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This Article is From May 26, 2020

VIZAG गैस लीक केस: सुप्रीम कोर्ट ने LG पॉलिमर को प्‍लांट के निरीक्षण की इजाजत दी, 30 कर्मियों की सूची सौंपने को कहा

सुनवाई के दौरान एलजी पॉलिमर के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि गैस रिसाव की जांच करने के लिए विभिन्न प्राधिकरण द्वारा कई समितियों की नियुक्ति की गई है और वे प्लांट का दौरा करेंगे लेकिन एलजी पॉलिमर के कर्मचारी वहां नहीं होंगे और प्लांट के अंदर सामग्री पड़ी रहेगी.

VIZAG गैस लीक केस: सुप्रीम कोर्ट ने LG पॉलिमर को प्‍लांट के निरीक्षण की इजाजत दी, 30 कर्मियों की सूची सौंपने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने एलजी पॉलिमर को अपने 30 कर्मचारियों की सूची सौंपने को कहा है
नई दिल्ली:

विशाखापट्टनम गैस लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एलजी पॉलिमर को प्‍लांट का निरीक्षण करने के लिए अनुमति दी. मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एलजी पॉलिमर अपने 30 कर्मचारियों की सूची जिला कलेक्टर को प्लांट तक पहुंचाने के लिए सौंपगा. यह आदेश याचिकाकर्ताओं द्वारा आपातकालीन पहुंच के रूप में पारित किया गया है. इससे पहले सुनवाई के दौरान एलजी पॉलिमर के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि गैस रिसाव की जांच करने के लिए विभिन्न प्राधिकरण द्वारा कई समितियों की नियुक्ति की गई है और वे प्लांट का दौरा करेंगे लेकिन एलजी पॉलिमर के कर्मचारी वहां नहीं होंगे और प्लांट के अंदर सामग्री पड़ी रहेगी. SC ने कहा कि आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष अन्य सभी मुद्दों पर प्रकाश डाला जा सकता है जो मामले की सुनवाई कर रहा है. इस मामले में 8 जून को फिर से सुनवाई होगी.

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए NGT के आदेश पर कोई भी आदेश जारी करने से इंकार किया था. शीर्ष अदालत ने कहा था कि मामला NGT में लंबित है इसलिए वो कोई आदेश जारी नहीं करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने एलजी पॉलिमर इंडिया को इस बात की आजादी दी थी कि अपनी बात वो NGT के सामने रख सकते हैं. कोर्ट ने इसे पूरी तरह कानूनी मामला बताया थी और आदेश लंबित रखा था. NGT ने अगले दिन संज्ञान लेकर कमेटी बनाई शायद उसे हाईकोर्ट की सुनवाई के बारे में जानकारी नहीं होगी.ऐसे में याचिकाकर्ता NGT में जाकर ये तथ्य रख सकता है.एलजी पॉलिमर इंडिया की ओर से मुकुल रोहतगी ने कहा कि NGT के आदेशानुसार 50 करोड रुपये जमा कराए गए हैं लेकिन इस मामले की जांच के लिए सात कमेटी बना दी गई हैं. कमेटी ने बिना नोटिस दिए तीन बार प्लांट का दौरा किया. NGT के पास स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई शुरू करने का क्षेत्राधिकार नहीं है. NGT के अलावा हाईकोर्ट ने भी सुनवाई की. इसके अलावा NHRC और राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी जांच कमेटी बना दी. उन्‍होंने कहा कि केंद्र सरकार भी मामले की जांच कर रही है और NGT की कमेटी पर रोक लगाई जाए.

गौरतलब है कि सात मई को विशाखापट्टनम के एलजी पॉलिमर के प्‍लांट में गैस लीक के बाद आठ मई को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एलजी पॉलिमर इंडिया प्राइवेट को  50 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि जमा करने का निर्देश दिया था. यह राशि उसे मजिस्ट्रेट के पास जमा करनी थी. कोर्ट ने इसके अलावा केंद्र और एलजी पॉलिमर इंडस्ट्री और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) समेत अन्य को भी नोटिस जारी किया. एनजीटी न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने इस घटना की जांच करने के लिए न्यायमूर्ति बी शेषासन रेड्डी की एक पांच सदस्यीय समिति का गठन किया, इन्हें 18 मई से पहले एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी. विशाखापट्टनम में गैस लीक  होने से 11 लोगों की मौत हुई थी जबकि लगभग 200 लोगों को अस्‍पताल में भर्ती कराना पड़ा था. NGT का कहना था कि इस मामले को देखकर स्पष्ट पता चलता है कि कंपनी नियमों और दूसरे वैधानिक प्रावधानों को पूरा करने में नाकाम रही है, जिसके कारण यह हादसा हुआ.

VIDEO: विशाखापट्टनम में गैस लीक के बाद ऑपरेशन क्लीनअप

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