वन रैंक वन पेंशन : 1.5 लाख पूर्व सैनिकों को अब भी नहीं मिला एरियर

वन रैंक वन पेंशन : 1.5 लाख पूर्व सैनिकों को अब भी नहीं मिला एरियर

फाइल फोटो

खास बातें

  • अशोक चव्हाण कहते हैं, 'मुझे कोई एरियर की किस्त नहीं मिली आजतक'
  • 19,12,520 को अब तक पेंशन के एरियर की पहली किस्त मिल पाई है
  • 1.5 लाख पूर्व सैनिकों को बेहतर पेंशन के लिए जूझना पड़ा रहा है
नई दिल्‍ली:

पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल की आत्महत्या के बाद ओआरओपी की मौजूदा व्यवस्था पर फिर राष्ट्रीय बहस छिड़ गयी है. इस मसले पर चल रही राजनीति के बीच अब भी डेढ़ लाख पूर्व सैनिक हैं जिन तक नई ओआरओपी का फायदा नहीं पहुंच पाया है.

रिटायर्ड हवलदार अशोक चव्हाण 2004 में सेना से रिटायर हुए. नई ओआरओपी व्यवस्था लागू होने से उम्मीद बंधी थी कि बेहतर पेंशन का फायदा मिलेगा, लेकिन मायूस हैं कि ऐलान के बावजूद बढ़ी पेंशन की पहली किश्त भी नहीं मिल पाई है. कई बार प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को चिट्ठी लिख चुके हैं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

अशोक चव्हाण कहते हैं, 'मुझे कोई एरियर की किस्त नहीं मिली आजतक. मैंने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को चिट्ठी लिखी लेकिन कुछ नहीं हुआ. सरकार गंभीर नहीं है.' बेहतर ओआरओपी की लड़ाई में रिटायर्ड हवलदार अशोक चव्हाण को सैकड़ों पूर्व सैनिकों का साथ मिल रहा है जो बरसों से लड़ रहे हैं. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 15 सितंबर तक 20,63,763 पेंशनधारी हैं. इनमें से 19,12,520 को अब तक पेंशन के एरियर की पहली किस्त मिल पाई है. यानी 1.50 लाख से ज़्यादा को अब तक पहली किस्त नहीं मिल पाई है.

रक्षा मंत्रालय ने पिछले साल 5 सितंबर को नई ओआरओपी व्यवस्था को लागू करने का ऐलान किया था. नई व्यवस्था 1 जुलाई 2014 से लागू होनी थी. लेकिन 14 महीने बाद 1.5 लाख पूर्व सैनिकों को बेहतर पेंशन के लिए जूझना पड़ा रहा है. इस विवाद पर पहली प्रतिक्रिया में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने माना कि देरी हुई है. लेकिन दो महीने में सबकुछ सुलझा लिया जाएगा. बड़गाम में मनोहर पर्रिकर ने कहा, 'कुछ तकनीकी खामियां हैं. एक-दो महीने में सब ठीक हो जाएगा, बाकी मुद्दे भी सुलझा लिये जाएंगे.' अब देखना होगा कि रक्षा मंत्री अपने आश्वासन पर इस बार कितना खरा उतरते हैं.


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