अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के बाद एक और AAP नेता ने भी जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिखी है. पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक ने चिट्ठी में लिखा कि इस केस में मै पेश होने में असमर्थ हूं. मेरी तरफ से कोई वकील भी पेश नहीं होगा. मैं अरविंद केजरीवाल के साथ खड़ा हूं. गौरतलब है कि इससे पहले अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया भी इस तरह का लेटर लिख चुके हैं.
केजरीवाल ने 27 अप्रैल को जस्टिस स्वर्णकांता को एक चिट्ठी लिखकर कहा था कि उनकी न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई, केजरीवाल ने एक्स पर एक वीडियो पोस्ट कर लिखा"जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा जी से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट चुकी है. अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए, गांधी जी के सिद्धांतों को मानते हुए और सत्याग्रह की भावना के साथ, मैंने फैसला किया है कि मैं इस केस में उनके सामने पेश नहीं होऊंगा और कोई दलील भी नहीं रखूंगा."
वहीं एक दिन बाद मनीष सिसोदिया ने भी चिट्ठी लिखकर जस्टिस से कहा था कि 'मैं आपकी अदालत में पेश नहीं होऊंगा'
जस्टिस स्वर्णकान्ता शर्मा जी से न्याय मिलने की मेरी उम्मीद टूट चुकी है।
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) April 27, 2026
अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनते हुए, गांधी जी के सिद्धांतो को मानते हुए और सत्याग्रह की भावना के साथ, मैंने फ़ैसला किया है कि मैं इस केस में उनके सामने पेश नहीं हूंगा और कोई दलील भी नहीं रखूँगा। pic.twitter.com/vhTSEZabqa
जस्टिस स्वर्णकांता को लेकर आप नेताओं की क्या है आपत्ति?
पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल आबकारी नीति 2021-22 केस में इस साल राउज़ एवेन्यू कोर्ट में सभी आरोपों से बरी कर दिए गए थे. लेकिन फिर सीबीआई ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. तब यह मामला जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में गया था.
अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से खुद को केस से हटाने की अपील की थी, लेकिन इस याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था.केजरीवाल ने कहा था कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा इस केस में निष्पक्ष सुनवाई करेंगी इसे लेकर उन्हें आशंका है.
इसके अलावा अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में दिए हलफनामे में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के दोनों बच्चों का जिक्र करते हुए कहा कि जस्टिस स्वर्ण कांता के दोनों बच्चे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अधीन काम करते हैं. यानी भारत सरकार के वकील हैं. उनके दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल काउंसिल के रूप में काम करते हैं और उन्हें मामलों का आवंटन तुषार मेहता के माध्यम से होता है.
केजरीवाल की दलील है कि सीबीआई की ओर से तुषार मेहता वकील हैं, इसलिए जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा उनके खिलाफ आदेश कैसे दे पाएंगी. केजरीवाल ने तर्क दिया कि ऐसे में 'हितों के टकराव' की आशंका पैदा होती है.
यह भी पढ़ें: आज पेशी है, लेकिन केजरीवाल-सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्णकांता की अदालत में जाने से किया इनकार, अब सुनवाई का क्या होगा?
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं