- महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार की बारामती एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग के दौरान विमान दुर्घटना में मृत्यु
- अजित पवार ने अपने राजनीतिक करियर में 5 बार महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री पद को संभाला था
- 2019 में अजित पवार ने पहली बार अपने चाचा शरद पवार के खिलाफ बगावत कर बीजेपी के साथ गठबंधन किया था
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की एक प्लेन क्रैश में दुखद मौत हो गई है. बारामती एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग के प्रयास के दौरान NCP प्रमुख अजित पवार का प्लेन क्रैश हो गया. यह घटना प्लेन के मुंबई से उड़ान भरने के एक घंटे बाद सुबह करीब 9 बजे हुई. उनके साथ इस हादसे में मरने वाले अन्य लोगों में दो पायलट और दो यात्री शामिल हैं. NCP प्रमुख को स्थानीय निकाय चुनावों से पहले रैलियों को संबोधित करने के लिए बारामती की यात्रा करनी थी. अजित पवार की मौत ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक शून्य ला दिया है. अंतिम संस्कार आज बारामती में किया जाएगा.
अजित पवार, वह नेता जो कभी सत्ता से बाहर नहीं हुआ
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा गांव में हुआ था. ग्रामीण भारत की सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के बीच बड़े होते हुए, उन्हें किसानों और कृषि समुदाय को प्रभावित करने वाले मुद्दों की प्रत्यक्ष समझ मिली. इन शुरुआती अनुभवों ने क्षेत्रीय विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को आकार दिया और राजनीति में उनके भविष्य की नींव रखी.
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अजित कुमार की राजनीतिक यात्रा और बड़ी भूमिकाएं
अजित पवार का राजनीति में प्रवेश कैसे और क्यों हुआ, इससे बड़ा सवाल यह था कि वो कब हुआ. उनके चाचा शरद पवार 1982 तक महाराष्ट्र की राजनीति में पहले से ही एक स्थापित कांग्रेसी नेता थे. तब 23 साल के शरद पवार एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के लिए चुने गए थे. इस भूमिका ने ग्रामीण आर्थिक प्रणालियों की उनकी समझ के लिए आधार तैयार किया और उन्हें क्षेत्रीय विकास में एक प्रमुख व्यक्ति के रूप में स्थापित किया.
अपने पूरे राजनीतिक करियर के दौरान, अजीत पवार ने प्रमुख मंत्री पद संभाले हैं:
- कृषि और बिजली राज्य मंत्री- जून 1991 से नवंबर 1992
- जल आपूर्ति, बिजली और योजना राज्य मंत्री- नवंबर 1992 से फरवरी 1993
- सिंचाई मंत्री, बागवानी- अक्टूबर 1999 से जुलाई 2004
- ग्रामीण विकास, जल आपूर्ति और स्वच्छता, सिंचाई मंत्री- जुलाई 2004 से नवंबर 2004
- जल संसाधन मंत्री (कृष्णा घाटी सिंचाई को छोड़कर), जल संसाधन और स्वच्छता- नवंबर 2004 से नवंबर 2009
- जल संसाधन मंत्री (कृष्णा घाटी और कोंकण सिंचाई को छोड़कर), ऊर्जा- नवंबर 2009 से नवंबर 2010
- उप मुख्यमंत्री (वित्त, योजना और ऊर्जा)- नवंबर 2010 से सितंबर 2012
- उप मुख्यमंत्री (वित्त, योजना और ऊर्जा)- दिसंबर 2012 से सितंबर 2014
और फिर आया साल 2019
वर्ष 2019 हर मायने में अजित पवार के राजनीतिक करियर के लिए नाटकीय था. अजित पवार ने अपने चाचा और पार्टी संरक्षक शरद पवार के खिलाफ अपनी पहली खुली बगावत दिखाई. उन्होंने देवेन्द्र फड़नवीस को सीएम बनाने के बीजेपी के साथ अप्रत्याशित गठबंधन किया और खुद उपमुख्यमंत्री बन गए. लेकिन उन्होंने तीन दिन बाद इस्तीफा दे दिया और बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया. इससे फड़णवीस को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा. इस फैसले से अटकलों का दौर शुरू हो गया और एनसीपी के भीतर वफादारी और महत्वाकांक्षा पर बहस तेज हो गई.
दिसंबर 2019 में, अजित पवार अपने चाचा के साथ वापस आ गए और उद्धव ठाकरे के महा विकास अघाड़ी गठबंधन के नेतृत्व में उपमुख्यमंत्री के रूप में सरकार में फिर से शामिल हो गए. इस कदम को अपना प्रभाव जमाने और एनसीपी के भीतर अपनी स्थिति को फिर से परिभाषित करने की उनकी रणनीति के हिस्से के रूप में देखा गया.
लेकिन जुलाई 2023 में, महा विकास अघाड़ी सरकार के पतन के बाद, अजीत पवार ने एक बार फिर अपने चाचा के खिलाफ विद्रोह किया. इससे उनकी पार्टी में विभाजन हो गया और वे भाजपा-एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना सरकार में शामिल हो गए.
2024 लोकसभा और विधानसभा चुनाव
2024 के लोकसभा चुनाव में अपने चाचा की छाया से बाहर निकलने का अजीत पवार का पहला प्रयास किसी आपदा से कम नहीं था. पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा करने के बावजूद वह सिर्फ एक सीट जीतने में सफल रहे. सवाल उठ रहा था कि क्या 65 साल के हो चुके अजित पवार अपने दम पर महाराष्ट्र की गलाकाट राजनीति से बचने में सक्षम थे. हालांकि राजनीतिक पंडितों ने उन्हें खारिज नहीं किया.
जब बीजेपी, शिवसेना और NCP के महायुति गठबंधन ने 2024 का विधानसभा चुनाव लड़ा, तो अजीत पवार को कम आंका जा रहा था. बहुतों ने उन्हें पहले ही खारिज कर दिया था. लेकिन जब नतीजे आए तो अजित पवार ने अपनी ताकत दिखा दे. महायुति गठबंधन को सफलता मिली और कई मायनों में यह जीत एकनाथ शिंदे या देवेंद्र फड़नवीस जितनी ही अजित पवार की भी थी. 41 सीटों के साथ अजित पवार ने साबित कर दिया कि वह अपने दम पर जनता को जीतने में सक्षम हैं.
गौरतलब है कि अजित पवार की शादी महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री पदमसिंह बाजीराव पाटिल की बेटी सुनेत्रा पवार से हुई है. दोनों के दो बेटे हैं, जय पवार और पार्थ पवार. जय ने खुद को बिजनेस क्षेत्र में स्थापित किया, जबकि पार्थ ने राजनीतिक करियर बनाया. 2019 में, उन्होंने महाराष्ट्र के मावल निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गए.
अजित पवार का निधन LIVE UPDATES
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