पूर्व भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता और अधिवक्ता नूपुर शर्मा ने आज दिल्ली के सबसे बड़े और देश के दूसरे सबसे बड़े डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड केस में आरोपियों की जमानत रद्द कराई. उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में पीड़ित के पक्ष में दलीलें दी. यह मामला सितंबर 2025 में पहली बार सुर्खियों में आया था, जब दिल्ली के एक बुजुर्ग के साथ जालसाजों ने डिजिटल अरेस्ट करके 23 करोड़ रुपये ठग लिए थे.
बुजुर्ग के साथ हुई थी 23 करोड़ की ठगी
जानकारी के अनुसार, दिल्ली के गुलमोहर पार्क में रहने वाले 78 साल के नरेश मल्होत्रा को आरोपियों ने डिजिटल अरेस्ट में रखा. आरोपियों ने उन्हें डरा धमका कर और मानसिक पीड़ा देते हुए करीब 23 करोड़ ऐंठ लिए. जालसाजों ने पीड़ित के घर के लैंडलाइन नंबर फोन किया. आरोपियों ने कहा कि उनके फोन नंबर और आधार पुलवामा आतंकी घटना की जांच के दौरान सामने आए हैं. इस तरह जालसाजों ने बुजुर्ग को अपने जाल में फंसा लिया.
कैसे दिया ठगी को अंजाम?
आरोपियों ने चेतावनी दी कि अगर वह अपने और अपनी दो बेटियों-दामादों और नाती-नातिन को बचाना चाहते हैं तो उन्हें बताए गए बैंक खातों में पैसे जमा करने होंगे और किसी को भी इसकी खबर नहीं लगनी चाहिए. अपने को सीनियर पुलिस कर्मी और अफसर पेश करते हुए तमाम फर्जी दस्तावेज जैसे सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और CBI के ऑर्डर बता कर और वीडियो कॉल पर पुलिस की वर्दी पहनकर पीड़ित का भरोसा जीता.
इसके बाद आरोपियों ने बारी-बारी करके मल्होत्रा से आजादी के लिए लाखों-करोड़ों रुपये ट्रांसफर कराए. आरोपियों ने एक महीने के भीतर इस अपराध को अंजाम दिया और मल्होत्रा ने मित्रों के कहने पर दिल्ली पुलिस में सितंबर 2025 में FIR दर्ज कराई. साल 2026 के शुरुआत में अधिवक्ता नूपुर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में मल्होत्रा के केस की सुनवाई कराके CBI से जांच कराई. जांच में पकड़े गए चार आरोपियों ने दिल्ली हाई कोर्ट में बेल की दलील दाखिल की. इसका विरोध करते हुए और इस बड़े षड्यंत्र का खुलासा करते हुए अधिवक्ता नूपुर शर्मा ने चारों अपराधियों की बेल खारिज कराई.
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