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This Article is From Jul 05, 2017

खातों से रोक हटाने का मामला : तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका पर सुनवाई पूरी, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता और गुजरात पुलिस को एक हफ्ते के भीतर अपने लिखित जवाब दाखिल करने को कहा है.

खातों से रोक हटाने का मामला : तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका पर सुनवाई पूरी, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
तीस्‍ता सीतलवाड़ (फाइल फोटो)
नई दिल्‍ली: 2002 के गुजरात दंगों में गुलबर्ग सोसाइटी में पीड़ि‍तों के लिए मेमोरियल बनाने के लिए चंदे में हेरफेर की आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और उनके ट्रस्ट के बैंक खाते फ्रीज करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. बैंक खाते डीफ्रीज होंगे या नहीं, सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा. सुनवाई के दौरान तीस्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में गुजरात सरकार पर सवाल उठाए गए. कपिल सिब्बल ने कहा, 'गुजरात पुलिस उन पर बेवजह दबाव बना रही है. ये सरकार का दुर्भावनापूर्ण कदम है. सरकार इस निचले स्तर पर पहुंचेगी कभी नहीं सोचा था. उन्‍होंने कहा कि सरकार सात सालों में 7870 रुपये के खर्च को बढ़ा चढ़ाकर बता रही है. इन बिलों में शराब के चंद रुपये थे लेकिन सरकार ऐसे बता रही है जैसे लाखों रुपये खर्च कर दिए हों.

गुजरात पुलिस जिस बड़े मियां रेस्तरां को लग्जरी बता रही है वो मुंबई में रोड साइड खाने की दुकान है. गुलबर्ग सोसाइटी में मेमोरियल बनाने के लिए इकट्ठा किया चंदा 4.32 लाख रुपये उनके सबरंग ट्रस्ट में आया लेकिन गुजरात सरकार ने संबरंग के साथ-साथ दो निजी खातों के अलावा दूसरे NGO सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस संगठन का बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया है. सिब्‍बल ने सवाल करते हुए कहा, 'इस खाते में FCRA के तहत फोर्ड फाउंडेशन से डोनेशन आती है और HRD मंत्रालय से भी डोनेशन आती है. ऐसे में सबरंग ट्रस्ट में लिए गए डोनेशन के लिए इन खातों को क्यों फ्रीज किया गया? यहां तक कि ट्रस्टियों ने जो डोनेशन दिया वो भी फ्रीज कर दिया.'

वहीं गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 'तीस्ता ने गुलबर्ग सोसाइटी में दंगा पीड़ि‍तों के लिए मेमोरियल बनाने के नाम पर चंदा इकट्ठा किया. पुलिस की जांच में पाया गया कि इसके बाद इस डोनेशन के रुपयों को शराब, खाना, कपड़े और फिल्मों के लिए निजी खर्च के तौर पर इस्तेमाल किया. साथ ही इस चंदे को CJP के अकाउंट व निजी बैंक खातों में भी ट्रांसफर किया गया.'

सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता और गुजरात पुलिस को एक हफ्ते के भीतर अपने लिखित जवाब दाखिल करने को कहा है. पहले सुनवाई में तीस्ता की ओर से कपिल सिब्बल ने कहा था कि गुजरात पुलिस ने तीस्ता के दो निजी खातों के अलावा सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस संगठन का बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया है जबकि आरोप सबरंग ट्रस्ट पर लगे हैं. सबरंग का खाता भी फ्रीज है.

तीस्ता सीतलवाड़ और जावेद पर 2002 के गुजरात दंगों के दौरान अहमदाबाद की गुलबर्गा सोयायटी में हुई तबाही की याद में म्यूजियम बनाने के लिए किए गए चंदे की हेराफेरी का केस दर्ज किया गया है. गुजरात हाई कोर्ट ने दोनों की अग्रिम जमानत अर्जी रद्द कर दी थी. इसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसने अग्रिम जमानत दी है. तब से यह केस तीन सदस्यीय पीठ की सुनवाई के लिए लंबित है. इससे पहले गुजरात हाईकोर्ट ने खातों को डिफ्रीज करने से इनकार किया था.
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