2016 की यूपी दरोगा भर्ती का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने दी हरी झंडी

सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2017 में आयोजित लिखित परीक्षा और उसके बाद आयोजित शारिरिक सहित अन्य परीक्षा के परिणाम को निरस्त करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है.

2016 की यूपी दरोगा भर्ती का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट ने दी हरी झंडी

यूपी दारोगा भर्ती परीक्षा को सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई हरी झंडी

नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2016 से लटकी यूपी दरोगा भर्ती (UP Daroga Recruitment 2016) का रास्ता साफ हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इसे हरी झंडी दे दी है. इलाहाबाद हाइकोर्ट ने आदेश के खिलाफ यूपी सरकार की याचिका मंजूर कर ली है. हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया गया है. उत्तर प्रदेश में पुलिस में सब इंस्पेक्टरों,  पलाटून कमांडेंट(पीएसी) और फायर ब्रिगेडअशिकारियों के करीब 2500 की भर्ती का रास्ता सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है. कोर्ट ने दिसंबर 2017 में आयोजित लिखित परीक्षा और उसके बाद आयोजित शारिरिक सहित अन्य परीक्षा के परिणाम (UP Daroga Exam) को निरस्त करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है.

हाईकोर्ट ने नियमों की अनदेखी किए जाने पर रिजल्ट को निरस्त कर दिया था और फिर से मेरिट लिस्ट बनाने का निर्देश दिया था. जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस विनीत शरण की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ यूपी सरकार की याचिका को स्वीकार कर लिया है. पीठ ने फरवरी 2019 में अथॉरिटी द्वारा जारी रिजल्ट को जल्द से जल्द अमल करने के लिए कहा है 
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वर्ष 2016 में राज्य पुलिस में 2400 सब इंस्पेक्टर, 210 पलाटून कमांडेंट और 97 फायर अधिकारी की भर्ती के लिए आवेदन मंगाए गए थे.

 इन पदों के लिए 630926 लोगों ने आवेदन किए गए थे. इनमें से 11734 छात्रों को आगे की परीक्षाओं के लिए बुलाया गया था. लिखित परीक्षा में 50 फीसदी अंक अनिवार्य था. इनमें से 5461 ने 50 फीसदी से अधिक अंक हासिल किए थे जबकि 5713 ने 50 फीसदी(नॉर्मर्लजाइशन को जोड़ कर) पाए थे. सभी 11734 छात्रों को आगे की परीक्षाओं के लिए बुलाया गया. इसके बाद 50 फीसदी हासिल करने वालों की अंतिम सूची तैयार की गई थी.

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इसके बाद हाईकोर्ट में मुकदमेबाजी का दौर चला और हाईकोर्ट ने इस आयोजित परीक्षा में नियमों की अनदेखी किए जाने पर रिजल्ट को निरस्त कर दिया और फिर से मेरिट लिस्ट बनाने का निर्देश दिया था. इस फैसले को यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2021 में सुनवाई पूरी कर फैसला सुऱक्षित रखा था.