New Delhi:
वर्ष 2008 के विश्वास प्रस्ताव में सरकार को जीत दिलाने के लिए सांसदों को रिश्वत देने की वेबसाइट विकिलीक्स के खुलासे पर एक समाचार पत्र में छपी रिपोर्ट की सरकार ने न तो पुष्टि की है और न ही से इसे खारिज किया है। समाचार पत्र 'द हिन्दू' में हुए इस खुलासे के बाद संसद के दोनों सदनों में विपक्ष द्वारा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार से इस्तीफे की मांग करने पर केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अमेरिकी सरकार और उसके विदेशी दूतावासों के बीच हुए संवाद भारत सरकार की पहुंच में नहीं है और इस पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती। पहली बार स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे राज्यसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर मुखर्जी ने कहा, "एक संप्रभु राष्ट्र को अपने दूतावासों से कुछ भी चर्चा करने की कूटनीतिक छूट होती है और इसका कोई रिकॉर्ड हासिल नहीं किया जा सकता, सरकार इस रिपोर्ट को न तो पुष्टि कर सकती है और न ही खारिज।" उन्होंने यह भी कहा कि 14वीं लोकसभा में जो कुछ भी हुआ इसके लिए 15वीं लोकसभा जवाबदेह नहीं है। उन्होंने कहा, "प्रत्येक लोकसभा अपनी अवधि में सम्प्रभु होती है, 14वीं लोकसभा में जो कुछ भी हुआ उसे 15वीं लोकसभा में नहीं खींचा जा सकता। 14वीं लोकसभा भंग हो चुकी है।" मुखर्जी ने यह भी कहा कि जो भी खुलासे हुए हैं वे किसी भी अदालत में साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य नहीं हैं। मुखर्जी के इस बयान पर हालांकि विपक्ष शांत नहीं हुआ और सदन में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को दबाना चाहती है। जेटली ने कहा, "अमेरिकी राजनयिकों को कूटनीतिक छूट हासिल हो सकती है लेकिन निश्चिततौर पर भारत सरकार भारत में भारतीयों द्वारा किए गए अपराध के लिए इस छूट का दावा नहीं कर सकती।" उन्होंने कहा, "यह कहना आसान है कि सदन संप्रभु है, लेकिन इन सभी कारकों को उस समय लागू नहीं किया जाता जब रिश्वत के अपराध को सदन के बाहर किया जाता है। आप मामले को दबाने के दोषी हैं।" इस पर आरोपों से उत्तेजित मुखर्जी ने विपक्ष को मामले को अदालत में ले जाने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, "यदि आपमें हिम्मत है तो आप अदालत जाइए।" इस बारे में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि एक सक्षम एजेंसी से इस मामले की जांच होनी चाहिए।
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विकीलीक्स, रिपोर्ट, खारिज