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This Article is From Oct 01, 2016

भारतीय श्रमिकों ने सऊदी अरब के दु:स्‍वप्‍न को किया याद, इसे नर्क से भी बदतर माना..

भारतीय श्रमिकों ने सऊदी अरब के दु:स्‍वप्‍न को किया याद,  इसे नर्क से भी बदतर माना..
बड़ी संख्‍या में भारत से श्रमिक काम करने के लिए सऊदी अरब जाते हैं
नई दिल्‍ली.: इन सभी लोगों ने बड़े उम्‍मीदों के साथ सऊदी अरब जाने के लिए भारत छोड़ा था लेकिन तेल की कीमतों में आई गिरावट के कारण अर्थव्‍यवस्‍था पटरी से उतरने के बाद इन हजारों गरीब श्रमिकों को कटु अनुभवों के साथ वापस लौटने को मजबूर लौटना पड़ा है.

भारत, पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश और फिलीपींस के के इन श्रमिकों की वहां बेसहारा छोड़ दिया गया. नौकरी गंवाने के बाद इनके पास घर लौटने के लिए तो दूर, खाना खरीदने तक के लिए पैसे नहीं थे. इस सप्‍ताह बिहार से करीब 40 श्रमिक जब वापस लौटे हैं तो इनकी जुबान पर यही कहानी है कि नियोक्‍ता सउदी ओगर ने उन्‍हें मरने के लिए छोड़ दिया था. एक समय प्रतिष्ठित मानी जाने वाली यह फर्म लेबनान के अरबपति और पूर्व प्रधानमंत्री साद हरि‍री की है.

एक समय करीब 50 हजार श्रमिकों को पे-रोल पर रखने वाली इस कंपनी की आय में लगातार कमी आती गई. सऊदी अरब की तेल से होने वाली आय में कमी के कारण प्रोजेक्‍ट में देरी हुई जिसके कारण कंपनी का कंस्‍ट्रक्‍शन का प्रमुख काम बुरी तरह से प्रभावित हुआ.

इलेक्ट्रिशियन इमाम हुसैन ने इस सप्‍ताह दिल्‍ली पहुंचने के बाद बताया, 'उन्‍होंने अचानक मेस (केंटीन) बंद कर दी. तीन दिन तो हमारे पास पीने के लिए पानी तक नहीं था.वहां बिजली भी नहीं थी.' रियाद में सऊदी किंग सलमान के पेलेस के पुननिर्माण का काम करने वाले इस 27 वर्षीय युवा ने बताया, 'मुझे गिरफ्तारी का भी सामना करना पड़ा क्‍योंकि नियोक्‍ता में मेरे पहचान पत्र का नवीनीकरण नहीं किया था, कुल मिलाकर हालात नर्क से भी बुरे थे.'

हुसैन और उनके सहयोगियों को कई दिन दिल्‍ली में गुजारने पड़े. बिहार अपने घर जाने के इंतजार में उन्‍होंने एक होटल में फर्श पर सोने और खाने को मजबूर होना पड़ा. आखिरकार घर लौटने की खुशी उनकी इस मुश्किलों के आगे कुछ भी नहीं थी. अपने गांव जाने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहे श्रमिक संतोष सिंह ने कहा,  'आखिरकार घर वापस लौटते हुए हम बेहद राहत महसूस कर रहे है. हम अपने परिवार को देखना और नए सिरे से जिंदगी शुरू करना चाहते हैं '

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