अफगानिस्तान में तालिबान शासन का असली चेहरा धीरे-धीरे सामने आ रहा है. वहां, प्राइवेट यूनिवर्सिटी सोमवार से शुरु हो गई हैं, लेकिन इसके लिए कड़े नियम जारी किए गए हैं. कट्टरपंथी समूह ने लड़कियों के कपड़ों, उन्हें कक्षा में कहां और कैसे बैठना है, कौन पढ़ाएगा, यहां तक कि कक्षा कितनी देर तक चलेगी इसको लेकर निर्देश जारी किए हैं. हालांकि, तालिबान ने वादा किया था कि लोगों को एक उदार सरकार दी जाएगी. तालिबान ने मानव अधिकारों का भी वादा किया था, विशेषकर महिलाओं और बच्चों से संबंधित. इनमें महिला छात्राओं को कक्षाओं में हिस्सा लेना की अनुमति भी शामिल थी.
आमाज न्यूज एजेंसी की ओर से जारी तस्वीरों (जिन्हें NDTV स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं कर पाया है) में देखा जा सकता है कि किस तरह से लड़के और लड़कियों में क्लास को बांट दिया गया है.
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در تصویر: دروس دانشگاه با پرده جدایی آغاز شد #آماج_نیوز pic.twitter.com/2we0oqRnbS
— Aamaj News (@AamajN) September 6, 2021
कक्षाएं शुरू होने से पहले शनिवार को तालिबान के शिक्षा प्राधिकरण ने एक दस्तावेज जारी किया था, जिसमें महिलाओं को अबाया और नकाब (जो अधिकांश चेहरे को ढक देता है) पहनने का निर्देश दिया गया था. इसके साथ ही कहा गया था कि लड़के और लड़कियां एक साथ नहीं बैठेंगे, एक तरफ लड़के और दूसरे तरफ लड़कियां होंगी और दोनों के बीच में पर्दा लगा होगा.
साथ ही यह भी कहा गया कि छात्राओं को केवल महिला टीचर ही पढ़ा सकती हैं. अगर यह संभव नहीं हो पाता है कि तो 'अच्छे चरित्र वाले बुजुर्ग' भी उन्हें पढ़ा सकते हैं. साथ ही कहा है, 'विश्वविद्यालयों को उनकी सुविधाओं के आधार पर छात्राओं के लिए महिला शिक्षकों की भर्ती करने की आवश्यकता है.'

तालिबान के अन्य फरमानों में यह भी है कि लड़के और लड़कियों को अलग-अलग प्रवेश द्वार और निकास का इस्तेमाल करना चाहिए और महिला छात्रों को पुरुषों और महिलाओं में मिलने से रोकने के लिए पांच मिनट पहले छोड़ देना चाहिए. लड़कियों को प्रतीक्षालय में तब तक रहना चाहिए जब तक कि उनके लड़के इमारत से बाहर नहीं निकल जाते. प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में भी लड़कियों और लड़कों अलग किया जाएगा.
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