कोरोना की दूसरी लहर धीमी पड़ते ही 'लापरवाह' हुए लोग, R-फैक्टर फिर बन रहा चिंता का विषय, जानें क्‍या हैं इसके मायने..

कोरोना के मामले कम होते ही लोगों की लापरवाही सामने आ रही है और लोग प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना भीड़ लगाने लगे हैं.

कोरोना की दूसरी लहर धीमी पड़ते ही 'लापरवाह' हुए लोग, R-फैक्टर फिर बन रहा चिंता का विषय, जानें क्‍या हैं इसके मायने..

महाराष्‍ट्र में कोरोना के नए मामलों की संख्‍या अब धीरे-धीरे बढ़ रही है (प्रतीकात्‍मक फोटो)

मुंंबई:

कोरोना की दूसरी लहर अभी पूरी तरह थमी नहीं है और अब कई राज्यों में फिर से बढ़ रहे मामले, चिंता में इजाफा कर रहे हैं. कोरोना के बढ़ते मामलों में सबसे अहम चीज़ R-फैक्टर है, जिससे वायरस के फैलने की रफ्तार की जानकारी मिलती है. इंस्‍टीट्यूट ऑफ मैथामेटिकल साइंसेस इन चेन्‍नई(Institute of Mathematical Sciences in Chennai) के विश्लेषण के मुताबिक़, ये  एक बार फिर  बढ़ रहा है. महाराष्ट्र, केरल और पूर्वोत्तर के राज्यों में इसकी रफ़्तार दर्ज हुई है.कोरोना के मामले कम होते ही लोगों की लापरवाही सामने आ रही है और लोग प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना भीड़ लगाने लगे हैं. कोरोना मामलों के कम होने और थोड़ी रियायतों के बीच मुंबई से नज़दीक लोनावला में भी भीड़ इकट्ठा होने का सिलसिला चल पड़ा है. भीड़ के साथ कोरोना भी फिर से बढ़ रहा है।महाराष्ट्र में जून के आख़िर या जुलाई की शुरुआत तक 6 हज़ार कोविड केस रोज़ आ रहे थे लेकिन अब आठ से नौ या कभी कभी दस हज़ार तक केस आने लगे हैं. केरल में नए मामलों के उछाल के कारण चिंता बढ़ी है, जबकि मणिपुर-अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में भी केस तेज़ी से बढ़ रहे हैं.

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इस बीच, चेन्नई में Institute of Mathematical Sciences के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक विश्लेषण से पता चला है कि देशभर में R-फैक्टर फिर बढ़त के ट्रेंड में दिख रहा है. R-फ़ैक्टर का अर्थ है, एक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आकर औसतन संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या. जब कोरोना की दूसरी लहर अपने पीक पर थी, तब R-वैल्यू 1.37 तक थी. मई में ये 1.19 तक पहुंच गई और जून में गिरकर ये 0.78 पर आ गई थी. अब फिर इसका ट्रेंड ऊपर गया है और ये 0.88 तक पहुंची है यानी कोरोना वायरस से संक्रमित किन्हीं 100 लोगों का समूह औसतन 88 लोगों को ये संक्रमण दे सकता है.कुछ राज्यों में आर फैक्टर एक से ऊपर है- केरल में आर-वैल्यू- 1.10 के आसपास है. पूर्वोत्तर राज्यों में मणिपुर के लिए आर वैल्यू 1 से ज़्यादा है. मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, सिक्किम, असम अरुणाचल प्रदेश में भी एक के आसपास है.


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चेन्नई के इंस्टीट्यूट ऑफ मेथमेटिकल साइंस के रिसर्चर प्रोफ़ेसर डॉ सिताभ्र सिन्हा बताते हैं, 'कोरोना महामारी की शुरुआत से ही भारत के राज्यों में आर वैल्यू पर नज़र रख रहे हैं, कहते हैं पॉइंट वन की बढ़त भी चिंता का विषय है.' उन्‍होंने कहा, 'आंकड़ों का अंतर आपको काफ़ी कम नज़र आ रहा होगा लेकिन ये आंकड़ा, तेज़ी से बढ़त बयां करता है, इसलिए अगर 0.1 का भी एकदम छोटा अंतर दिखे तो समझिए ये आने वाले कुछ हफ़्तों में बड़ा असर दिखा सकता है. नंबर ज़्यादा हो तो संक्रमण का दायरा भी बढ़ता है. ये चिंता का विषय है की ऐक्टिव केसस में कमी की जो तेज रफ़्तार थी, वो धीमी पड़ी है. भारत का औसतन R-वैल्यू बढ़ा है, बड़े राज्यों में बढ़ा है, महाराष्ट्र में 0.81 से 0.89 पर आया है.'' R-फ़ैक्टर के आई इस बढ़त के बीच महाराष्ट्र के 8 ज़िले चिंता का विषय बने हुए हैं. कोल्हापुर, सतारा, सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी, पुणे, सांगली, पालघर, और रायगढ़ संक्रमण के मामले और पोसिटिविटी रेट में बढ़त रिपोर्ट कर रहे हैं. इन ज़िलों पर प्रशासन नज़र बनाए हुए है.