New Delhi:
केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) के मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा जिम्मेदारी लेने के मुद्दे पर भाजपा के नेताओं के बीच किसी तरह के मतभेद को खारिज करते हुए लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि ट्विटर पर शब्दों की सीमा के कारण ऐसी बात सामने आई है। सुषमा ने कहा, पार्टी, मेरे और जेटली के बीच कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने (जेटली) जो मांग की है, उसके बारे में प्रधानमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि वह (सिंह) संसद में बयान देंगे। उन्होंने कहा, इसलिए मैंने ट्विटर पर इसे नहीं लिखा। ट्विटर पर शब्दों की सीमा है और यह 140 शब्दों से अधिक नहीं हो सकता। इसलिए इसे मैंने ट्विटर पर नहीं लिखा। भाजपा नेता ने कहा, अखबार में मेरे और जेटली के बीच मतभेद को दर्शाने का प्रयास किया गया है। यह अलग बात है कि उन्होंने (जेटली) संसद में प्रधानमंत्री के बयान की मांग की है, जबकि प्रधानमंत्री ने कहा है कि वह संसद में बयान देंगे। गौरतलब है कि सीवीसी के मुद्दे पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री के बयान के बाद बीजेपी की तरफ से अलग-अलग बयान सामने आए थे। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने जहां यह कहा कि इस मामले को अब खत्म मान लेना चाहिए, वहीं पार्टी प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि उन्हें संसद में जवाब देना चाहिए। सुषमा स्वराज ने माइक्रो ब्लागिंग वेबसाइट ट्विटर पर लिखा, मैं सीवीसी की नियुक्ति पर प्रधानमंत्री द्वारा जिम्मेदारी लेने की प्रशंसा करती हूं, जिसे उच्चतम न्यायालय ने रद्द कर दिया है। मैं समझती हूं कि यह पर्याप्त है। इस मामले को अब यहीं छोड़कर हमें आगे बढ़ना चाहिए। इससे पहले जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि वह थॉमस की नियुक्ति की जिम्मेदारी को स्वीकार करते हैं, जिसे उच्चतम न्यायालय ने अवैध करार दिया है।
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