पुलवामा हमले के बाद 43 युवक आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद में शामिल हुए : सूत्र

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में पिछले साल फरवरी में अर्द्धसैनिक बल के एक काफिले पर हुए आत्मघाती हमले में शामिल जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने हमले का वीडियो बनाने की भी योजना बनाई थी और बमबारी करने वाले आदिल डार को कश्मीरी भाषा में उसे शहीद करार दिया था.

पुलवामा हमले के बाद 43 युवक आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद में शामिल हुए : सूत्र

पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड उमर फारुक (बीच में) राशिद ताल्हा और अम्मार अल्वी के साथ अफगानिस्तान में

नई दिल्ली :

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में पिछले साल फरवरी में अर्द्धसैनिक बल के एक काफिले पर हुए आत्मघाती हमले में शामिल जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने हमले का वीडियो बनाने की भी योजना बनाई थी और बमबारी करने वाले आदिल डार को कश्मीरी भाषा में उसे शहीद करार दिया था. ये बात जांचकर्ताओं ने एनडीटीवी को बताया है. मिली जानकारी के मुताबिक 21 साल के आदिल डार फरवरी 2018 में ही पुलवामा में अपने गांव से लापता हो गया था. उसके पिता ने तब उसकी तलाश के लिए पुलिस शिकायत दर्ज की थी. 

"बुरहान वानी की तरह, वह भी युवा था और वह 2016 में बुरहान के एक एक मुठभेड़ में मारे जाने के बाद विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेता था. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा आरोप पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि आतंकवादी और आत्मघाती हमले के मास्टरमाइंड मोहम्मद उमर फारुख पुलवामा हमले के बाद भारतीय सैनिकों के शवों के वीडियो बनाकर जम्मू-कश्मीर में युवाओं को दिखाने का प्लान ताकि उन्हें आतंकी समूह में शामिल होने के लिए राजी किया जा सके.


एक अधिकारी ने बताया, 'भारतीय जेट द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में जैश शिविर पर बमबारी करने के बाद यह योजना अमल में नहीं आई.' एनआईए ने जैश केआत्मघाती हमलों को अंजाम देने की साजिश की जानकारी को दूसरी एजेंसियों के साथ भी साझा की है.  एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि फारुख को अफगानिस्तान में हेलमंद प्रांत में भी प्रशिक्षित किया गया था. 

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वहीं सूत्रों ने कहा कि सुरक्षा आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले 18 महीनों में जैश का प्रभाव दक्षिण कश्मीर के इलाकों में बढ़ा है और यह एक कारण हो सकता है कि कई युवा लापता हो गए हैं.  “आंकड़ों से पता चलता है कि जैश पिछले तीन वर्षों से धीरे-धीरे अपनी कॉडर ताकत को मजबूत कर रहा है. हमारी जानकारी है कि 2018 के बाद से लापता हुए 80 से अधिक युवा जैश में शामिल हो चुके हैं, जिनमें से 43 पुलवामा हमले के बाद शामिल हुए.