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This Article is From Sep 30, 2015

बिहार के खराब सामाजिक संकेतकों के जरिए यूनिसेफ ने 'सुशासन बाबू' को दिखाया आईना

बिहार के खराब सामाजिक संकेतकों के जरिए यूनिसेफ ने 'सुशासन बाबू' को दिखाया आईना
पटना: यूनिसेफ ने बिहार में कम वजन के बच्चों की बड़ी संख्या, पेयजल एवं शौचालय सुविधा से वंचित घरों के ऊंचे प्रतिशत जैसे खराब सामाजिक संकेतकों को रेखांकित करते हुए इन चुनौतियों से पार पाने के प्रभावी उपायों पर जोर दिया।

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) द्वारा आयोजित दिनभर की एक कार्यशाला में मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला का आयोजन 'बच्चों के आंकड़ों की स्पष्टता' विषय के तहत किया गया था।

यूनिसेफ बिहार का कामकाज देखने वाले यामीन मजूमदार ने कहा कि जहां देश में 2013 में बाल मृत्यु दर 40 थी, वहीं बिहार में यह 42 थी।

2013 में एक निश्चित समयावधि में देश में जहां मातृ मृत्युदर प्रति 1 लाख शिशु जन्म पर 167 थी, वहीं बिहार में यह कहीं ज्यादा 208 थी। उन्होंने कहा कि जहां देश में 0-59 माह के कम वजन के शिशुओं का प्रतिशत 29.4 था वहीं बिहार में यह 37.1 था।

मजूमदार ने कहा कि शिक्षा के मामले में जहां 2014 में 6-13 उम्र समूह के तीन प्रतिशत बच्चे देश में स्कूल नहीं जाते थे वहीं बिहार में यह पांच प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि बिहार में 2012 में 97.8 प्रतिशत घर पेय जल से वंचित थे जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 87.8 प्रतिशत था।

इसी तरह 2012 में बिहार में 67.4 प्रतिशत घरों में शौचालय की सुविधा नहीं थी जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 43.4 प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि 2013-14 में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार बिहार में 20-24 साल के उम्र समूह में 18 साल से पहले विवाहित महिलाओं का आंकड़ा 47 प्रतिशत था जबकि देश में यह 30 प्रतिशत था।

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