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This Article is From Jan 01, 2017

अखिलेश यादव का मास्‍टरस्‍ट्रोक : समाजवादी पार्टी में अब 'अखिलेश युग'!

अखिलेश यादव का मास्‍टरस्‍ट्रोक : समाजवादी पार्टी में अब 'अखिलेश युग'!
अखिलेश यादव अपनी स्‍वच्‍छ छवि और विकासपरक राजनीति के चलते लोकप्रिय हुए
नई दिल्‍ली: समाजवादी पार्टी के लखनऊ में आयोजित विशेष राष्‍ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश यादव ने जबर्दस्‍त सियासी मास्‍टरस्‍ट्रोक खेला है. रामगोपाल यादव द्वारा आयोजित विशेष अधिवेशन में मुलायम सिंह यादव की जगह अखिलेश यादव को सपा का राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष घोषित करने के साथ माना जा रहा है कि सपा में अब 'अखिलेश युग' का सूत्रपात हो गया है. मुलायम सिंह को पार्टी का रहनुमा मानते हुए संरक्षक बनाया गया है. उनके करीबियों में शुमार शिवपाल की प्रदेश अध्‍यक्ष की गद्दी छीन ली गई है. साथ ही अखिलेश यादव खेमे के आंख की किरकिरी बने अमर सिंह को पार्टी से बेदखल कर दिया गया.

इसको इसलिए भी अखिलेश का मास्‍टरस्‍ट्रोक माना जा रहा है क्‍योंकि उन्‍होंने पार्टी से छह साल के लिए निकाले जाने के 24 घंटे में ही न केवल पार्टी में वापसी की बल्कि उसके अगले दिन ही पार्टी पर पूरी तरह से अपने हाथ में कमान ले ली. माना जा रहा है कि मुलायम सिंह को उम्‍मीद थी कि एक बार सुलह होने के बाद अखिलेश और रामगोपाल यादव पार्टी अधिवेशन नहीं बुलाएंगे. सुलह भी हुई लेकिन इन नेताओं ने अपने रुख से पीछे हटते हुए सीधे आर-पार की लड़ाई में फिलहाल पूरी तरह से पार्टी पर अपना वर्चस्‍व कायम कर लिया है. इस रुख के चलते अखिलेश ने पार्टी में अपना वर्चस्‍व भी स्‍थापित कर लिया.

इसको इसलिए भी मास्‍टरस्‍ट्रोक कहा जा रहा है कि आज लखनऊ में रामगोपाल यादव द्वारा आयोजित पार्टी के विशेष अधिवेशन में मुलायम सिंह की चेतावनी के बावजूद बड़ी संख्‍या में सपा समर्थक पहुंचे थे. इसको शनिवार के बाद रविवार को फिर से अखिलेश का शक्ति प्रदर्शन माना गया. इससे यह भी साफ हो गया कि पार्टी में हवा का रुख किस तरफ है.

सपा कार्यकर्ताओं के पोस्‍टरों में मुलायम को जगह नहीं 
एक खास बात यह रही कि पूरे अधिवेशन में केवल अखिलेश यादव और उनकी पत्‍नी डिंपल यादव के ही पोस्‍टर लहराए जाते रहे. ऐसा आमतौर पर सपा में परंपरागत रूप से नहीं होता रहा क्‍योंकि हर पोस्‍टर में मुलायम सिंह का फोटो अनिवार्य रूप से दिखता था. लेकिन आज पोस्‍टर में केवल अखिलेश और डिंपल के ही पोस्‍टर यह इशारा कर रहे थे कि सपा में अब वर्चस्‍व अखिलेश का होगा.

हालांकि इससे पहले शनिवार सुबह अखिलेश द्वारा अपनी ताकत दिखाने के बाद मुलायम को जमीनी हकीकत का अहसास हुआ और पार्टी की वरिष्‍ठ नेताओं की मध्‍यस्‍थता में सुलह का रास्‍ता निकाला गया. नतीजतन इन दोनों नेताओं की 24 घंटे के भीतर ही पार्टी में वापसी हो गई. इस पूरी सियासी उठापठक में कहा गया कि शह-मात के खेल में अखिलेश यादव ने वह बाजी भी जीती और पार्टी में अपने विरोधियों को पछाड़कर मुलायम सिंह के बाद पार्टी के निर्विवाद रूप से सबसे बड़े नेता के रूप में स्‍थापित हुए.  

उसकी बानगी इस बात से भी दिखती है कि अखिलेश यादव के मुख्‍य रणनीतिकार माने जा रहे रामगोपाल यादव ने पार्टी में वापसी होने के बावजूद अपने घोषित कार्यक्रम को रद नहीं किया. उसी का नतीजा है कि आज महाधिवेशन बुलाया गया. पार्टी से निष्‍कासन के बाद भी अखिलेश और रामगोपाल झुकने से इनकार करते हुए महाअधिवेशन बुलाने पर अड़े रहे थे.

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