क्या मंडियों में खोले जाएंगे अस्पताल, दुकानें, पेट्रोल पंप, शॉपिंग मॉल? MP सरकार की मंशा पर खड़े हो रहे सवाल

अब एक और प्रस्ताव है जिससे जानकार सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं वो है मंडियों में अस्पताल, दुकानें, पेट्रोल पंप, शॉपिंग केन्द्र खोलने के.

क्या मंडियों में खोले जाएंगे अस्पताल, दुकानें, पेट्रोल पंप, शॉपिंग मॉल? MP सरकार की मंशा पर खड़े हो रहे सवाल

प्रतीकात्मक तस्वीर

भोपाल:

एनडीटीवी ने दिसंबर बताया था कि कैसे मध्यप्रदेश की छोटी मंडियों में कारोबार नहीं के बराबर हुआ है, कई बड़ी मंडियों में भी आवक कम हो रही है. नये कृषि कानूनों को लेकर किसानों के मन में एक आशंका ये है कि मंडियां बंद हो जाएंगी, सरकार समझा रही है कि ऐसा कुछ नहीं होगा आशंकाओं की वजह नहीं है. लेकिन अब एक और प्रस्ताव है जिससे जानकार सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं वो है मंडियों में अस्पताल, दुकानें, पेट्रोल पंप, शॉपिंग केन्द्र खोलने के.

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इधर मंडियों की कमाई लगातार कम हो रही है, जनवरी में भी मध्यप्रदेश की मंडियों में पिछले साल की तुलना में 66 फीसद कमाई कम हो गई है. इसी पैसे से मंडी बोर्ड के कर्मचारियों की तनख्वाह-पेंशन सब मिलता है. ऐसे में राज्य मंडी बोर्ड के लगभग 9000 कर्मचारी और पेंशनर्स भी आशंकित हैं. मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल बता रहे हैं कि मंडियों में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मेडिकल क्लीनिक, पेट्रोल पंप और उर्वरक और बीज केंद्र बनेंगे. हम मंडी को आदर्श मंडी बनाएंगे, 1000 मंडियों को ई नैम मंडियां बनाएंगे मंडी भी रहेगी, एमएसपी भी रहेगी. किसान को सुविधा देने के लिये वहीं बैंक होगा, पंप होगा, वहीं खाद बीज के लिये दुकानें होंगी. घर के लिये किराना सामान बिल्कुल सैनिकों के कैंटीन की तर्ज पर बनाएंगे. किसान को स्मार्ट कार्ड देंगे, नकली खाद-बीज से उन्हें मुक्ति मिलेगी. मंडी की आय बढ़ेगी किसानों को सुविधा मिलेगी. इन्हें विकसित करने के लिये सरकार भी प्रयास करेगी निजी सेक्टर, एनजीओ का भी सहयोग रहेगा.

हालांकि मंडी बोर्ड के कर्मचारियों को ये संभव नहीं लगता, संयुक्त संघर्ष मोर्चा मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड के संयोजक बीबी फौजदार कहते हैं मंडियों में सीजन में बहुत भीड़ होती है, मॉल में कौन जाएगा वहां संभावना है ही नहीं. शासन का प्रस्ताव है लेकिन संभव नहीं हो पाएगा. इन प्रस्तावों के इतर अगर मध्य प्रदेश शासन की वेबसाइट ई अनुज्ञा के आंकड़ों की मानें तो अक्टूबर महीने में राज्य की 259 मंडियों में से लगभग 47 मंडियों में कारोबार पूरी तरह से ठप रहा.

अक्टूबर में ही तकरीबन 143 मंडियों के कारोबार में 50 से 60 फीसदी तक गिरावट देखने को मिली.
79 मंडियों में फल-सब्जियों की आवक की वजह से कारोबार हुआ. 
राज्य में 298 उप मंडियों में भी कोई कारोबार नहीं हुआ है.
मंडियों में कारोबार घटने से मंडी बोर्ड का टैक्स लगभग 64 फीसद घट गया है.
दिसंबर में जो आंकड़े आए उससे पता लगा कि मंडी टैक्स वसूलने में 3 महीने में 132 करोड़ का नुकसान हुआ.

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वहीं, जनवरी 2021 में मंडियों से 29.26 करोड़ की कमाई हुई जबकि 2020 जनवरी में 88 करोड़ की कमाई हुई थी यानी लगभग 66 का नुकसान. मंडी के कर्मचारी भी आशंकित हैं, उन्हें लगता है किसानों की आशंका कहीं सही साबित ना हो जाए. संयुक्त संघर्ष मोर्चा मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड के संयोजक बीबी फौजदार कहते हैं मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने अध्यादेश का विरोध किया है. हमें पता है इसकी स्थिति क्या है मंडियां बंद हो जाएंगी, बिहार जैसी स्थिति बनेगी हमलोग लगातार कोशिश कर रहे हैं लेकिन शायद ये रूक ना पाए. पिछले बार 1200 करोड़ रु. हमें मिले थे, इस बार 700-800 करोड़ मिल जाएगा लेकिन अगले साल से वो भी नहीं मिलेगा. आज हालात ये हैं कि 50-60 मंडियों में पिछले 14-15 महीनों में यहां मंडी बोर्ड से उन्हें अनुदान दे रहे हैं तनख्वाह के लिये. इनकी मंशा मंडियां बंद करने की है और मंडियां बंद होंगी.

मध्यप्रदेश कुल 259 मंडियां जबकि 298 उप मंडियां हैं. इन मंडियों में 6500 कर्मचारी कार्यरत हैं, 45,000 रजिस्टर्ड कारोबारी हैं. मंडी बोर्ड इन कारोबारियों से 1.5 फीसदी टैक्स लेकर 0.5 फीसदी राज्य सरकार को देता है. एक फीसदी से कर्चमारियों को वेतन-पेंशन मिलता है.

वैसे सरकार ने बार-बार कहा है मंडियां बंद नहीं होंगी, कुछ दिनों पहले ही एक रैली में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था मंडी बंद नहीं होगी ये झूठी बात कर रहे है, किसी कीमत पर मंडिया बंद नहीं होंगी चालू रहेंगी, चालू रहेंगी. मामा ने 2 रूपैया की जगह अठन्नी टैक्स कर दिया. विपक्ष के लोग खेती किसानी जानते नहीं है, खेती किसानी चालू रहेगी मंडी में मुझे आपत्ति नहीं है, दाल भात में मूसलचंद तुम कौन होते हो.


लेकिन कांग्रेस के प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा कि सरकार गलत बातें कह रही है, 47 मंडियां बंद हो गई है, 62 मंडियों में एक भी व्यापारी नहीं आया है किसानों का माल नहीं बिका है, वहां सरकार मॉल खोलने की बात क्यों कर रही है. क्योंकि मंडी की जमीनों पर उनकी नजर लगी है. ये रूकना चाहिये किसानों की आत्मा है मंडी अगर ये मंडी को हाथ लगाएंगे तो किसान मारा जाएगा. बीजेपी धोखा देने की कोशिश ना करे.

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सरकार का कहना है कि फिलहाल 40 ए क्लास मंडियों में योजना लागू होंगी जहां किसान क्लीनिक में किसानों को मुफ्त इलाज मिलेगा. जिसके बाद योजना को प्रदेश की 300 से ज्यादा मंडियों में लागू किया जाएगा. किसान मॉल में हर तरह की सुविधा देने की योजना है.