
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
चाइल्ड पोर्नोग्राफी सहित पोर्नोग्राफी पर पाबन्दी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए दो हफ्ते का और समय दिया। कोर्ट ने केंद्र को कहा कि पोर्नोग्राफी साइट्स पर रोक लगाने को लेकर सरकार क्या कदम उठा रही है, ये बताए, खास तौर पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी को लेकर।
दरअसल, पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब सार्वजनिक स्थानों पर पॉर्न फिल्में देखना नहीं है। यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार का जवाब सुनने के बाद की थी। देश में पॉर्न साइटों पर पाबंदी लगाने के सवाल पर केंद्र सरकार ने कहा था कि इसमें प्राइवेसी सबसे बड़ी बाधा है।
इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चाइल्ड पॉर्नोग्राफी पर अंकुश कैसे लगाया जाए, इस पर एक हलफनामा दायर करने के लिए कहा था। केंद्र ने इसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट जानकारी दी थी कि बाल अश्लीलता को बंद करने के लिए काम शुरू हो गया है और अगली बार स्कीम से साथ आएंगे।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा था कि बच्चे अब और दर्दनाक स्थिति के शिकार नहीं हो सकते हैं। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश बच्चों के साथ और प्रयोग नहीं कर सकता है। अगली सुनवाई 25 अप्रैल को होगी।
दरअसल, पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब सार्वजनिक स्थानों पर पॉर्न फिल्में देखना नहीं है। यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार का जवाब सुनने के बाद की थी। देश में पॉर्न साइटों पर पाबंदी लगाने के सवाल पर केंद्र सरकार ने कहा था कि इसमें प्राइवेसी सबसे बड़ी बाधा है।
इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को चाइल्ड पॉर्नोग्राफी पर अंकुश कैसे लगाया जाए, इस पर एक हलफनामा दायर करने के लिए कहा था। केंद्र ने इसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट जानकारी दी थी कि बाल अश्लीलता को बंद करने के लिए काम शुरू हो गया है और अगली बार स्कीम से साथ आएंगे।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा था कि बच्चे अब और दर्दनाक स्थिति के शिकार नहीं हो सकते हैं। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश बच्चों के साथ और प्रयोग नहीं कर सकता है। अगली सुनवाई 25 अप्रैल को होगी।
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