- तेजस एमके-1ए के लिए अमेरिकी कंपनी जीई से इंजन की आपूर्ति में काफी देरी हुई है, जिससे इसमें काफी देरी हुई है.
- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने जीई एयरोस्पेस पर जुर्माना लगाया और सप्लाई में सुधार की उम्मीद जताई है.
- एचएएल दिसंबर तक 20 से अधिक तेजस लड़ाकू विमान तैयार करेगा और छह विमानों की जल्द आपूर्ति संभव है.
भारत का तेजस प्रोग्राम धीमी गति से आगे बढ़ रहा है, जिसकी एक मुख्य वजह इंजन की डिलीवरी में देरी है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने तेजस एमके-1ए के लिए एफ404-आईएन20 इंजन की आपूर्ति में देरी को लेकर नाराजगी जताई है. HAL ने साल 2021 में अमेरिकी कंपनी जीई को 99 इंजन का ऑर्डर दिया था. हालांकि अभी तक उसने सिर्फ 6 इंजन दिए हैं. इसे लेकर एचएएल ने जीई एयरोस्पेस पर एक प्रावधान के तहत मुआवजा मांगा है. HAL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डीके सुनील ने यह जानकारी दी है. साथ ही उन्होंने आने वाले दिनों में इंजन की डिलीवरी में तेजी आने की उम्मीद जताई है.
इंजन सप्लाई पर डॉ. सुनील ने स्वीकार किया कि सप्लाई चेन में चुनौतियां हैं, जो कोविड और उसके बाद की स्थिति के कारण आई हैं. उन्होंने कहा कि जब एयरक्राफ्ट इस इंजन के आसपास डिजाइन किया गया है, तो विकल्प सीमित हैं. उन्होंने कहा कि हम जीई के साथ लगातार संपर्क में हैं. कंपनी में नया मैनेजमेंट आया है और टेस्टिंग में ऑटोमेशन बढ़ाया गया है. हमें विश्वास है कि स्थिति सही रास्ते पर है. इस साल जुलाई से दिसंबर तक 20 इंजन आने की उम्मीद है.
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जल्द हो सकती है छह विमानों की आपूर्ति: सुनील
भारतीय वायु सेना को तेजस मार्क 1ए संस्करण की आपूर्ति में देरी के बारे में सुनील ने कहा कि एचएएल दिसंबर तक 20 से अधिक लड़ाकू विमान तैयार कर लेगी और उनमें से छह की आपूर्ति जल्द ही की जा सकती है क्योंकि रडार, एवियोनिक्स और मिसाइल-फायरिंग सिस्टम के अंतिम परीक्षण वर्तमान में जारी हैं.
लड़ाकू विमानों की आपूर्ति में देरी मुख्य रूप से जीई एयरोस्पेस द्वारा एफ-404 एयरो इंजनों की आपूर्ति के लिए कई समय सीमाओं को पूरा न कर पाने के कारण हो रही है. वायु सेना द्वारा लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन से संबंधित कुछ मुद्दों को उठाए जाने के बारे में पूछे जाने पर एचएएल के सीएमडी ने कहा कि मई में एक परियोजना समीक्षा समिति द्वारा लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के लिए मंजूरी दिए जाने की संभावना है.
रक्षा क्षेत्र की प्रमुख अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस ने एचएएल को लड़ाकू विमानों के पांच इंजन सौंपे हैं और छठा इंजन अगले कुछ दिनों में आपूर्ति किए जाने की उम्मीद है.
वायुसेना प्रमुख ने भी देरी पर जताई थी नाराजगी
दरअसल, फाइटर जेट की डिलीवरी में देरी को लेकर भारतीय वायुसेना प्रमुख ने भी नाराजगी जताई थी. तेजस के कई वेरिएंट हैं- तेजस मार्क-1, तेजस मार्क 1ए और तेजस ट्रेनर एयरक्राफ्ट और तेजस मार्क-2, जो सबसे एडवांस वर्जन होगा, उस पर काम जारी है.
मौजूदा सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से भारतीय वायुसेना के पास 42 फाइटर स्क्वॉड्रन की जरूरत है, लेकिन फिलहाल वह सिर्फ 29 स्क्वॉड्रन के साथ काम चला रही है. इस कमी को तेजस के जरिए पूरा किया जाना है. वायुसेना पहले ही 40 में से 38 तेजस विमान शामिल कर चुकी है. एचएएल से 83 एलसीए तेजस मार्क-1ए की डील हुई, लेकिन अब तक उनकी डिलीवरी शुरू नहीं हो सकी है. इन 83 तेजस मार्क 1ए से कुल 4 स्क्वॉड्रन बनेंगे. इसके अलावा 5 अतिरिक्त स्क्वॉड्रन के लिए 97 तेजस मार्क 1ए की खरीद की डील भी हो चुकी है. तेजस के कुल 11 स्क्वॉड्रन में से 2 पहले ही शामिल हो चुके हैं, जबकि 9 अभी शामिल होने बाकी हैं.
तेजस का बेड़ा 8 अप्रैल से भरेगा उड़ान
उधर, भारतीय वायु सेना के तेजस हल्के लड़ाकू विमान अगले सप्ताह से उड़ान भरने के लिए तैयार हैं. दो महीने पहले एयरपोर्ट पर एक विमान से जुड़ी दुर्घटना के बाद पूरे बेड़े को उड़ान से रोक दिया गया था. सुनील ने बताया कि 34 तेजस विमानों का पूरा बेड़ा आठ अप्रैल से उड़ान भरने के लिए तैयार है, क्योंकि विमान के सॉफ्टवेयर में पाई गई खामी को दूर कर लिया गया है. उन्होंने बताया कि सभी तेजस लड़ाकू विमान अगले बुधवार से फिर से उड़ान भरने के लिए तैयार हैं.
फरवरी के पहले सप्ताह में एक तेजस विमान के रनवे से आगे निकल जाने के बाद इसके बेड़े को उड़ान से रोक दिया गया था. यह दुर्घटना एयरबेस पर हुई थी और संभवतः ब्रेक फेल होने के कारण हुई थी. इस घटना के बाद भारतीय वायु सेना ने विमानों की व्यापक जांच के आदेश भी दिए थे.
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