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अब तक 7 भारतीयों की मौत, 4.75 लाख लोग लौटे वापस... मिडिल ईस्ट जंग पर सरकार ने आज क्या कुछ बताया?

28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए भीषण हवाई हमलों से पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जंग की शुरुआत हुई. इस जंग में अभी तक अलग-अलग घटनाओं में 7 भारतीयों की मौत हुई है. शुक्रवार को खाड़ी देशों के अतिरिक्त सचिव ने प्रेस कॉफ्रेंस ने यह जानकारी दी.

अब तक 7 भारतीयों की मौत, 4.75 लाख लोग लौटे वापस... मिडिल ईस्ट जंग पर सरकार ने आज क्या कुछ बताया?
28 फरवरी से पश्चिम एशिया में जंग जैसे हालात जारी है.
  • पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष में अब तक सात भारतीय नागरिक मारे गए हैं, जबकि एक अभी भी लापता है.
  • जंग के बाद से लगभग 4.75 लाख भारतीय सुरक्षित भारत वापस लौट चुके हैं और वापसी जारी है.
  • अबू धाबी हमले में एक भारतीय की मौत हुई, भारतीय मिशन पीड़ित परिवार से संपर्क में है.
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नई दिल्ली:

ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे जंग का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. भारत में गैस-तेल की किल्लत की खबरें सामने आ रही हैं. हालांकि सरकार का दावा है कि तेल-गैस की कोई कमी नहीं है. दूसरी ओर पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत सरकार के अलग-अलग विभागों के वरीय अधिकारी हर रोज प्रेस कॉफ्रेंस कर जानकारी दे रहे हैं. इसी कड़ी में शुक्रवार को राजधानी दिल्ली के राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम पर अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में खाड़ी देशों के अतिरिक्त सचिव असीम महाजन ने बताया कि जंग जैसे हालात के बीच पश्चिम एशिया में अलग-अलग घटनाओं में 7 भारतीयों की मौत हुई है. जंग शुरू होने के बाद अभी तक 4.75 लाख भारतीय सुरक्षित वापस लौट चुके हैं. 

गुरुवार को अबू धाबी में हुए हमले में एक भारतीय की हुई मौत

पश्चिम एशिया खाड़ी के अतिरिक्त सचिव असीम महाजन ने बताया कि हताहतों के बारे में बात करें तो, कल अबू धाबी में हुए एक हमले में एक भारतीय नागरिक की दुखद रूप से जान चली गई. सरकार ने पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है. अबू धाबी में स्थित भारतीय मिशन पीड़ित परिवार के संपर्क में है और पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द वापस लाने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है.

अभी तक 7 भारतीयों की मौत, एक लापता

उन्होंने आगे बताया कि एक अन्य भारतीय नागरिक को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. कुल मिलाकर, अलग-अलग घटनाओं में सात भारतीय नागरिकों की जान चली गई है, जबकि एक व्यक्ति अभी भी लापता है. ओमान, इराक और UAE में स्थित भारतीय मिशन लापता व्यक्ति का पता लगाने और मृतकों के पार्थिव शरीर को वापस लाने में मदद करने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं.

जंग शुरू होने के बाद से अब तक 4.75 लाख भारतीय वापस लौटे

ईरान-इजरायल जंग  शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया से भारतीयों की वापसी पर असीम महाजन ने बताया कि 28 फरवरी से अब तक इस क्षेत्र से लगभग 4.75 लाख यात्री भारत लौट चुके हैं. एयरलाइंस परिचालन की व्यवहार्यता और सुरक्षा संबंधी बातों को ध्यान में रखते हुए सीमित संख्या में गैर-निर्धारित उड़ानों का संचालन जारी रखे हुए हैं.

यूएई और कतर से भारत के लिए उड़ानें संचालित

उन्होंने यह भी कहा कि आज UAE से भारत के विभिन्न गंतव्यों के लिए लगभग 80 उड़ानों के संचालित होने की उम्मीद है. सऊदी अरब और ओमान के हवाई अड्डों से भी उड़ानें संचालित हो रही हैं. कतर का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से फिर से खुल जाने के कारण, आज कतर एयरवेज़ द्वारा भारत के लिए लगभग 10 उड़ानें संचालित किए जाने की उम्मीद है. हालाँकि, UAE और बहरीन का हवाई क्षेत्र अभी भी बंद है.

हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण भारतीयों की सकुशल वापसी के लिए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग किया जा रहा है. इन मार्गों में ईरान से आर्मेनिया होते हुए भारत, इज़राइल से जॉर्डन होते हुए भारत, इराक से जॉर्डन और सऊदी अरब होते हुए भारत, तथा कुवैत और बहरीन से सऊदी अरब होते हुए भारत शामिल हैं.

विदेश मंत्री ने G-7 की बैठक में उठाया मिडिल ईस्ट का मुद्दा

विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 26–27 मार्च को फ्रांस में आयोजित G-7 विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लिया, जहां उन्होंने फ्रांस, कनाडा, दक्षिण कोरिया, जापान, ब्राज़ील, यूके, जर्मनी और यूक्रेन के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं. इन बैठकों में आपसी संबंधों को मजबूत करने और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की गई. 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की भी उठाई बात

रणधीर जायसवाल ने आगे कहा कि विदेश मंत्री ने जी7 सत्रों के दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, शांति स्थापना प्रक्रियाओं को सरल बनाने और मानवीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया. साथ ही उन्होंने ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक दक्षिण की चिंताओं को उठाया और पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितताओं की ओर ध्यान दिलाते हुए अधिक मजबूत व्यापार गलियारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता बताई.

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