नई दिल्ली:
हिन्दी के वरिष्ठ साहित्य समालोचक डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी की रचना ‘व्योमकेश दरवेश’ को वर्ष 2014 के 28वें मूर्तिदेवी पुरस्कार के लिए चुना गया है।
भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, हिन्दी के प्रतिष्ठित समालोचक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के जीवन पर आधारित रचना ‘व्योमकेश दरवेश’ को वर्ष 2014 के लिए 28वें मूर्तिदेवी पुरस्कार के लिए चुना गया।
डॉ. एम वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता में शुक्वार को दिल्ली में हुई चयन समिति की बैठक में ज्ञानपीठ द्वारा दिए जाने वाले इस पुरस्कार का निर्णय किया गया। मूर्तिदेवी पुरस्कार प्रति वर्ष प्रदान किया जाता है।
मूर्तिदेवी पुरस्कार के रूप में त्रिपाठी को चार लाख रुपये नकद, सरस्वती की प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। 16 फरवरी 1931 को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के विस्कोहर गांव में जन्में त्रिपाठी की प्रमुख रचनाओं में लोकवादी तुलसीदास, मीरा का काव्य, देश के इस दौर में, कुछ कहानियां : कुछ विचार, जैसा कह सका और नंगातलाई का गांव शामिल है।
त्रिपाठी को व्यास सम्मान, गोकुलचंद्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार, डॉ. रामविलास शर्मा सम्मान और सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार से नवाजा जा चुका हैं।
भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, हिन्दी के प्रतिष्ठित समालोचक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के जीवन पर आधारित रचना ‘व्योमकेश दरवेश’ को वर्ष 2014 के लिए 28वें मूर्तिदेवी पुरस्कार के लिए चुना गया।
डॉ. एम वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता में शुक्वार को दिल्ली में हुई चयन समिति की बैठक में ज्ञानपीठ द्वारा दिए जाने वाले इस पुरस्कार का निर्णय किया गया। मूर्तिदेवी पुरस्कार प्रति वर्ष प्रदान किया जाता है।
मूर्तिदेवी पुरस्कार के रूप में त्रिपाठी को चार लाख रुपये नकद, सरस्वती की प्रतिमा और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। 16 फरवरी 1931 को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के विस्कोहर गांव में जन्में त्रिपाठी की प्रमुख रचनाओं में लोकवादी तुलसीदास, मीरा का काव्य, देश के इस दौर में, कुछ कहानियां : कुछ विचार, जैसा कह सका और नंगातलाई का गांव शामिल है।
त्रिपाठी को व्यास सम्मान, गोकुलचंद्र शुक्ल आलोचना पुरस्कार, डॉ. रामविलास शर्मा सम्मान और सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार से नवाजा जा चुका हैं।
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