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गर्मी की मार से तेजी से पिघल रहा अमरनाथ शिवलिंग, श्रद्धालुओं और प्रशासन में बढ़ी चिंता

अमरनाथ शिवलिंग गर्मी की वजह से तेजी से पिघल रहा है, इसे लेकर चिंता जताई जा रही है. पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ये जलवायु परिवर्तन का असर अब साफ दिखाई दे रहा है.

गर्मी की मार से तेजी से पिघल रहा अमरनाथ शिवलिंग, श्रद्धालुओं और प्रशासन में बढ़ी चिंता

अमरनाथ गुफा में बनने वाला प्राकृतिक हिमलिंग इस साल तेजी से पिघल रहा है. इसकी वजह सामान्य से अधिक गर्म मौसम को माना जा रहा है. यात्रा शुरू होने से पहले ही हिमलिंग का आकार छोटा होने लगा है. इससे श्रद्धालुओं, धार्मिक संगठनों और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इससे अमरनाथ यात्रा की व्यवस्था या श्रद्धालुओं के दर्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

गर्म मौसम का दिख रहा असर

अमरनाथ गुफा समुद्र तल से करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यहां हर साल गुफा की छत से टपकने वाला पानी जमकर प्राकृतिक हिमलिंग बनाता है. हिमलिंग का आकार पूरी तरह मौसम पर निर्भर करता है. तापमान, नमी और बर्फबारी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं. इस साल कश्मीर घाटी और ऊंचाई वाले इलाकों में जून के दौरान कई दिनों तक तापमान सामान्य से अधिक रहा। इसका असर ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों पर भी पड़ा. बर्फ तेजी से पिघली और हिमलिंग भी जल्दी छोटा होने लगा.

कम बर्फबारी भी बनी वजह

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार सर्दियों में कई इलाकों में सामान्य से कम बर्फबारी हुई. इससे गुफा के आसपास लंबे समय तक ठंडा वातावरण नहीं बन सका. इसके अलावा मई और जून में तेज धूप और गर्म हवाओं ने भी हिमलिंग के तेजी से पिघलने की प्रक्रिया को बढ़ा दिया.

जलवायु परिवर्तन का असर

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन का असर अब साफ दिखाई दे रहा है. ग्लेशियर लगातार सिकुड़ रहे हैं. बर्फबारी का पैटर्न बदल रहा है. तापमान भी पहले की तुलना में बढ़ रहा है. उनका कहना है कि इन बदलावों का असर अमरनाथ हिमलिंग के बनने और उसके आकार पर भी पड़ रहा है. पिछले कुछ वर्षों में भी हिमलिंग समय से पहले छोटा होने या पिघलने की घटनाएं सामने आई हैं.

यात्रा की तैयारियां जारी

इस बीच प्रशासन अमरनाथ यात्रा की तैयारियों में जुटा है. पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों पर श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं तैयार की जा रही हैं. सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि हिमलिंग का आकार आस्था का विषय है, लेकिन यात्रा की सुरक्षा, प्रबंधन और दर्शन की व्यवस्था पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.

अफवाहों से बचने की अपील

धार्मिक संगठनों ने श्रद्धालुओं से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है. उनका कहना है कि हिमलिंग का आकार हर साल मौसम के अनुसार बदलता रहता है. इसे असामान्य घटना नहीं माना जाना चाहिए.

मौसम पर टिकी निगाहें

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी तापमान सामान्य से कुछ अधिक रहने की संभावना जताई है. ऐसे में हिमलिंग का आकार और छोटा हो सकता है.फिलहाल प्रशासन का कहना है कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुचारु दर्शन कराए जाएंगे. सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी.अब लाखों श्रद्धालुओं की नजरें मौसम और अमरनाथ गुफा में बनने वाले प्राकृतिक हिमलिंग की स्थिति पर टिकी हैं.

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