
नई दिल्ली:
केरल में वर्ष 1996 में 16 साल की एक लड़की को अगवा कर उसके साथ 40 दिनों तक गैंगरेप करने के मामले में केरल हाइकोर्ट द्वारा 35 आरोपियों को बरी करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार के लिए मामले को वापस हाईकोर्ट के पास भेजते हुए टिप्पणी की है कि हाईकोर्ट ने पेश किए गए सबूतों का ढंग से निरीक्षण नहीं किया है। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट दोबारा सबूतों को देखे और अपना फैसला छह महीने के भीतर दे।
उल्लेखनीय है कि जनवरी, 1996 में केरल के इदुक्की जिले में स्थित सूर्यनेल्ली इलाके में 16 साल की बच्ची को अगवा कर 40 दिनों तक उसे कब्जे में रखा गया और राज्यों में अलग-अलग जगहों पर ले जाकर 42 लोगों ने उसके साथ बार-बार बलात्कार किया।
6 सितंबर, 2000 को विशेष ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में 36 आरोपियों को दोषी करार देते हुए अलग-अलग अवधि के लिए सश्रम जेल की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उनमें से 35 को बरी करते हुए, सिर्फ एक व्यक्ति को दोषी माना था और उसे पांच साल कैद की सजा सुनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार के लिए मामले को वापस हाईकोर्ट के पास भेजते हुए टिप्पणी की है कि हाईकोर्ट ने पेश किए गए सबूतों का ढंग से निरीक्षण नहीं किया है। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट दोबारा सबूतों को देखे और अपना फैसला छह महीने के भीतर दे।
उल्लेखनीय है कि जनवरी, 1996 में केरल के इदुक्की जिले में स्थित सूर्यनेल्ली इलाके में 16 साल की बच्ची को अगवा कर 40 दिनों तक उसे कब्जे में रखा गया और राज्यों में अलग-अलग जगहों पर ले जाकर 42 लोगों ने उसके साथ बार-बार बलात्कार किया।
6 सितंबर, 2000 को विशेष ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में 36 आरोपियों को दोषी करार देते हुए अलग-अलग अवधि के लिए सश्रम जेल की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उनमें से 35 को बरी करते हुए, सिर्फ एक व्यक्ति को दोषी माना था और उसे पांच साल कैद की सजा सुनाई थी।
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