
समाजसेवी मेधा पाटकर के नेतृत्व में मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के नर्मदा घाटी के किसान, मजदूरों ने ट्रैक्टरों की रैली निकालकर दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन (Farmers' Movement) को समर्थन देने का संकल्प लिया है. यह रैली बड़वानी,अंजड़, मंडवाड़ा, दवाना, ठीकरी होते हुए कल धार पहुंचेगी. रैली का मकसद है तीनों कृषि कानूनों का विरोध करना और साथ ही किसानों के लिए बिजली महंगी करते हुए सब्सिडी खत्म करने वाले बिजली बिल का विरोध करना. इसके विरोध में 'दिल्ली चलो' का नारा दिया गया है.
उधर कृषि कानूनों के खिलाफ राजस्थान, हरियाणा, गुजरात के किसान हरियाणा-राजस्थान की शाहजहांपुर सीमा पर जयपुर-दिल्ली हाईवे पर पिछले नौ दिनों से डटे हुए हैं. धरनास्थल पर किसान नेताओं ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. प्रेस कॉन्फ्रेंस को किसान संघर्ष समन्वय समिति कोटा के नेता बलविंदर सिंह, किसान सभा राज्याध्यक्ष पेमाराम और किसान सभा राज्य सचिव छगन चौधरी ने सम्बोधित किया.
किसान नेताओं ने खेती में विदेशी व कारपोरेट निवेश का पिछलग्गू बनने के लिए भाजपा-आरएसएस और मोदी सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा है कि 70 करोड़ लोग खेती पर जिंदा रहते हैं. इन कानूनों से उनकी जीविका दांव पर लग गई है. खेती के तीन कानून खेती के बाजार से सरकारी नियंत्रण हटा देंगे. कम्पनियों व बड़े व्यवसायियों द्वारा खाद्य का मुक्त भंडारण शुरू करा देंगे और किसानों को उनके साथ अनुबंध में फंसा देंगे. इससे किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा और गरीबों की कमजोर खाद्यान्न सुरक्षा और कमजोर हो जाएगी.
किसान आंदोलन को ओर तेज करने की घोषणा करते हुए किसान नेताओं ने ऐलान किया कि आज से सभी किसानों के प्रदर्शन स्थलों पर 24 घंटे का ‘क्रमिक अनशन' शुरू करेंगे. शाहजहांपुर बॉडर पर 11 किसान क्रमिक अनशन पर बैठे. 23 दिसंबर को किसानों ने एक वक्त का भोजन त्याग करने की घोषणा की है. साथ ही देशवासियों से अपील की है कि वे भी किसानों के समर्थन में 23 तारीख को एक वक्त का अन्न त्याग करें.
उन्होंने कहा कि 27 दिसंबर को जब प्रधानमंत्री मोदी ‘मन की बात' शुरू करें, सभी देशवासी अपने-अपने घरों में थाली बजाना शुरू करें. जब तक वे बोलते रहें तब तक थाली बजाते रहें. 25-27 दिसंबर को किसान अपने-अपने क्षेत्रों में सभी वाहनों के लिए टोल फ्री करेंगे.
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