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This Article is From Jul 22, 2015

बारिश और डीजल ने दिल्‍ली में बढ़ाए सब्जियों के दाम

बारिश और डीजल ने दिल्‍ली में बढ़ाए सब्जियों के दाम
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर...
नई दिल्‍ली: हरी-हरी दिखने वाली सब्जियां कीमत के मामले में लाल हो चली हैं। बारिश और डीजल की बढ़ी कीमत ने सब्जियों को महंगा कर दिया है। मंडियों से घर के पास ठेले तक पहुंचने में सब्जियों की कीमत कम से कम 10 रुपये प्रति किलो बढ़ जाती है और इसका सीधा असर झुग्गी में रहने वालों और दिहाड़ी मजदूरी करके गुजारा चलाने वालों पर पड़ा है। उनकी थाली में खाना तो है, लेकिन पौष्टिक निवाला नहीं।

मंडी में 30 रुपये किलो बिकने वाली भिंडी, लौकी, करेला और तोरी खुदरा में 40 की हो गई है। ऐसे ही 60 की गोभी और शिमला मिर्च ठेले पर 80 रुपये किलो मिल रही हैं। 40 रुपये किलो बिकने वाला बैंगन और परवल खुदरा में 60 रुपये का है। मटर मंडी में 90 रुपये किलो है जबकि खुदरा बाजार में 110 की। 50 रुपये किलो बिकने वाला बीन्स खुदरा में 80 रुपये मिल रहा है और 40 रुपये का टमाटर घर तक आते-आते 50 रुपये का हो चला है।

शास्त्री पार्क के यमुना खादर में 6 साल से रह रही फरजाना बताती हैं कि आलू तो अकेला सहारा है, लेकिन अगर सब्जी खानी होती है तो ताजी खरीद नहीं सकते। लिहाज़ा, दो से तीन दिन की बासी सब्जी बाजार से खरीदते हैं। 8 लोगों के फरजाना के परिवार दो लोगों की दिहाड़ी के दम पर चलता है। वहीं, करीब 100 झुग्गियों वाली इस बस्ती में खाना बना रहे मोहम्मद इलियास कहते हैं कि कभी मेन्यू में चावल, दाल और आलू की भुजिया होती है तो कभी आलू का चोखा।

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