
नई दिल्ली:
न इंसानी फितरत कभी बदली है, न बदलेगी, और गलत काम करने वाले लोग गलत काम करते रहने का रास्ता ढूंढ ही लेते हैं, इसलिए भारत सरकार द्वारा भ्रष्टाचार, काले धन और आतंकवाद के साये से निजात पाने के लिए उठाए गए नोटबंदी के कदम से कुछ हासिल नहीं हो पाएगा.
यह कहना है विश्वप्रसिद्ध पत्रिका 'फोर्ब्स' के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ स्टीव फोर्ब्स का. उन्होंने अपने संपादकीय में लिखा है कि ग्रह के आबाद होने के वक्त से ही इंसानी फितरत नहीं बदली है. गलत काम करने वाले कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेते हैं. आतंकवादी सिर्फ करेंसी बदल देने की वजह से अपनी बुरी हरकतें बंद नहीं कर देंगे, और धन का डिजिटाइज़ेशन होने में काफी वक्त लगने वाला है, वह भी उस स्थिति में, जब फ्री मार्केट की अनुमति दे दी जाएगी.
स्टीव फोर्ब्स के मुताबिक टैक्स चोरी से बचने का सबसे आसान उपाय एकसमान टैक्स दर, या कम से कम एक सरल और कम दर वाली टैक्स प्रणाली लागू करना होता है, जिसके बाद टैक्स चोरी करना ही व्यर्थ लगने लगे. स्टीव के मुताबिक कानूनन व्यापार करना आसान कर देंगे, तो ज़्यादातर लोग सही व्यापार करेंगे.
स्टीव फोर्ब्स का कहना है कि भारत इस समय नकदी के खिलाफ सरकारों के दिमाग में चढ़ी सनक का सबसे चरम उदाहरण है. बहुत-से देश बड़ी रकम के नोटों को बंद करने की दिशा में बढ़ रहे हैं, और वही तर्क दे रहे हैं, जो भारत सरकार ने दिए हैं, लेकिन इसे समझने में कोई चूक नहीं होनी चाहिए कि इसका असली मकसद क्या है - आपकी निजता पर हमला करना और आपकी ज़िन्दगी पर सरकार का ज़्यादा से ज़्यादा नियंत्रण थोपना.
स्टीव फोर्ब्स के अनुसार, भारत सरकार का यह घोर कृत्य अनैतिक भी है, क्योंकि मुद्रा वह वस्तु है, जो लोगों द्वारा बनाई गई वस्तुओं का प्रतिनिधित्व करती है. मुद्रा बिल्कुल वैसा ही वादा होती है, जैसा कोई सिनेमा या कार्यक्रम में शामिल टिकट होती है, जो आपको सीट मिलने की गारंटी देती है. इस तरह के संसाधन सरकारें नहीं, लोग पैदा करते हैं. जो भारत ने किया है, वह लोगों की संपत्ति की बहुत बड़े पैमाने पर चोरी है, जो लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार द्वारा किए गए होने की वजह से ज़्यादा चौंकाती है. ऐसा कुछ वेनेज़ुएला जैसे देश में होता, तो शायद इतनी हैरानी नहीं होती. और इससे भी कोई हैरानी नहीं होती कि सरकार इस सच्चाई को छिपा रही है कि इस एक कदम से एक ही झटके में दसियों अरब डॉलर का नुकसान होने जा रहा है.
अब भारत को ग्लोबल पॉवरहाउस बनने के लिए जो काम निश्चित रूप से करना चाहिए, वह है इन्कम तथा बिज़नेस टैक्स की दरों को घटा दे, और समूचे टैक्स ढांचे का सरलीकरण करे, रुपये को स्विस फ्रैंक जितनी शक्तिशाली मुद्रा बना दे, और नियमों को कम से कम कर दे, ताकि बिना किसी लागत के भी कुछ ही मिनटों में नया व्यापार शुरू किया जा सके.
यह कहना है विश्वप्रसिद्ध पत्रिका 'फोर्ब्स' के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ स्टीव फोर्ब्स का. उन्होंने अपने संपादकीय में लिखा है कि ग्रह के आबाद होने के वक्त से ही इंसानी फितरत नहीं बदली है. गलत काम करने वाले कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेते हैं. आतंकवादी सिर्फ करेंसी बदल देने की वजह से अपनी बुरी हरकतें बंद नहीं कर देंगे, और धन का डिजिटाइज़ेशन होने में काफी वक्त लगने वाला है, वह भी उस स्थिति में, जब फ्री मार्केट की अनुमति दे दी जाएगी.
स्टीव फोर्ब्स के मुताबिक टैक्स चोरी से बचने का सबसे आसान उपाय एकसमान टैक्स दर, या कम से कम एक सरल और कम दर वाली टैक्स प्रणाली लागू करना होता है, जिसके बाद टैक्स चोरी करना ही व्यर्थ लगने लगे. स्टीव के मुताबिक कानूनन व्यापार करना आसान कर देंगे, तो ज़्यादातर लोग सही व्यापार करेंगे.
स्टीव फोर्ब्स का कहना है कि भारत इस समय नकदी के खिलाफ सरकारों के दिमाग में चढ़ी सनक का सबसे चरम उदाहरण है. बहुत-से देश बड़ी रकम के नोटों को बंद करने की दिशा में बढ़ रहे हैं, और वही तर्क दे रहे हैं, जो भारत सरकार ने दिए हैं, लेकिन इसे समझने में कोई चूक नहीं होनी चाहिए कि इसका असली मकसद क्या है - आपकी निजता पर हमला करना और आपकी ज़िन्दगी पर सरकार का ज़्यादा से ज़्यादा नियंत्रण थोपना.
स्टीव फोर्ब्स के अनुसार, भारत सरकार का यह घोर कृत्य अनैतिक भी है, क्योंकि मुद्रा वह वस्तु है, जो लोगों द्वारा बनाई गई वस्तुओं का प्रतिनिधित्व करती है. मुद्रा बिल्कुल वैसा ही वादा होती है, जैसा कोई सिनेमा या कार्यक्रम में शामिल टिकट होती है, जो आपको सीट मिलने की गारंटी देती है. इस तरह के संसाधन सरकारें नहीं, लोग पैदा करते हैं. जो भारत ने किया है, वह लोगों की संपत्ति की बहुत बड़े पैमाने पर चोरी है, जो लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार द्वारा किए गए होने की वजह से ज़्यादा चौंकाती है. ऐसा कुछ वेनेज़ुएला जैसे देश में होता, तो शायद इतनी हैरानी नहीं होती. और इससे भी कोई हैरानी नहीं होती कि सरकार इस सच्चाई को छिपा रही है कि इस एक कदम से एक ही झटके में दसियों अरब डॉलर का नुकसान होने जा रहा है.
अब भारत को ग्लोबल पॉवरहाउस बनने के लिए जो काम निश्चित रूप से करना चाहिए, वह है इन्कम तथा बिज़नेस टैक्स की दरों को घटा दे, और समूचे टैक्स ढांचे का सरलीकरण करे, रुपये को स्विस फ्रैंक जितनी शक्तिशाली मुद्रा बना दे, और नियमों को कम से कम कर दे, ताकि बिना किसी लागत के भी कुछ ही मिनटों में नया व्यापार शुरू किया जा सके.
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