भारत ने गुरुवार को अपनी रक्षा क्षमताओं का एक बार फिर सफल प्रदर्शन करते हुए ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड की निगरानी में किया गया. रक्षा सूत्रों के अनुसार मिसाइल ने सभी परिचालन और तकनीकी मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया.
अत्याधुनिक तकनीक से लैस है अग्नि-4
अग्नि-4 को आधुनिक एवियोनिक्स, पांचवीं पीढ़ी के ऑनबोर्ड कंप्यूटर और डिस्ट्रिब्यूटेड आर्किटेक्चर जैसी उन्नत तकनीकों से तैयार किया गया है. मिसाइल में उड़ान के दौरान आने वाली किसी भी बाधा को स्वतः पहचानकर मार्ग सुधारने की क्षमता मौजूद है. यही वजह है कि इसे भारत की सबसे भरोसेमंद रणनीतिक मिसाइलों में गिना जाता है.
लक्ष्य पर बेहद सटीक वार करने में सक्षम
इस मिसाइल में रिंग लेजर गायरो आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (RINS) और अत्यधिक विश्वसनीय माइक्रो नेविगेशन सिस्टम (MINGS) का इस्तेमाल किया गया है. इन प्रणालियों की मदद से अग्नि-4 बेहद कम त्रुटि के साथ अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सटीकता भारत की सामरिक शक्ति को और मजबूत बनाती है.
4000 डिग्री तापमान भी नहीं बना चुनौती
इससे पहले मिसाइल का री-एंट्री हीट शील्ड इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है. परीक्षण के दौरान यह लगभग 4000 डिग्री सेल्सियस तापमान को झेलने में सफल रहा. इसके बावजूद मिसाइल के भीतर मौजूद संवेदनशील उपकरण सामान्य रूप से काम करते रहे और आंतरिक तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना रहा.
पहले भी सफल रही है अग्नि श्रृंखला
भारत के रक्षा बेड़े में पहले से अग्नि-1, अग्नि-2, अग्नि-3 और पृथ्वी मिसाइल शामिल हैं. हाल के वर्षों में अग्नि श्रृंखला की कई मिसाइलों के सफल परीक्षण किए जा चुके हैं. अग्नि-4 का ताजा परीक्षण इसी सफलता की कड़ी है. इससे 3000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक प्रभावी मारक क्षमता और रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूती मिली है.
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