- कड़कड़डूमा कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की दूसरी बार लगाई गई जमानत याचिका को खारिज कर दिया है
- सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में जमानत याचिका खारिज करते हुए ट्रायल में प्रगति न होने पर पुनः अर्जी की अनुमति दी थी
- दोनों आरोपियों पर गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम और अन्य दंडात्मक प्रावधानों के तहत मामला दर्ज है
कड़कड़कडूमा कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दिया है. इन दोनों आरोपियों ने दूसरी बार जमानत अर्जी लगाई थी. इससे पहले उनकी जमानत याचिका को 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर ट्रायल में प्रगति नहीं होती है तो एक साल बाद वो फिर से जमानत अर्जी दाखिल तक सकते हैं.
ट्रायल कोर्ट ने पिछले महीने नोटिस जारी किया था
कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज (ASJ) समीर बाजपेयी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत की अर्जियां खारिज कर दीं. उमर खालिद और शरजील इमाम ने गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और अन्य दंडात्मक प्रावधानों के तहत दर्ज मामले में रेगुलर जमानत मांगी थी. पिछले महीने, ट्रायल कोर्ट ने उनकी जमानत अर्जियों पर नोटिस जारी किया था और दिल्ली पुलिस को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था.
शरजील इमाम और उमर खालिद के तर्क
अपनी अर्जी में, शरजील इमाम ने तर्क दिया कि जनवरी में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद छह महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद, मुकदमे में कोई सार्थक प्रगति नहीं हुई है. उन्होंने कहा था कि आरोप तय करने के सवाल पर बहस अभी पूरी नहीं हुई है और वह इस मामले में लगभग छह साल से जेल में हैं. उमर खालिद ने भी ट्रायल कोर्ट के समक्ष रेगुलर जमानत मांगी थी. कड़कड़डूमा कोर्ट ने दोनों अर्जियों पर एक साथ सुनवाई की.
इस साल की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ने खालिद और इमाम की जमानत अर्जियां खारिज कर दी थीं, यह मानते हुए कि अभियोजन पक्ष की सामग्री से प्रथम दृष्टया ऐसे आधार सामने आए हैं जो UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत देने पर कानूनी रोक लगाते हैं. साथ ही, शीर्ष अदालत ने मामले में पांच अन्य आरोपियों - गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मो. सलीम खान और शादाब अहमद - को जमानत दे दी. यह मामला फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश से संबंधित है और इसकी जांच UAPA और अन्य दंडात्मक कानूनों के प्रावधानों के तहत की जा रही है.
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