
महाराष्ट्र में दोनों बड़े गठबंधनों में टूट के बाद पुराने दोस्तों में आरोपों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। गठबंधन टूटने के बाद कांग्रेस ने एनसीपी पर, तो शिवसेना ने बीजेपी पर राजनीतिक हमले शुरू कर दिए हैं।
गठबंधन टूटने के कुछ देर बाद ही महाराष्ट्र के कांग्रेसी मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया, जिसमें उन्होंने एनसीपी पर बीजेपी के साथ साठगांठ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आखिर क्या वजह थी कि बीजेपी-शिवसेना गठबंधन टूटने के कुछ देर बाद ही हमारा गठबंधन टूट गया।
उन्होंने कहा कि एनसीपी के कुछ नेता केंद्र में मंत्री पद पाना चाहते हैं, इस वजह से वे बीजेपी के साथ जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि गठबंधन तोड़ने के पीछे एनसीपी की सत्ता की भूख है।
कांग्रेस के आरोपों का खंडन करते हुए एनसीपी ने साफ कहा है कि वह बीजेपी के साथ नहीं जाएगी। एनसीपी नेता तारिक अनवर ने कहा कि बीजेपी के साथ जाना मुनासिब नहीं है।
15 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस एनसीपी के गठबंधन के टूटने के बाद एनसीपी ने महाराष्ट्र सरकार से भी अपना समर्थन वापस लेने का फैसला कर लिया। एनसीपी के नेता अजीत पवार आज महाराष्ट्र के राज्यपाल से मिलेंगे और उन्हें सरकार से समर्थन वापसी की चिट्ठी सौंपेंगे। एनसीपी के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद महाराष्ट्र में कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई है। इस वक्त महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों में से कांग्रेस के पास 82 और एनसीपी के पास 62 सीटें हैं।
गठबंधन टूटने के बाद एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कुछ ट्वीट किए हैं। पटेल ने अपने ट्वीट में कहा कि हम एक स्वतंत्र रास्ते पर अपनी सोच जैसे सेक्युलर दलों को साथ चलेंगे। महाराष्ट्र में हमने खुद को मजबूत किया है। पटेल ने लिखा कि कांग्रेस ने अकेले ही अपनी पहली सूची जारी कर दी, इसमें कई सीटें ऐसी भी थीं, जिन पर दोनों दलों के बीच उम्मीदवारी को लेकर चर्चा जारी थी।
पटेल ने कहा, हम अफसोस के साथ कहना चाहते हैं कि इतने लंबे समय तक साथ रहने के बाद भी कांग्रेस की ओर से एक व्यावहारिक फैसला नहीं लिया गया। ऐसा केवल एक बार हुआ था कि कांग्रेस ने हमें 124 सीटों का प्रस्ताव दिया था और हमने इसको ठुकरा दिया था। हमारी मांग 144 सीटों की थी।
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