राकृतिक आपदाएं भी बड़ी चिंता

सुरक्षा खतरों के अलावा प्रशासन प्राकृतिक आपदाओं को लेकर भी सतर्क है. अमरनाथ यात्रा का रास्ता ऊंचे पहाड़ों और कठिन इलाकों से होकर गुजरता है. ऐसे में अचानक बाढ़, बादल फटना और भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है. यही वजह है कि आपदा प्रबंधन को भी सुरक्षा योजना का अहम हिस्सा बनाया गया है.

2022 की त्रासदी से सबक

जुलाई 2022 में अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने की घटना हुई थी. इस हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई थी. कई अन्य लोग घायल हुए थे. उस समय सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सीआरपीएफ और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया था. अधिकारियों का कहना है कि उस घटना से मिले अनुभवों को इस बार की तैयारियों में शामिल किया गया है.

रास्तों पर रहेंगी विशेष टीमें

यात्रा के दौरान पहलगाम और बालटाल, दोनों मार्गों पर विशेष आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमें तैनात रहेंगी. इसके अलावा पर्वतीय बचाव दल, डॉक्टरों की टीमें, एंबुलेंस सेवाएं और आपदा प्रबंधन एजेंसियां भी हर समय तैयार रहेंगी. जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सकेगा.

8 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद

दक्षिण कश्मीर हिमालय में समुद्र तल से करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा की वार्षिक यात्रा  57 दिन चलेगी. पिछले साल चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए थे. इस बार यात्रियों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है. अधिकारियों का अनुमान है कि करीब आठ लाख श्रद्धालु यात्रा में शामिल हो सकते हैं. इसी वजह से सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को पहले के मुकाबले कहीं अधिक व्यापक और मजबूत बनाया गया है.

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